महात्मा गांधी की पुण्यतिथि: फिल्लौर में प्रवाहित की गई थीं राष्ट्रपिता की अस्थियां, आज भी शांति का संदेश देता है सतलुज का किनारा
30 जनवरी, 1948 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी। उनकी आखिरी इच्छा के अनुसार उनकी अस्थियां देश की प्रमुख नदियों में प्रवाहित की गई थीं। जहां-जहां अस्थियां प्रवाहित की गईं वहां स्मारक बनाए गए थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
12 फरवरी 1948 को फिल्लौर में सतलुज किनारे जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अस्थियां प्रवाहित करके गांधी धाम का निर्माण किया गया था, वह अपनी पहचान खो रहा है। स्मारक आज भी शांति का संदेश देता है लेकिन जमीनी हकीकत है कि इस स्मारक को अच्छा बनाने के लिए किसी सरकार ने कोई कार्य नहीं किया है। हालांकि इसी हलके से कैबिनेट मंत्री सरवण सिंह फिल्लौर से लेकर जालंधर के सांसद चौधरी संतोख सिंह प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं। हाल ही में पंजाब सरकार ने सांसद चौधरी संतोख के जरिए दो करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार करने को मंजूरी दी है। अभी काम शुरू नहीं हुआ है।
30 जनवरी, 1948 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी। उनकी आखिरी इच्छा के अनुसार उनकी अस्थियां देश की प्रमुख नदियों में प्रवाहित की गई थीं। जहां-जहां अस्थियां प्रवाहित की गईं वहां स्मारक बनाए गए थे। फिल्लौर के नजदीक सतलुज दरिया में बापू की अस्थियां प्रवाहित की गई थीं। वहां स्मारक बनाया गया था लेकिन लोगों ने इसके पास डेयरी फार्म और एक बड़ा छप्पड़ बना दिया है। हालांकि यहां फैली शांति में बहता सतलुज का किनारा मानो आज भी उनकी शिक्षाओं का संदेश देता है।
कुछ साल पहले तक यहां सवरेदय मेला लगता था। इस मेले में केन्द्र और राज्य सरकार के मंत्री तक शिरकत करते रहे हैं। परंतु अब इस मेले का आयोजन नहीं किया जाता। सांसद चौधरी का कहना है कि प्रोजेक्ट को जल्द ही शुरू करवाया जाएगा और इसको एक बेहतरीन यादगार बनाया जाएगा।