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थाने पर हमला करने वाले 14 युवकों पर मामला दर्ज

Mon, 09 Aug 2021 11:34 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Mon, 09 Aug 2021 11:34 PM IST
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Case registered against 14 youths who attacked the police station
जालंधर के शाहकोट में रविवार देर शाम हत्यारों को पकड़ने की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान थाने पर जमकर ईंट बरसाने के मामले में डीजीपी दिनकर गुप्ता ने गंभीर नोटिस लिया है। पुलिस ने 14 युवकों के खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
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रविवार को तनातनी के बाद शाहकोट के पुलिस थाने पर पथराव कर गाड़ियां तोड़ी गईं इसमें एक एएसआई भी जख्मी हुआ। पुलिस ने डॉ. भीमराव अंबेडकर सोसाइटी के प्रधान जगतार सिंह उर्फ काली प्रधान, ब्लाक प्रधान तिरलोक सिंह और अंबेडकर टाइगर फोर्स के यूथ विंग प्रधान हरजिंदर सिंह समेत 14 से ज्यादा लोगों पर कातिलाना हमले का केस दर्ज किया है।
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थाना शाहकोट के एसएचओ सुरिंदर कुमार ने बताया कि रविवार को वह पुलिसकर्मियों के साथ थाने में मौजूद थे तभी बाहर शोर-शराबा होने लगा। वह बाहर निकले तो वहां 100 से ज्यादा लोग मौजूद थे। उनकी अगुवाई डॉ. भीमराव अंबेडकर सोसाइटी के प्रधान जगतार सिंह उर्फ काली प्रधान निवासी काकड़ कलां, ब्लाक प्रधान तरलोक सिंह और अन्य कर रहे थे।
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जगतार सिंह उर्फ काली प्रधान ने एसएचओ सुरिंदर कुमार को जान से मार देने की नीयत से सीधा ईंट का वार किया। ईंट सीधे एएसआई कश्मीर सिंह की छाती में लगी। फिर तिरलोक ने पुलिस पार्टी पर ईंट चला दी, जो एसआई बलकार सिंह के पैर में लगी। हरजिंदर ने जो ईंट फेंकी वह सहायक सब इंस्पेक्टर सुलिंदर सिंह को लगी। इसके बाद एकदम से पूरी भीड़ ने पुलिस पार्टी पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। थाने के संतरी को घसीटा गया और उसकी वर्दी फाड़ दी गई। पुलिस पार्टी ने दीवार की आड़ लेकर मुश्किल से जान मचाई। एक ईंट सरकारी गाड़ी पर लगी। इसके अलावा भी 2 और गाड़ियों को तोड़ दिया गया। करीब 25 मिनट तक भीड़ थाने पर पथराव करती रही। इसके बाद वो धमकियां देते हुए वहां से फरार हो गए।

दरअसल, दो दिन पहले शाहकोट में रोहित हत्याकांड हुआ था। इसमें इंसाफ मांगने वालों का आरोप था कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया लेकिन किसी को गिरफ्तार नहीं किया। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पीड़ित पक्ष के लोग शाहकोट में रोष मार्च निकाल रहे थे, जिसे पुलिस थाने के बाहर खत्म करना था। इसी दौरान आरोपियों के साथ के कुछ युवकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस वजह से माहौल बिगड़ गया। इसके बाद भीड़ नारेबाजी करने लगी। तभी पुलिस वहां आ गई और उनकी बात सुनने के बजाय कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कोशिश की, जिस वजह से प्रदर्शनकारी भड़क उठे और बात पत्थरबाजी तक पहुंच गई।
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