पंजाब के किसान संगठनों की चेतावनी, 21 नवंबर तक मालगाड़ी नहीं चली तो जाम करेंगे ट्रैक
रेलवे बोर्ड द्वारा पंजाब में यात्री गाड़ियों के साथ ही मालगाड़ियों को चलाने की बात पर विवाद बढ़ने लगा है। फिरोजपुर में किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी का कहना है कि यदि रेल प्रशासन मालगाड़ी नहीं चलाएगा तो 21 नवंबर के बाद किसान संगठन फिर से रेल ट्रैक पर धरने पर बैठ जाएंगे। कमेटी महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब की कमजोरी को हथियार बना रही है।
पंजाब में मालगाड़ियां चलाने के लिए किसान रेलवे ट्रैक खाली करने की बात कह रहे हैं, जबकि केंद्र मालगाड़ियों के साथ यात्री गाड़ियां भी चलाने की जिद पर अड़ा है। अगर रवैये में बदलाव नहीं आया तो दीपावली के सीजन में पंजाब के व्यापारियों के साथ आम जनता को भी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
पंधेर का कहना है कि पंजाब के व्यापारी और आम जनता देख ले, किसानों ने पंजाब के हितों को देखते हुए रेल ट्रैक खाली किया था ताकि मालगाड़ियां चल सकें और जरूरत का सामान पंजाब में आ सके लेकिन केंद्र पंजाब को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा है।
कमेटी महासचिव ने कहा कि केंद्र सरकार पहले कह रही थी कि किसान संगठन रेल ट्रैकों पर बैठे हैं, इसलिए मालगाड़ियों का संचालन नहीं किया जा सकता। अब तो किसान सभी रेल ट्रैक से उठ गए हैं, बावजूद इसके मालगाड़ियां नहीं चलाई जा रही हैं।
एक सवाल के जवाब में पंधेर ने कहा कि अपनी बात रखने के लिए आंदोलन करना गलत नहीं है। केंद्र सरकार उनके आंदोलन को कमजोर करना चाहती है। इसलिए पैसेंजर ट्रेनें चलाने की जिद में मालगाड़ियां भी नहीं चला रही है।
किसान तो पंजाब के हितों के लिए रेल ट्रैक से धरने से उठे थे। किसान नेता सुरिंदर सिंह ने कहा कि उनका रेल रोको आंदोलन 46वें दिन में पहुंच चुका है। केंद्र सरकार और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन कह रहे हैं कि रेल ट्रैक पर किसान धरने पर बैठे हैं, जबकि 32 जगहों से किसानों ने रेलवे प्लेटफार्म और रेल ट्रैक खाली कर दिए हैं। अभी तक रेलवे ने कोई मालगाड़ी नहीं चलाई है। सिंह ने कहा कि 14 नवंबर को किसान काली दिवाली मनाएंगे और पंजाब में शहरों व गांवों में काले झंडे लगाकर रोष व्यक्त करेंगे।
दूसरे राज्यों की दूध, पानी व बिजली आपूर्ति करेंगे बाधित : किसान संगठन
रेलवे की तरफ से बयान आने के बाद किसान संगठनों ने नई रणनीति का रविवार को एलान किया। संगठनों ने कहा कि केंद्र सरकार व रेल मंत्रालय ने अगर 18 नवंबर तक मालगाड़ियां नहीं चलाईं तो किसान अन्य राज्यों की दूध-पानी और बिजली आपूर्ति बाधित कर देंगे। बता दें कि रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद यादव ने शनिवार को दिल्ली में हुई वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि रेलवे को यह न बताया जाए कि कौन से ट्रैक पर कौन सी ट्रेन चलानी है।
उन्होंने मालगाड़ियों के साथ त्योहारों के मद्देनजर यात्री ट्रेनें भी चलाने की बात कही थी। इसके लिए रेलवे ने किसानों और पंजाब सरकार से ट्रैक की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। पंजाब में मालगाड़ियां न चलने से किसानों को दूसरे राज्यों से आने वाले यूरिया व कीटनाशक को लेकर परेशानी झेलनी पड़ रही है।
किसानों ने यूरिया व कीटनाशक के बिना ही गेहूं की बिजाई का एलान किया है। भारतीय किसान यूनियन कादियां के प्रधान जगसीर सिंह छीनीवाल, भारतीय किसान यूनियन फूल के नेता सुरजीत सिंह, क्रांतिकारी किसान यूनियन के नेता गुरतेज सिंह सहित अन्य किसान संगठनों के नेताओं ने कहा कि अगर केंद्र सरकार व रेल मंत्रालय 18 नवंबर तक मालगाड़ियां नहीं चलाता है तो किसान बड़े और लंबे संघर्ष को तैयार हैं।
किसानों को मालगाड़ी चलने व न चलने से कोई फर्क नहीं लेकिन व्यापारी वर्ग को नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसान बिना यूरिया व कीटनाशक ही गेहूं की बिजाई कर अपनी आने वाली पीढ़ी को जहर से बचाएंगे। किसान यूनियन कादियां के प्रधान जगसीर सिंह छीनीवाल ने बताया कि रेलवे ने 13 नवंबर तक मालगाड़ियों के संचालन की बात कही है।
अगर मालगाड़ियां नहीं चलाईं तो वह अन्य सभी किसान संगठन बैठक कर 18 नवंबर के बाद पंजाब से होने वाली पानी, बिजली व दूध की सप्लाई अन्य राज्यों को नहीं होने देंगे। इसके अलावा पंजाब के किसान देश के 565 किसान संगठनों के साथ 26 व 27 नवंबर को दिल्ली की ओर कूच कर कृषि कानून रद्द करने के लिए केंद्र सरकार को मजबूर करेंगे। आरपीएफ चौकी बरनाला की प्रभारी सब इंस्पेक्टर बबीता कुमारी ने कहा कि रेलवे के आदेश के मुताबिक मालगाड़ी चलाने में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पुख्ता प्रबंध किए जाएंगे।