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मुख्यमंत्री को सीडी में भेजी 450 अवैध इमारतों की फोटो
सौरभ खन्ना/अमर उजाला, जालंधर
Updated Mon, 14 Dec 2015 10:08 PM IST
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शहर में बनी 450 अवैध इमारतों का मामला जल्द ही मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के पास पहुंचने वाला है। सीएम को इन अवैध इमारतों की जानकारी शिअद के जालंधर इंचार्ज एवं पूर्व मंत्री सेवा सिंह सेवा देंगे।
सिर्फ कागजी दस्तावेज ही नहीं बल्कि अवैध निर्माण की खींची गई फोटो भी सीएम को दिखाई जाएगी।
450 अवैध इमारतों की ली गई फोटो एक सीडी में डालकर नगर निगम के सीनियर डिप्टी मेयर कमलजीत सिंह भाटिया ने सेखवां को थमाई थी।
इस सीडी की बात शिअद हाईकमान में गूंजने लगी है। जल्द ही यह सीडी मुख्यमंत्री को दिखाई जाएगी। सेखवां रविवार को जालंधर में नगर निगम के पार्षदों व एसटीपी (सीनियर टाउन प्लानर) में चल रहे विवाद की जांच करने आए थे।
सर्किट हाउस के बंद कमरे में सेखवां ने एक-एक करके हर एक शख्स की बात को सुना था। इस दौरान वरिष्ठ अकाली नेता एवं सीनियर डिप्टी मेयर कमलजीत सिंह भाटिया ने शहर में बनी 450 अवैध इमारतों का पूरा लेखा जोखा सेखवां को थमाया था।
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इसमें कागजी दस्तावेज, अखबारों में छपी ढेरों खबरें इत्यादि के साथ एक सीडी सौंपी गई। सेखवां को दी गई सीडी में 450 अवैध इमारतों की फोटो डाली गई है, ताकि सीएम को पता चल सके कि किस तरह अवैध बिल्डिगों का निर्माण जालंधर में हो रहा है और हो चुका है।
सीडी में हर एक अवैध बिल्डिंग की दो से तीन फोटो डाली गई हैं। इन इमारतों का निर्माण शहर की अलग-अलग जगहों में हुआ है। इनमें कामर्शियल बिल्डिंग सबसे अधिक हैं।
इसके अलावा कागजी दस्तावेज में अवैध बिल्डिंग की लिखित जानकारी दी गई है। इन दस्तावेजों में अवैध इमारतों से हुए सरकारी राजस्व के नुकसान का भी वर्णन किया गया है।
जालंधर में हुए अवैध निर्माण का जिम्मेदार नगर निगम के बिल्डिंग विभाग को ठहराया गया है। रविवार को सर्किट हाउस में हुई मीटिंग में कमलजीत सिंह भाटिया निगम में फैले काले कारनामों के सभी सबूत इकट्ठा कर लाए थे।
उन्होंने इन सभी सबूतों की एक कॉपी सेखवां को सौंपी दी थी। इसके अलावा भाटिया ने सेखवां को निगम में फैले भ्रष्टाचार की पूरी जानकारी देने के साथ कहा कि कार्पोरेशन में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच चुका है।
इसके अलावा पार्षदों पर हावी हो रही अफसरशाही और एसटीपी की ओर से पार्षदों को बोले गए अपशब्द की जानकारी सेखवां को दी थी।
कमलजीत सिंह भाटिया इस मामले से पहले जालंधर में बनी अवैध इमारतों की शिकायत विजिलेंस में कर चुके हैं। इसे लेकर भाटिया को विजिलेंस अधिकारियों ने बुलवाया भी था, मगर बाद में कोई रिजल्ट नहीं निकाल और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।
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सिर्फ कागजी दस्तावेज ही नहीं बल्कि अवैध निर्माण की खींची गई फोटो भी सीएम को दिखाई जाएगी।
450 अवैध इमारतों की ली गई फोटो एक सीडी में डालकर नगर निगम के सीनियर डिप्टी मेयर कमलजीत सिंह भाटिया ने सेखवां को थमाई थी।
इस सीडी की बात शिअद हाईकमान में गूंजने लगी है। जल्द ही यह सीडी मुख्यमंत्री को दिखाई जाएगी। सेखवां रविवार को जालंधर में नगर निगम के पार्षदों व एसटीपी (सीनियर टाउन प्लानर) में चल रहे विवाद की जांच करने आए थे।
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सर्किट हाउस के बंद कमरे में सेखवां ने एक-एक करके हर एक शख्स की बात को सुना था। इस दौरान वरिष्ठ अकाली नेता एवं सीनियर डिप्टी मेयर कमलजीत सिंह भाटिया ने शहर में बनी 450 अवैध इमारतों का पूरा लेखा जोखा सेखवां को थमाया था।
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इसमें कागजी दस्तावेज, अखबारों में छपी ढेरों खबरें इत्यादि के साथ एक सीडी सौंपी गई। सेखवां को दी गई सीडी में 450 अवैध इमारतों की फोटो डाली गई है, ताकि सीएम को पता चल सके कि किस तरह अवैध बिल्डिगों का निर्माण जालंधर में हो रहा है और हो चुका है।
सीडी में हर एक अवैध बिल्डिंग की दो से तीन फोटो डाली गई हैं। इन इमारतों का निर्माण शहर की अलग-अलग जगहों में हुआ है। इनमें कामर्शियल बिल्डिंग सबसे अधिक हैं।
इसके अलावा कागजी दस्तावेज में अवैध बिल्डिंग की लिखित जानकारी दी गई है। इन दस्तावेजों में अवैध इमारतों से हुए सरकारी राजस्व के नुकसान का भी वर्णन किया गया है।
जालंधर में हुए अवैध निर्माण का जिम्मेदार नगर निगम के बिल्डिंग विभाग को ठहराया गया है। रविवार को सर्किट हाउस में हुई मीटिंग में कमलजीत सिंह भाटिया निगम में फैले काले कारनामों के सभी सबूत इकट्ठा कर लाए थे।
उन्होंने इन सभी सबूतों की एक कॉपी सेखवां को सौंपी दी थी। इसके अलावा भाटिया ने सेखवां को निगम में फैले भ्रष्टाचार की पूरी जानकारी देने के साथ कहा कि कार्पोरेशन में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच चुका है।
इसके अलावा पार्षदों पर हावी हो रही अफसरशाही और एसटीपी की ओर से पार्षदों को बोले गए अपशब्द की जानकारी सेखवां को दी थी।
कमलजीत सिंह भाटिया इस मामले से पहले जालंधर में बनी अवैध इमारतों की शिकायत विजिलेंस में कर चुके हैं। इसे लेकर भाटिया को विजिलेंस अधिकारियों ने बुलवाया भी था, मगर बाद में कोई रिजल्ट नहीं निकाल और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।