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डेपुटेशन पर मौज कर रहे सरकारी टीचर, बच्चों की पढ़ाई हो रही खराब
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शिक्षा विभाग के सचिव कृष्ण कुमार की रेशनाइलेजशन का विरोध सरकारी शिक्षक इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि इससे उनकी डेपुटेशन पर मनमर्जी वाली मौज बंद हो जाएगी। बेशक, इसमें उनके मूल स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई खराब हो जाए, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसी ही डेपुटेशन की मौज जिला कपूरथला के सरकारी एलीमेंट्री के शिक्षक ले रहे हैँ। सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो यह है कि डीईओ एलीमेंट्री व बीपीईओ की नाक के नीचे सारा खेल चल रहा है। जबकि इनके मूल में अनुपात के हिसाब से शिक्षक न होने के बावजूद यह शिक्षक नहीं लौट रहे हैं। और बच्चे बिना अध्यापक के स्कूल में खेल-कूद कर लौट जाते हैं। इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है। हैरत की बात तो यह है कि करीब दो साल से शिक्षक मौज कर रहे है, जिनकी डीईओ को भनक तक नहीं है।
जिला कपूरथला के गांव सिधवां दोनां में तैनात शिक्षक करीब डेढ़ साल से डेपुटेशन पर तैनात हैं। जबकि उनका मूल स्कूल वरियाह दोनां है। उनके बीते 13 सितंबर को डेपुटेशन रद भी हो गई, लेकिन अभी तक वह अपने मूल स्कूल नहीं लौटे हैं। जहां पर 53 बच्चों को केवल एक शिक्षक पढ़ा रहा है। गांव कौलपुर, मल्लूकादराबाद, गांव काहलवां की शिक्षक इतने ही अर्से से अपने स्कूल छोड़कर अपने घर के समीप वाले सरकारी स्कूल में डेपुटेशन पर चल रही है। इनमें से मनुजा इरशाद की डेपुटेशन तो रद हो गई है। गांव संधू चट्ठा, केसरपुर में कांट्रेक्टर शिक्षा प्रोवाइडर बच्चों को पढ़ा रहे हैं, जहां पर कोई स्थायी टीचर तैनात ही नहीं है। इन स्कूलों में बच्चों की संख्या 30 से लेकर 55 तक है, कई स्कूलों में शिक्षक है ही नहीं, तो कई जगह महज एक ही है।
डेपुुटेशन वाले शिक्षक मनमर्जी की ट्रांसफर न मिलने पर जैक लगाकर डेपुटेशन का खेल खेलते है। कुछ तो साम, दाम, दंड, भेद की रणनीति अपनाकर उल्लू सीधा करते हैं। इनमें कुछ शिक्षक यूनियनों के पदाधिकारी है तो कुछ बड़े अफसरों के रिश्तेदारी के रसूख का फायदा उठा रहे हैं। कई तो सियासी गलियारों तक का सहारा ले रहे है। बेशक, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति वाले बच्चों का भविष्य खराब हो जाए, उसका इन्हें कोई मलाल नहीं हैं। ऐसा करने वाले जिले में काफी शिक्षक हैं। डीईओ एलीमेंट्री गुरभजन सिंह लासानी ने कहा कि वह जिले के सभी बीपीईओ से मीटिंग करके ऐसे डेपुटेशन वाले शिक्षकों की लिस्ट मंगवाकर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाएंगे। नियमों को ताक पर रखने वाले शिक्षक की कार्यप्रणाली बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी।
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जिला कपूरथला के गांव सिधवां दोनां में तैनात शिक्षक करीब डेढ़ साल से डेपुटेशन पर तैनात हैं। जबकि उनका मूल स्कूल वरियाह दोनां है। उनके बीते 13 सितंबर को डेपुटेशन रद भी हो गई, लेकिन अभी तक वह अपने मूल स्कूल नहीं लौटे हैं। जहां पर 53 बच्चों को केवल एक शिक्षक पढ़ा रहा है। गांव कौलपुर, मल्लूकादराबाद, गांव काहलवां की शिक्षक इतने ही अर्से से अपने स्कूल छोड़कर अपने घर के समीप वाले सरकारी स्कूल में डेपुटेशन पर चल रही है। इनमें से मनुजा इरशाद की डेपुटेशन तो रद हो गई है। गांव संधू चट्ठा, केसरपुर में कांट्रेक्टर शिक्षा प्रोवाइडर बच्चों को पढ़ा रहे हैं, जहां पर कोई स्थायी टीचर तैनात ही नहीं है। इन स्कूलों में बच्चों की संख्या 30 से लेकर 55 तक है, कई स्कूलों में शिक्षक है ही नहीं, तो कई जगह महज एक ही है।
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डेपुुटेशन वाले शिक्षक मनमर्जी की ट्रांसफर न मिलने पर जैक लगाकर डेपुटेशन का खेल खेलते है। कुछ तो साम, दाम, दंड, भेद की रणनीति अपनाकर उल्लू सीधा करते हैं। इनमें कुछ शिक्षक यूनियनों के पदाधिकारी है तो कुछ बड़े अफसरों के रिश्तेदारी के रसूख का फायदा उठा रहे हैं। कई तो सियासी गलियारों तक का सहारा ले रहे है। बेशक, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति वाले बच्चों का भविष्य खराब हो जाए, उसका इन्हें कोई मलाल नहीं हैं। ऐसा करने वाले जिले में काफी शिक्षक हैं। डीईओ एलीमेंट्री गुरभजन सिंह लासानी ने कहा कि वह जिले के सभी बीपीईओ से मीटिंग करके ऐसे डेपुटेशन वाले शिक्षकों की लिस्ट मंगवाकर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाएंगे। नियमों को ताक पर रखने वाले शिक्षक की कार्यप्रणाली बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी।
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