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शिक्षा विभाग को नहीं मिल रहे काबिल टीचर

Tue, 11 Feb 2014 10:11 PM IST
अमर उजाला, जालंधर
अमर उजाला, जालंधर Updated Tue, 11 Feb 2014 10:11 PM IST
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education, department, cant find eligible teachers
शिक्षा विभाग को काबिल टीचर नहीं मिल रहे हैं। यह बयान शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका का है। मंगलवार को हंसराज महाविद्यालय के वार्षिक पुरस्कार समारोह में पहुंचे शिक्षा मंत्री ने माना कि बेशक राज्य में बीएड व ईटीटी पास किए गए अध्यापकों की गिनती अधिक है मगर यह अध्यापक पीएसटीईटी (पंजाब राज्य अध्यापक पात्रता परीक्षा) को पास ही नहीं कर पाते।
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उन्होंने कहा कि दिसंबर में लिए गए टेस्ट के नतीजे अच्छे नहीं रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक शिक्षा विभाग ने जो दिसंबर 2013 में दो टेस्ट लिए थे, उसका प्रतिशत काफी कम है। विभाग के मुताबिक राज्य में पीएसटीईटी-1 ईटीटी पास टीचरों और पीएसटीईटी-2 बीएड अध्यापकों के लिए लिया गया था। इसमें पास प्रतिशत चौंकाने वाला रहा है।
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आंकड़ों के मुताबिक पीएसटीईटी-1 में एक लाख 68 हजार 396 उम्मीदवार टेस्ट देने बैठे थे, जिसमें से महज 5141 ही पास हुए हैं। इसका पास प्रतिशत 3.05 रहा है। ऐसे ही पीएसटीईटी-2 में 60 हजार 382 उम्मीदवार परीक्षा में बैठे, जिसमें से 4251 बीएड अध्यापक ही इस टेस्ट को पास कर सके थे। इसका पास प्रतिशत 7.04 रहा। मलूका के मुताबिक इस बार का नतीजा अच्छा न रहने के कारण अब पंजाब सरकार ने जुलाई में दोबारा इस टेस्ट को लेने की योजना बनाई है।
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पत्रकारों के साथ बातचीत में मलूका ने कहा कि राज्य में इस टेस्ट के पास हुए बिना अध्यापकों की नियुक्ति नहीं की जा सकती। सरकार चाहती है कि जिन अध्यापकों ने योग्यता टेस्ट पास किया है, उन्हें नौकरी दे दी जाए। मगर, यह मामला भी अदालत में होने के कारण शिक्षा विभाग भर्ती के मामले में बेबस है। उनके मुताबिक इस समय राज्य में करीब 15 हजार अध्यापकों ने टेस्ट पास किया हुआ है, जिन्हें कोर्ट के आदेश के मुताबिक नौकरी दे दी जाएगी।



एडेड स्कूलों का मामला हल होना मुश्किल : मलूका
शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका कहना है कि एडेड स्कूलों में विषय माहिरों की कमी का मामला हल होना अभी मुश्किल है। सरकार उन स्कूलों में पदों को भरने के बजाय इन स्कूलों के लिए दो योजनाएं तैयार कर चुकी है। समय आते ही उन्हें लागू कर दिया जाएगा।


एक तो एडेड स्कूलों के कर्मचारियों के मुताबिक उन्हें शिक्षा विभाग में शिफ्ट करना है। मगर, इसमें कमेटियों की प्रॉपर्टी रुकावट बन रही है। दूसरा बिना बिल्डिंग ही अध्यापकों को शिक्षा विभाग में शिफ्ट करते हुए कमेटियों को अपने स्तर पर स्कूल चलाने की आज्ञा दे दी जाए।



पुरुष स्टाफ को शिफ्ट करने से मीडिया को परेशानी
शिक्षा मंत्री ने कहा कि लड़कियों के स्कूलों से मेल स्टाफ को शिफ्ट करने से पुरुष अध्यापकों को तो कोई परेशानी नहीं है मगर, मीडिया इसे तूल दे रहा है। उनका कहना है कि सरकार का यह फैसला सराहनीय है। इस योजना के मुताबिक महज 400 अध्यापकों को बदला गया है।



सुपरिंटेंडेंट की बदली कर मामले को शांत करने की कोशिश : मंत्री
पत्रकारों की तरफ से पूछे गए सवाल पर मलूका ने सीईओ जालंधर हुकम सिंह और सुपरिंटेंडेंट दविंदर पाल कौर के मामले को सुलझाने का दावा किया है। उन्होंने साफ किया कि कर्मचारी प्रदर्शन कर उन पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसे कभी सहन नहीं किया जाएगा। मामले की जांच चल रही है। जांच से पहले सुपरिंटेंडेंट की गई बदली को उन्होंने मामला शांत करने का नाम दिया।




अध्यापक तो काबिल है, सरकार ही नहीं देना चाहती नौकरी

अध्यापक योग्यता परीक्षा पास बेरोजगार यूनियन पंजाब के चेयरमैन अमनदीप सिंह फुल ने कहा कि मंत्री का बयान बेतुका है। राज्य में टीईटी पास बेरोजगार अध्यापक तीन साल से नौकरी के लिए भटक रहे हैं। मगर, सरकार उनकी तरफ ध्यान ही नहीं दे रही है। उन्होंने माना कि अभी इस मामले को लेकर कोर्ट में मामला है, जिसकी तारीख 12 फरवरी है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार सही ढंग से कोर्ट में अपना पक्ष रखे तो मामला शांत हो सकता है।
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