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Jalandhar: पटेल अस्पताल पर साढ़े सात लाख जुर्माना, मरीज को प्रतिबंधित दवा देकर किडनी को पहुंचाया था नुकसान
Tue, 18 Nov 2025 09:32 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 18 Nov 2025 09:32 AM IST
सार
शिकायतकर्ता नितिका कौशल पत्नी गौरव, लदौड़ी नूरपुर की तरफ से दर्ज की गई शिकायत में कहा गया कि जुलाई 2022 में पेट दर्द शुरू होने पर उसने पटेल अस्पताल में उपचार करवाना शुरू किया। अस्पताल ने उसे पेट और गुर्दे की पथरी बताकर ऑपरेशन किया।
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पटेल अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर भारत के विख्यात पटेल अस्पताल पर उपभोक्ता फोरम ने साढ़े सात लाख जुर्माना लगाया है। अस्पताल की चिकित्सकीय लापरवाही के कारण नितिका कौशल को गंभीर नुकसान हुआ, जिसके चलते जिला उपभोक्ता फोरम ने अस्पताल को 7,50,000 रुपये मुआवजे के रूप में देने का आदेश सुनाया है। अदालत ने साथ ही शिकायतकर्ता को 20 हजार रुपये न्यायालय शुल्क भी भुगतान करने का निर्देश दिया है।
शिकायतकर्ता नितिका कौशल पत्नी गौरव, लदौड़ी नूरपुर की तरफ से दर्ज की गई शिकायत में कहा गया कि जुलाई 2022 में पेट दर्द शुरू होने पर उसने पटेल अस्पताल में उपचार करवाना शुरू किया। अस्पताल ने उसे पेट और गुर्दे की पथरी बताकर ऑपरेशन किया। हालांकि करीब डेढ़ महीने तक भर्ती रहने के बावजूद नितिका की सेहत बिगड़ती गई। उसका क्रिएटिनिन स्तर बढ़ गया और उसे लगातार डायलिसिस करवाना पड़ा। उसकी किडनी को नुकसान हो गया।
शिकायतकर्ता के वकील ने बताया कि अस्पताल के चिकित्सकों ने उसे दर्द के समय प्रतिबंधित दवाएं दीं, जिससे उसका स्वास्थ्य और खराब हुआ। यह दवाईयां दी नहीं जा सकती थी। उपभोक्ता फोरम ने चिकित्सा विशेषज्ञ की राय लेने के बाद यह पाया कि मरीज की स्थिति में सुधार न होने का मुख्य कारण चिकित्सकीय लापरवाही और प्रतिबंधित दवाइयां थीं। इस आधार पर फोरम ने अस्पताल को मुआवजा देने का आदेश दिया है।
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शिकायतकर्ता नितिका कौशल पत्नी गौरव, लदौड़ी नूरपुर की तरफ से दर्ज की गई शिकायत में कहा गया कि जुलाई 2022 में पेट दर्द शुरू होने पर उसने पटेल अस्पताल में उपचार करवाना शुरू किया। अस्पताल ने उसे पेट और गुर्दे की पथरी बताकर ऑपरेशन किया। हालांकि करीब डेढ़ महीने तक भर्ती रहने के बावजूद नितिका की सेहत बिगड़ती गई। उसका क्रिएटिनिन स्तर बढ़ गया और उसे लगातार डायलिसिस करवाना पड़ा। उसकी किडनी को नुकसान हो गया।
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शिकायतकर्ता के वकील ने बताया कि अस्पताल के चिकित्सकों ने उसे दर्द के समय प्रतिबंधित दवाएं दीं, जिससे उसका स्वास्थ्य और खराब हुआ। यह दवाईयां दी नहीं जा सकती थी। उपभोक्ता फोरम ने चिकित्सा विशेषज्ञ की राय लेने के बाद यह पाया कि मरीज की स्थिति में सुधार न होने का मुख्य कारण चिकित्सकीय लापरवाही और प्रतिबंधित दवाइयां थीं। इस आधार पर फोरम ने अस्पताल को मुआवजा देने का आदेश दिया है।
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