पंजाब विधानसभा चुनाव: प्रदेश के राजनीतिक अखाड़े में उतरे कई पुलिसकर्मी, पूर्व आईजी से लेकर पूर्व डीजीपी तक मैदान में
पूर्व आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर आप में शामिल हो चुके हैं और अमृतसर में दांव पेंच लगा रहे हैं। उनहोंने बेअदबी कांड में कैप्टन सरकार की ढीली कारगुजारी के विरोध में इस्तीफा दे दिया था।
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पंजाब विधानसभा चुनाव में इस बार राजनीतिक अखाड़े में कई पुलिस अधिकारी मैदान में हैं और कई अधिकारी टिकट के लिए दौड़ लगा रहे हैं। यानी खाकी के बाद अब खादी पहनकर मौजूदा व रिटायर अधिकारी अपना दमखम दिखाने के लिए तैयार हैं। मैदान तैयार हो चुका है और पुलिस अधिकारी टिकट के लिए टिकट के लिए जोड़ तोड़ की राजनीति कर रहे हैं। पूर्व डीजीपी एसएस विर्क हो या फिर कुंवर विजय प्रताप सिंह खादी पहनकर मैदान में आ चुके हैं।
आप का हिस्सा बने कई अधिकारी
पद्मश्री करतार सिंह आईपीएस हैं और रिटायर होने के बाद आम आदमी पार्टी का हिस्सा बन चुके हैं। ओलंपियन सुरेंद्र सिंह सोढ़ी आईपीएस भी आईजी रिटायर होने के बाद जालंधर कैंट से आप के उम्मीदवार हैं। पूर्व एसपी अर्जुन अवार्ड विजेता सज्जन सिंह चीमा पीपीएस आम आदमी पार्टी की टिकट पर मैदान में उतर चुके हैं। वह सुल्तानपुर लोधी से उम्मीदवार घोषित किए गए हैं। पूर्व एसपी ओलंपियन गुरमेल सिंह, पूर्व एसपी परमजीत सिंह भी आम आदमी पार्टी में शामिल हो चुके हैं। पूर्व डीसीपी जालंधर बलकार सिंह जालंधर करतारपुर से आप के मजबूत दावेदार हैं और उनको आप ने करतारपुर विधानसभा हलके का इंचार्ज लगा रखा है। पूर्व आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर आप में शामिल हो चुके हैं और अमृतसर में दांव पेंच लगा रहे हैं। उनहोंने बेअदबी कांड में कैप्टन सरकार की ढीली कारगुजारी के विरोध में इस्तीफा दे दिया था।
पूर्व एसएसपी राजिंदर सिंह अभी किसी पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं लेकिन सूत्रों के मुताबिक वह करतापुर से कांग्रेस की टिकट के लिए जोड़ तोड़ कर रहे हैं। 2019 में लोकसभा चुनावों में उनको टिकट दी जा रही थी और राजिंदर सिंह ने अपना इस्तीफा तक तैयार कर लिया था लेकिन अंतिम समय में उनकी टिकट कट गई। ऐसा माना जा रहा है कि वह किसी समय भी कांग्रेस का हिस्सा बन सकते हैं।
पूर्व डीजीपी विर्क ने थामा भाजपा का हाथ
पंजाब के पूर्व डीजीपी एसएस विर्क हाल ही में भाजपा में शामिल हो गए हैं और वह भी टिकट के चाहवान है। उनकी पंजाब में खासी पकड़ है और वह विधानसभा चुनाव लड़ भी सकते हैं। पूर्व एसएसपी हरमोहन सिंह इस बार चमकौर साहब से अकाली दल की टिकट मांग रहे थे लेकिन अकाली दल ने यह सीट बसपा को दी है। हरमोहन सिंह ने एसएसपी की कुर्सी अकाली दल की खातिर छोड़ दी थी। पूर्व कैबिनेट मंत्री सतवंत कौर संधू के पुत्र चमकौर साहिब से अकाली दल के हलका इंचार्ज हरमोहन सिंह संधू ने शिरोमणि अकाली दल से इस्तीफा दे दिया है और वह अभी किसी पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं। शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने उनको 20 फरवरी 2019 को शिरोमणि अकाली दल ज्वाइन करवाया था। हरमोहन सिंह संधू को चमकौर साहिब में बड़ी रैली में पार्टी में शामिल कराया गया था।
रिटायर आईजी आरपी मित्तल भी भाजपा के लिए मैदान में हैं। उन्होंने मालवा में अपनी गेम फिट करनी शुरू कर दी है। उनकी आरएसएस में खासी पकड़ है। मित्तल को मालवा में किसी विधानसक्षा हलके से टिकट दी जा सकती है। मित्तल ने पार्टी के लिए दिन रात एक कर रखा है।
पंजाब की कैबिनेट मंत्री रजिया सुल्ताना के पति मोहम्मद मुस्तफा डीजीपी पद से रिटायर हो चुके हैं और पीपीसीसी प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार बन गए हैं। वह भी विधानसभा चुनाव में मैदान में उतर सकते हैं।
परगट सिंह नौकरी छोड़कर बने थे विधायक
2012 के चुनावों में परगट सिंह पीपीएस अधिकारी थे और वह डायरेक्टर स्पोर्टस थे। सुखबीर बादल ने उनको पार्टी में शामिल कर जालंधर कैंट से उतारा था और परगट सिंह जीत गए थे। परगट सिंह अभी कांग्रेस में हैं। इजहार आलम डीजीपी रिटायर हुए थे और उन्होंने भी नौकरी के बाद अकाली दल का दामन थाम लिया था। वह बादल परिवार के काफी निकट माने जाते हैं।