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Jalandhar News: जसवंत सिंह की याद में कनाडा में आज मनाया जाएगा खालड़ा डे
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-मानवाधिकारों के लिए जान गंवाने वाले जसवंत सिंह खालड़ा की 30वीं बरसी पर होगा कार्यक्रम
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अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। मानवाधिकारों के लिए अपनी आवाज बुलंद करने वाले जसवंत सिंह खालड़ा की याद में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत की सरकार ने 6 सितंबर को आधिकारिक तौर पर जसवंत सिंह खालड़ा डे घोषित किया है। यह घोषणा उनकी गुमशुदगी की 30वीं बरसी पर की गई।
हाल ही में अमेरिका में सेंट्रल यूनिफाइड ने नए प्राथमिक विद्यालय का नाम पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसंवत खालड़ा के नाम पर रखने की मंजूरी दी थी। ब्रिटिश कोलंबिया की सरकार ने अपने पत्र में कहा है कि जसवंत सिंह खालड़ा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित मानवाधिकार रक्षक थे और उनकी स्मृति को सदा जीवित रखना ब्रिटिश कोलंबिया के लोगों के लिए गर्व की बात है। प्रांत की लेफ्टिनेंट गवर्नर वेन्डी कोकिया ने इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर 6 सितंबर को जसवंत सिंह खालड़ा डे घोषित किया।
1984 के इंदिरा गांधी हत्याकांड के बाद पंजाब में खालिस्तान मूवमेंट को लोगों का सपोर्ट मिल रहा था। पंजाब पुलिस इसे कुचलने के लिए गिरफ्तारियां करने लगी। पुलिस को जिस पर भी शक होता उसे गिरफ्तार कर लिया जाता। साल 1992 में प्यारा सिंह नाम के आदमी को पुलिस ने अरेस्ट किया जोकि अमृतसर के सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक में बतौर डायरेक्टर काम करते थे। वह अपने किसी रिश्तेदार के पास उत्तर प्रदेश गए हुए थे। पुलिस ने यूपी जाकर उन्हें अरेस्ट किया था। परिवार वाले और उन्हें जानने वाले लोग उनकी तलाश करने लगे। पुलिस के पास कोई जवाब नहीं था। फिर बैंक में उनके साथी कर्मचारी और डायरेक्टर रहे जसवंत सिंह खालड़ा को पता चलता है कि प्यारा को पुलिस एनकाउंटर में मार दिया गया है। इतना ही नहीं अमृतसर के दुर्ग्याणा मंदिर श्मशानघाट में बिना किसी को बताए उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया गया।
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जसवंत ने शुरुआती रजिस्टरों की जांच में पाया कि साल 1992 में दुर्ग्याणा मंदिर श्मशानघाट में 300 से ज्यादा बेनाम लाशों का अंतिम संस्कार किया गया। जनवरी का महीना खत्म होने तक उनके पास तीन श्मशानघाट के रिकॉर्ड आ चुके थे। अब उन्हें पब्लिक करने का वक्त था। जसवंत सिंह खालड़ा का 6 सितंबर 1995 को उस समय अपहरण कर लिया गया और झाबल पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जब वह अपने घर के सामने अपनी कार धो रहे थे। उसके बाद उनका अता पता नहीं चला। खालड़ा के संघर्ष पर हाल ही में बनी फिल्म पंजाब-95 काे भारत में रिलीज करने की अनुमति नहीं मिल पाई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। मानवाधिकारों के लिए अपनी आवाज बुलंद करने वाले जसवंत सिंह खालड़ा की याद में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत की सरकार ने 6 सितंबर को आधिकारिक तौर पर जसवंत सिंह खालड़ा डे घोषित किया है। यह घोषणा उनकी गुमशुदगी की 30वीं बरसी पर की गई।
हाल ही में अमेरिका में सेंट्रल यूनिफाइड ने नए प्राथमिक विद्यालय का नाम पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसंवत खालड़ा के नाम पर रखने की मंजूरी दी थी। ब्रिटिश कोलंबिया की सरकार ने अपने पत्र में कहा है कि जसवंत सिंह खालड़ा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित मानवाधिकार रक्षक थे और उनकी स्मृति को सदा जीवित रखना ब्रिटिश कोलंबिया के लोगों के लिए गर्व की बात है। प्रांत की लेफ्टिनेंट गवर्नर वेन्डी कोकिया ने इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर 6 सितंबर को जसवंत सिंह खालड़ा डे घोषित किया।
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1984 के इंदिरा गांधी हत्याकांड के बाद पंजाब में खालिस्तान मूवमेंट को लोगों का सपोर्ट मिल रहा था। पंजाब पुलिस इसे कुचलने के लिए गिरफ्तारियां करने लगी। पुलिस को जिस पर भी शक होता उसे गिरफ्तार कर लिया जाता। साल 1992 में प्यारा सिंह नाम के आदमी को पुलिस ने अरेस्ट किया जोकि अमृतसर के सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक में बतौर डायरेक्टर काम करते थे। वह अपने किसी रिश्तेदार के पास उत्तर प्रदेश गए हुए थे। पुलिस ने यूपी जाकर उन्हें अरेस्ट किया था। परिवार वाले और उन्हें जानने वाले लोग उनकी तलाश करने लगे। पुलिस के पास कोई जवाब नहीं था। फिर बैंक में उनके साथी कर्मचारी और डायरेक्टर रहे जसवंत सिंह खालड़ा को पता चलता है कि प्यारा को पुलिस एनकाउंटर में मार दिया गया है। इतना ही नहीं अमृतसर के दुर्ग्याणा मंदिर श्मशानघाट में बिना किसी को बताए उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया गया।
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जसवंत ने शुरुआती रजिस्टरों की जांच में पाया कि साल 1992 में दुर्ग्याणा मंदिर श्मशानघाट में 300 से ज्यादा बेनाम लाशों का अंतिम संस्कार किया गया। जनवरी का महीना खत्म होने तक उनके पास तीन श्मशानघाट के रिकॉर्ड आ चुके थे। अब उन्हें पब्लिक करने का वक्त था। जसवंत सिंह खालड़ा का 6 सितंबर 1995 को उस समय अपहरण कर लिया गया और झाबल पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जब वह अपने घर के सामने अपनी कार धो रहे थे। उसके बाद उनका अता पता नहीं चला। खालड़ा के संघर्ष पर हाल ही में बनी फिल्म पंजाब-95 काे भारत में रिलीज करने की अनुमति नहीं मिल पाई है।