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भाजपा नेताओं की खिचाई: रूपाणी बोले- पार्टी फंड भेजती है, फिर भी वोट नहीं पड़े, निगम चुनाव अपने बलबूते पर लड़ो
Wed, 27 Nov 2024 06:25 PM IST
अंकेश ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Wed, 27 Nov 2024 06:25 PM IST
सार
पंजाब की चार विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा के तीन उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई है। इससे पार्टी प्रभारी विजय रूपाणी खासे नाराज हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया है कि निगम चुनाव नेता और प्रत्याशी अपने बलबूते पर लड़ें।
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पंजाब भाजपा प्रभारी विजय रूपाणी।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपनी सियासी जमीन तलाश रही है। पंजाब में हाल ही हुए उपचुनावों के नतीजों से पार्टी नेता व हाई कमान काफी असहज है। पंजाब भाजपा प्रभारी विजय रूपाणी खासे नाराज हैं और उन्होंने हाल ही में जालंधर दौरे के दौरान अपनी नाराजगी व्यक्त भी की है।
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रूपाणी के अनुसार पार्टी की तरफ से पंजाब में उम्मीदवारों को फंड भेजा जाता है और प्रचार के लिए पैसा भी दिया जाता है, लेकिन वोट कम पड़ती हैं। उन्होंने साफ कहा कि निगम चुनाव आ रहे हैं। प्रत्याशी व स्थानीय नेता देखें कि कैसे प्रचार पर खर्च करना है। रूपाणी की इन बातों से नाराजगी साफ थी कि पंजाब में चार सीटों पर हुए उपचुनाव में तीन पर पार्टी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई है।
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शिअद के वोट बैंक पर टीकी थी आश
लोकसभा चुनाव में भाजपा को 18 प्रतिशत वोट मिले थे। उपचुनाव में शिरोमणि अकाली दल के चुनाव न लड़ने से भाजपा को उम्मीद थी कि इस वोट बैंक के सहारे भाजपा को सफलता जरूर मिलेगी। खास बात यह थी कि लोकसभा में पार्टी ने अपने काडर के नेताओं को उतारा था, लेकिन उपचुनाव में तो सीधे दूसरी पार्टियों से आए उम्मीदवार को ही टिकट दी थी। राष्ट्रवाद व हिंदुत्व का नारा लेकर चल रही भाजपा ने चारों सीटों पर किसी हिंदू उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया, यह बात भी कुछ टकसाली भाजपा नेताओं ने रूपाणी के समक्ष रखी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि उन्होंने रूपाणी के सामने सारी पिक्चर रखी है कि भाजपा को अपने टकसाली नेताओं को तरजीह देनी होगी।
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इन दोनों सीटों पर थी जीत की उम्मीद
बरनाला और गिद्दड़बाहा सीट पर पार्टी को पूरी उम्मीद थी। यहां पर कांग्रेस से भाजपा में आए दो दिग्गज मनप्रीत बादल और केवल ढिल्लों चुनाव लड़ रहे थे। दोनों उम्मीदवारों ने इन सीटों को पहले से क्रमश: चार और दो बार जीत हासिल की है। गिद्दड़बाहा सीट से मनप्रीत बादल को मात्र 12,227 वोट मिले जबकि लोकसभा चुनाव में किसानों के सबसे ज्यादा विरोध का सामना कर रहे पार्टी के उम्मीदवार हंसराज हंस को 14,850 वोट मिले थे। बरनाला सीट पर पार्टी की जमानत तो बच गई लेकिन उनके उम्मीदवार केवल ढिल्लों को कुल 17,958 वोट मिले। जबकि लोकसभा चुनाव के दौरान उनके उम्मीदवार अरविंद खन्ना को 19,218 वोट मिले थे।
ठंडन पर जताया था भरोसा
चब्बेवाल सीट पर पार्टी ने पूर्व अकाली मंत्री सोहन सिंह ठंडल को पार्टी में शामिल करके मैदान में उतार दिया। सोहन सिंह ठंडल को मात्र 8,692 वोट मिले। इससे पहले ठंडल ने शिअद की टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था तब उन्हें यहां से 11,935 वोट मिले थे।
रवि काहलों की भी जमानत जब्त
डेरा बाबा नानक सीट पर भी पार्टी ने पूर्व स्पीकर निर्मल सिंह काहलों के बेटे रवि करण काहलों को टिकट दिया था, लेकिन यहां भी पार्टी उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई। चार सीटों पर उपचुनाव में से केवल ढिल्लों ही एक ऐसे प्रत्याशी हैं जिन्हें लोकसभा के भाजपा उम्मीदवार से ज्यादा वोट मिले। काहलों को 6,505 वोट मिले जबकि पांच महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी दिनेश बब्बू को 5981 वोट मिले थे।