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लॉकडाउन में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र ने बना दी ड्रैकुला बाइक,
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ड्रैकुला बाइक बनाने वाले सेंट सोल्जर ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन के छात्र दविंदर सिंह व अन्य
- फोटो : JALANDHAR
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लॉकडाउन के दौरान जब लोगों घरों में रहने को मजबूर थे तब जालंधर के सेंट सोल्जर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के छात्र दविंदर सिंह ड्रैकुला बाइक बनाने में व्यस्त थे। दविंदर मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र हैं। इस बाइक को उन्होंने मात्र 35 दिनों में बनाया। बाइक में उन्होंने मारुती 800 सीसी का इंजन लगाया है। वहीं रेडियेटर व कूलिंग फैन टाटा ऐस का लगाया। उन्होंने इस बाइक में ब्रेक्स, क्लिपर, चैसिस, फ्रंट शॉकर, हैंडल और सीट बजाज पल्सर 220 की लगाई। बाइक में हेडलाइट यामाहा एफजेड की तो रिम, चैनसेट और स्पीडोमीटर बुलेट के लगाए। बाइक बनाने में कुल 2 लाख की लागत आई है। इस बाइक की स्पीड 200 किलोमीटर प्रति घंटा है।
उनकी इस मेहनत को देखते हुए कालेज की तरफ उन्हें दस हजार की स्कॉलरशिप दी गई। बता दें कि दविंदर के पिता का देहांत बचपन में ही हो गया। उनकी माता आंगनबाड़ी वर्कर है। बाइक बनाने में उनका साथ उनके चचेरे भाई हरसिमरत सिंह ने दिया। दविंदर के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह बाइक में लगने वाले सामान को खरीद सके। उनके चचेरे भाई ने अपने पिता से पैसे लेकर बाइक में लगने वाले सामान को खरीदा। हरसिमरत के पिता इंग्लैंड में रहते हैं।
लॉकडाउन में छूट मिलते ही सामान खरीद लाते थे
दविंदर ने बताया कि लॉकडाउन में शनिवार और रविवार को छूट मिलती थी। इस दौरान वे सामान की खरीदारी कर लेते थे। उन्होंने बताया की उन्हें बचपन से ही बाइक और गाड़ियों का शौक था। वे अपनी बाइक कि रिपेयरिंग खुद करते थे। जब भी उन्हें समय मिलता वे इस बात कि जानकारी इकट्ठा करने में लग जाते की गाड़ी कैसे काम करती है।
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उनकी इस मेहनत को देखते हुए कालेज की तरफ उन्हें दस हजार की स्कॉलरशिप दी गई। बता दें कि दविंदर के पिता का देहांत बचपन में ही हो गया। उनकी माता आंगनबाड़ी वर्कर है। बाइक बनाने में उनका साथ उनके चचेरे भाई हरसिमरत सिंह ने दिया। दविंदर के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह बाइक में लगने वाले सामान को खरीद सके। उनके चचेरे भाई ने अपने पिता से पैसे लेकर बाइक में लगने वाले सामान को खरीदा। हरसिमरत के पिता इंग्लैंड में रहते हैं।
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लॉकडाउन में छूट मिलते ही सामान खरीद लाते थे
दविंदर ने बताया कि लॉकडाउन में शनिवार और रविवार को छूट मिलती थी। इस दौरान वे सामान की खरीदारी कर लेते थे। उन्होंने बताया की उन्हें बचपन से ही बाइक और गाड़ियों का शौक था। वे अपनी बाइक कि रिपेयरिंग खुद करते थे। जब भी उन्हें समय मिलता वे इस बात कि जानकारी इकट्ठा करने में लग जाते की गाड़ी कैसे काम करती है।
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