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सुखबीर बादल की 5 जुलाई को अदालत में पेशी
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदकोट
Updated Fri, 06 May 2016 03:15 PM IST
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सुखबीर बादल।
- फोटो : demo
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1999 के लोकसभा चुनाव में पत्रकार से मारपीट करने व कैमरे छीनने की घटना में जेएमआईसी सतीश कुमार की अदालत ने बीती 2 अप्रैल को उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
इस फैसले को शिकायतकर्ता नरेश कुमार सहगल ने जिला व सेशन कोर्ट में चुनौती दे दी है। वीरवार को सेशन जज सतविंदर सिंह चाहल ने नरेश सहगल की अपील सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल को 5 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर अदालत के समक्ष पेश होने के लिए आदेश जारी किए है।
जिला व सेशन कोर्ट में दायर अपील में शिकायतकर्ता नरेश कुमार सहगल ने दावा किया कि निचली अदालत में केस की सुनवाई के दौरान अहम तथ्यों को अनदेखा किया गया है। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष की तरफ से पेश गवाहियों व सुुबूतों पर विचार नहीं किया गया। ऐसे में निचली अदालत का फैसला उसे मान्य नहीं है। इस अपील को स्वीकार करते हुए जिला अदालत ने सुखबीर बादल को निजी रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए हैं।
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गौरतलब है कि बीती 2 अप्रैल को स्थानीय जेएमआईसी सतीश कुमार की अदालत ने उपमुख्यमंत्री को बरी करने का आदेश सुनाया था। यह मामला घटना के करीब सात वर्षों के बाद पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों पर 30 जून 2006 को थाना सिटी कोटकपूरा में दर्ज हुआ था। इस केस पर हाईकोर्ट ने ही लंबे समय पर सुनवाई पर रोक लगा रखी थी और कुछ माह पहले ही हाईकोर्ट ने निचली अदालत को केस की सुनवाई दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए थे।
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इस फैसले को शिकायतकर्ता नरेश कुमार सहगल ने जिला व सेशन कोर्ट में चुनौती दे दी है। वीरवार को सेशन जज सतविंदर सिंह चाहल ने नरेश सहगल की अपील सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल को 5 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर अदालत के समक्ष पेश होने के लिए आदेश जारी किए है।
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जिला व सेशन कोर्ट में दायर अपील में शिकायतकर्ता नरेश कुमार सहगल ने दावा किया कि निचली अदालत में केस की सुनवाई के दौरान अहम तथ्यों को अनदेखा किया गया है। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष की तरफ से पेश गवाहियों व सुुबूतों पर विचार नहीं किया गया। ऐसे में निचली अदालत का फैसला उसे मान्य नहीं है। इस अपील को स्वीकार करते हुए जिला अदालत ने सुखबीर बादल को निजी रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए हैं।
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गौरतलब है कि बीती 2 अप्रैल को स्थानीय जेएमआईसी सतीश कुमार की अदालत ने उपमुख्यमंत्री को बरी करने का आदेश सुनाया था। यह मामला घटना के करीब सात वर्षों के बाद पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों पर 30 जून 2006 को थाना सिटी कोटकपूरा में दर्ज हुआ था। इस केस पर हाईकोर्ट ने ही लंबे समय पर सुनवाई पर रोक लगा रखी थी और कुछ माह पहले ही हाईकोर्ट ने निचली अदालत को केस की सुनवाई दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए थे।