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जालंधर लीगल अथारिटी को मिला उत्तर जोन में प्रथम स्थान
अमर उजाला, जालंधर
Updated Tue, 29 Oct 2013 11:10 PM IST
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राष्ट्रीय लीगल सर्विस की तरफ से लोक अदालतों तथा मुफ्त कानूनी सहायता संबंधी सेवाएं देने के लिए उत्तरी जोन के प्रदेशों में जालंधर को प्रथम चयनित किया गया है। यह उपलब्धि भारत के प्रमुख न्यायाधीश की तरफ से दी गई है।
तेजबीर सिंह ने बताया कि 26 अक्टूबर को दिल्ली में चीफ जस्टिस आफ इंडिया की प्रधानगी में राष्ट्रीय लीगल सर्विस अथारिटी दिल्ली में उत्तरी जोन के मुकाबले करवाए गए थे। इनमें पंजाब को बढ़िया लीगल अथारिटी होने का सम्मान मिला है। चीफ जस्टिस आफ इंडिया पी सथासिवम ने यह ट्राफी जालंधर के लीगल अथारिटी के चेयरमैन जेएस कुलार और तेजबीर सिंह को सौंपी थी।
उन्होंने बताया कि जिले में 23 नवंबर को एक मेगा अदालत लगाई जा रही है। इस अदालत में करीब 15 हजार केसों को हल किया जाएगा। इस अदालत में गंभीर फौजदारी के केस नहीं रखे जाते हैं। इसके अतिरिक्त इस अदालत में कचहरी, बीमा कंपनी, रजिस्ट्रार कोआपरेटिव से संबंधित केस हल होते हैं।
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तेजबीर सिंह ने बताया कि जिला कानूनी सेवाएं अथारिटी की तरफ से अज्ञात दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिवार को एक लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है। जो इन दुर्घटनाओं में 40 प्रतिशत से अधिक अपाहिज हो जाते हैं, उन्हें 40000 रुपये का क्लेम तथा अज्ञात जबर जनाह के केसों में पीड़ित महिला को 30000 रुपये का मुआवजा दिया जाता है। यह क्लेम गठित की गई कमेटी के फैसले के बाद ही किया जाता है।
उन्होंने बताया कि मुफ्त कानूनी केसों के लिए 25 वरिष्ठ वकीलों का एक पैनल गठित किया गया है, जो गरीब लोगों के केसों की पैरवी करते हैं।
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तेजबीर सिंह ने बताया कि 26 अक्टूबर को दिल्ली में चीफ जस्टिस आफ इंडिया की प्रधानगी में राष्ट्रीय लीगल सर्विस अथारिटी दिल्ली में उत्तरी जोन के मुकाबले करवाए गए थे। इनमें पंजाब को बढ़िया लीगल अथारिटी होने का सम्मान मिला है। चीफ जस्टिस आफ इंडिया पी सथासिवम ने यह ट्राफी जालंधर के लीगल अथारिटी के चेयरमैन जेएस कुलार और तेजबीर सिंह को सौंपी थी।
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उन्होंने बताया कि जिले में 23 नवंबर को एक मेगा अदालत लगाई जा रही है। इस अदालत में करीब 15 हजार केसों को हल किया जाएगा। इस अदालत में गंभीर फौजदारी के केस नहीं रखे जाते हैं। इसके अतिरिक्त इस अदालत में कचहरी, बीमा कंपनी, रजिस्ट्रार कोआपरेटिव से संबंधित केस हल होते हैं।
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तेजबीर सिंह ने बताया कि जिला कानूनी सेवाएं अथारिटी की तरफ से अज्ञात दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिवार को एक लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है। जो इन दुर्घटनाओं में 40 प्रतिशत से अधिक अपाहिज हो जाते हैं, उन्हें 40000 रुपये का क्लेम तथा अज्ञात जबर जनाह के केसों में पीड़ित महिला को 30000 रुपये का मुआवजा दिया जाता है। यह क्लेम गठित की गई कमेटी के फैसले के बाद ही किया जाता है।
उन्होंने बताया कि मुफ्त कानूनी केसों के लिए 25 वरिष्ठ वकीलों का एक पैनल गठित किया गया है, जो गरीब लोगों के केसों की पैरवी करते हैं।