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उद्यमियों को बजट के बाद लगा बिजली का झटका
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
Updated Fri, 11 Jul 2014 10:32 PM IST
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पंजाब की इंडस्ट्री को उतना बड़ा झटका केंद्रीय बजट से नहीं लगा होगा, जितना बड़ा पंजाब स्टेट पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड ने दिया है। चार माह पहले पावर रेगुलेटरी कमीशन ने उद्यमियों के साथ जालंधर के रेस्ट हाउस में बैैठक की थी, जिसमें यह दावा किया गया था कि पंजाब में अब बिजली सरप्लस है और उद्यमी अधिक से अधिक बिजली फूंके।
जिनके बिल एक लाख रुपये से अधिक आएंगे, उनको 10 फीसदी छूट दी जाएगी। इंडस्ट्री की खुशी स्वाभाविक था, किसी ने नई मशीनरी खरीद ली तो किसी ने धड़ाधड़ आर्डर बुक कर लिए लेकिन इंडस्ट्री को शुक्रवार को झोर का झटका लगा है। सरकार ने रात साढ़े सात बजे से अगले दिन सुबह साढ़े सात बजे तक पीक आवर शुरू कर दिए गए हैं। जिससे इंडस्ट्री को अरबों का चूना लगने जा रहा है।
फोकल प्वाइंट एक्सटेंशन के प्रधान नरिंदर सग्गू का कहना है कि अब पीक आवर में यह कहा गया है कि जिनके पास बिजली कनेक्शन 100 किलोवाट से अधिक हैं, वह रात साढ़े सात बजे से अगले दिन साढ़े सात बजे तक इंडस्ट्री बंद रखेंगे। पीक आवर तो होता ही तीन घंटे का है। सरकार किस मुंह से पावर कट की बात कह सकती है, जिसने खुद बिजली सरप्लस का दावा कर बिजली बिल में 10 फीसदी छूट का दावा किया हो। अब चतुराई से पावर कट को पीक आवर का नाम दे दिया गया है। सग्गू का कहना है कि जालंधर में 400 से अधिक इंडस्ट्री को झटका लगा है। इंडस्ट्री ने रेगुलेटरी कमीशन के झांसे में आकर कई स्थानों से आर्डर ले लिए हैं, दिन रात फैक्टरी चलाने की योजना बनाई थी लेकिन सब अटक गया।
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वहीं हैंडटूल निर्यातक गुरशरण सिंह का कहना है कि यह तो अच्छे दिन नहीं हैं। फर्नेस इंडस्ट्री को तो बिजली हमेशा चाहिए, एक बार फर्नेंस या इंडक्शन भट्ठियां चलती हैं तो उनको बीच में रोकने से भारी नुकसान होता है। दूसरा श्रमिकों का खर्चा भी फालतू में पड़ता जाएगा। इससे तो उलटा नुकसान हो रहा है। सरकार ने उद्यमियों को बिजली सरप्लस का वादा करके अंधेरे में रखा और नुकसान करवा दिया।
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जिनके बिल एक लाख रुपये से अधिक आएंगे, उनको 10 फीसदी छूट दी जाएगी। इंडस्ट्री की खुशी स्वाभाविक था, किसी ने नई मशीनरी खरीद ली तो किसी ने धड़ाधड़ आर्डर बुक कर लिए लेकिन इंडस्ट्री को शुक्रवार को झोर का झटका लगा है। सरकार ने रात साढ़े सात बजे से अगले दिन सुबह साढ़े सात बजे तक पीक आवर शुरू कर दिए गए हैं। जिससे इंडस्ट्री को अरबों का चूना लगने जा रहा है।
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फोकल प्वाइंट एक्सटेंशन के प्रधान नरिंदर सग्गू का कहना है कि अब पीक आवर में यह कहा गया है कि जिनके पास बिजली कनेक्शन 100 किलोवाट से अधिक हैं, वह रात साढ़े सात बजे से अगले दिन साढ़े सात बजे तक इंडस्ट्री बंद रखेंगे। पीक आवर तो होता ही तीन घंटे का है। सरकार किस मुंह से पावर कट की बात कह सकती है, जिसने खुद बिजली सरप्लस का दावा कर बिजली बिल में 10 फीसदी छूट का दावा किया हो। अब चतुराई से पावर कट को पीक आवर का नाम दे दिया गया है। सग्गू का कहना है कि जालंधर में 400 से अधिक इंडस्ट्री को झटका लगा है। इंडस्ट्री ने रेगुलेटरी कमीशन के झांसे में आकर कई स्थानों से आर्डर ले लिए हैं, दिन रात फैक्टरी चलाने की योजना बनाई थी लेकिन सब अटक गया।
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वहीं हैंडटूल निर्यातक गुरशरण सिंह का कहना है कि यह तो अच्छे दिन नहीं हैं। फर्नेस इंडस्ट्री को तो बिजली हमेशा चाहिए, एक बार फर्नेंस या इंडक्शन भट्ठियां चलती हैं तो उनको बीच में रोकने से भारी नुकसान होता है। दूसरा श्रमिकों का खर्चा भी फालतू में पड़ता जाएगा। इससे तो उलटा नुकसान हो रहा है। सरकार ने उद्यमियों को बिजली सरप्लस का वादा करके अंधेरे में रखा और नुकसान करवा दिया।