पंजाब विधानसभा चुनाव: भाजपा से लेकर कांग्रेस और आप तक में टिकटों पर दिल्ली से हो रहा फैसला
पंजाब भाजपा का चुनावी कार्यालय जालंधर में खोला गया है, जिसको गजेंद्र शेखावत ने अपना मुख्यालय बना लिया है। हाल ही में अकाली दल के पूर्व विधायक सर्बजीत सिंह मक्कड़ ने भाजपा ज्वाइन की तो स्थानीय नेतृत्व को इसकी भनक तक नहीं लगी।
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पंजाब में विधानसभा चुनाव सिर पर आते ही टिकट के चाहने वालों की दौड़ शुरू हो चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि शिरोमणि अकाली दल को छोड़कर तमाम चहेतों को सूबे की राजनीतिक पार्टियों के प्रधानों के यहां से दिल्ली का रास्ता दिखाया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के प्रधान अश्वनी शर्मा हो या आम आदमी पार्टी के प्रधान भगवंत मान या फिर पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू, सबके हाथ खाली हैं। इसके पीछे की बड़ी वजह यह है कि टिकटों को लेकर पूरा रिमोट दिल्ली दरबार ने अपने हाथ में ले रखा है। बहुजन समाज पार्टी के प्रधान जसबीर सिंह गढ़ी भी यूपी व दिल्ली के हुक्म बजा रहे हैं।
भाजपा का स्थानीय नेतृत्व कई बातों से अनजान
भाजपा पहली बार पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में उतर चुकी है। पूरा रिमोट दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह व जेपी नड्डा के हाथ में है। पंजाब में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और दुष्यंत गौतम मैदान में हैं। दिल्ली में किन नेताओं को कब ज्वाइन करवाया जा रहा है, इसके बारे में पंजाब लीडरशिप को कुछ भी पता नहीं रहता। पंजाब में टिकटों के आवंटन के लिए भी जो कमेटी गठित की गई है, उसमें पंजाब प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा को किनारे रखा गया है।
पंजाब का चुनावी कार्यालय जालंधर में खोला गया है, जिसको गजेंद्र शेखावत ने अपना मुख्यालय बना लिया है। हाल ही में अकाली दल के पूर्व विधायक सर्बजीत सिंह मक्कड़ ने भाजपा ज्वाइन की तो स्थानीय नेतृत्व को इसकी भनक तक नहीं लगी। अश्वनी शर्मा खुद पठानकोट से विधायक रह चुके हैं और पार्टी उनके स्थान पर भाजपा के प्रदेश महासचिव सुभाष शर्मा को आगे कर रही है। लिहाजा, टिकट के दावेदार भी प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा के भरोसे में न रहकर सीधा दिल्ली की घंटी बजा रहे हैं।
नवजोत सिद्धू के हाथ भी खाली
वहीं कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू भी पावरलैस हो चुके हैं। उनको संगठन तक में जिला प्रधान लगाने के लिए दिल्ली से आज्ञा लेनी पड़ रही है। हालांकि वह टिकट के दावेदारों की पीठ पर हाथ फेर रहे हैं लेकिन दिल्ली ने पंजाब में सुनील जाखड़ को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन व प्रताप बाजवा को चुनावी घोषणा पत्र का जिम्मा देकर सिद्धू को आधा अधूरा कर रखा है। इतना ही नहीं टिकटों के लिए अब कांग्रेसी जाखड़ के अलावा सीएम चरणजीत सिंह चन्नी का दरवाजा खटखटा रहे हैं लेकिन वह भी सीधा हरीश चौधरी का रास्ता दिखा रहे हैं। ऐसी तस्वीर साफ हो रही है कि कांग्रेस में टिकट अकेले सिद्धू के दम पर नहीं मिलने वाली है। हाल ही में टिकटों को लेकर कांग्रेसी दिल्ली दरबार जाकर माथा टेककर आए हैं।
आम आदमी पार्टी के हाल
आम आदमी पार्टी के प्रधान भगवंत मान भी टिकट के चहेतों को हाथ जोड़ रहे हैं और यह बोल रहे हैं कि तुसी राघव चड्डा नाल गल कर लो। किस नेता को टिकट देनी है, किसको ज्वाइन करवाना है, सारा मामला राघव चड्डा तय कर रहे हैं। राघव चड्डा का साथ आप के प्रभारी जरनैल सिंह के अलावा राजस्थान से आए बश्विंदर व संदीप पाठक दे रहे हैं। मामला साफ है कि भगवंत मान सिर्फ रबड़ की मोहर है और टिकट का आवंटन राघव चड्डा की सहमति से हो रहा है।
आम आदमी पार्टी द्वारा रूपनगर विधानसभा हलका से एडवोकेट दिनेश चड्ढा को टिकट देने का पार्टी के मौजूदा विधायक अमरजीत सिंह संदोआ ने विरोध किया है। उन्होंने कहा कि दिनेश चड्ढा आरटीआई से लोगों को ब्लैकमेल करते हैं। पार्टी के सह इंचार्ज राघव चड्ढा ने उनका पक्ष लेते हुए उन्हें टिकट दिलाई है। उन्होंने कहा कि पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल, पंजाब प्रधान भगवंत मान के साथ उनका कोई गिला शिकवा नहीं है, पर वह पार्टी के सह इंचार्ज राघव चड्ढा का डटकर विरोध करते हैं और करते रहेंगे। राघव चड्डा पंजाब में अपनी चला रहे हैं, जिससे पंजाब की इकाई में असंतोष फैलने लगा है।
बसपा भी दिल्ली की तरफ देख रही
बसपा के प्रधान जसबीर सिंह गढ़ी ने भी उपर से आए हुक्म की तमील की है। बसपा ने उन टिकटों को अपने खाते में डाल लिया, जहां अधिकतर सीटों पर पार्टी का कैडर ही नहीं है। बसपा का जहां से मजबूत जनाधार था, वह सीटें अकाली दल को दे दी थी। आदमपुर, फिल्लौर और गढ़शंकर आदि सीटों को बसपा ने अकाली दल को सौंप दिया, जिससे पार्टी के कैडर में रोष फैल गया है। सूत्रों के मुताबिक जसबीर सिंह गढ़ी को जो आदेश दिल्ली व यूपी से आए, उसका पालन कर दिया। इसी के विरोध में बसपा के टकसाली नेता सुखविंदर कोटली, पूर्व प्रधान रशपाल राजू समेत कई नेताओं ने पार्टी को अलविदा कह डाला।