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जालंधर में सजा सुरों का महाकुंभ: 150वां बाबा हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन शुरू, मालिनी अवस्थी ने दी प्रस्तुति
Sat, 27 Dec 2025 09:06 AM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 27 Dec 2025 09:06 AM IST
सार
पद्मश्री लोक व शास्त्रीय गायिका मालिनी अवस्थी ने अपनी सशक्त, भावनात्मक और आत्मा को छू लेने वाली प्रस्तुति से नई ऊंचाई दी। लोक गायकी और अर्धशास्त्रीय रागों की मनमोहक जुगलबंदी के जरिए उन्होंने श्रोताओं को मिट्टी की खुशबू और भारतीय लोक संस्कृति की गहराई से जोड़ा।
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मालिनी अवस्थी
- फोटो : अमर उजाला/फाइल
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विस्तार
जालंधर के श्री देवी तालाब मंदिर परिसर में 150वें ऐतिहासिक बाबा हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन का शनिवार को भव्य शुभारंभ हुआ। पद्मश्री लोक व शास्त्रीय गायिका मालिनी अवस्थी ने अपनी सशक्त, भावनात्मक और आत्मा को छू लेने वाली प्रस्तुति से नई ऊंचाई दी। लोक गायकी और अर्धशास्त्रीय रागों की मनमोहक जुगलबंदी के जरिए उन्होंने श्रोताओं को मिट्टी की खुशबू और भारतीय लोक संस्कृति की गहराई से जोड़ा।
यह मंच मालिनी अवस्थी के लिए खास तौर पर भावनात्मक रहा। उन्होंने कहा कि इसी पावन मंच पर उनकी गुरु, पद्मभूषण विदुषी गिरिजा देवी ने ऐतिहासिक प्रस्तुतियां दी थीं। मालिनी की गायकी को सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि परंपरा, युवा पीढ़ी और दोआबा की सांस्कृतिक धड़कन को जोड़ने वाला एक जीवंत सेतु माना गया। हर बंदिश और लोकगीत में विरासत की गूंज साफ झलकती रही।
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उन्होंने इस मंच को भारतीय कला, संस्कृति और साहित्य का अद्भुत संगम बताया, जहां देश की सांस्कृतिक आत्मा सजीव रूप लेती है।
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यह मंच मालिनी अवस्थी के लिए खास तौर पर भावनात्मक रहा। उन्होंने कहा कि इसी पावन मंच पर उनकी गुरु, पद्मभूषण विदुषी गिरिजा देवी ने ऐतिहासिक प्रस्तुतियां दी थीं। मालिनी की गायकी को सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि परंपरा, युवा पीढ़ी और दोआबा की सांस्कृतिक धड़कन को जोड़ने वाला एक जीवंत सेतु माना गया। हर बंदिश और लोकगीत में विरासत की गूंज साफ झलकती रही।
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जिसने यहां गाया, उसने कुंभ स्नान किया
सम्मेलन में विशेष रूप से पहुंचे भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने बाबा हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन को “संगीत का महाकुंभ” बताया। उन्होंने कहा, “जिस महान कलाकार ने इस मंच पर प्रस्तुति नहीं दी, समझिए उसने कुंभ स्नान नहीं किया। अगर संगीत का कोई महाकुंभ है, तो वह बाबा हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन ही है।”
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उन्होंने इस मंच को भारतीय कला, संस्कृति और साहित्य का अद्भुत संगम बताया, जहां देश की सांस्कृतिक आत्मा सजीव रूप लेती है।