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Jalandhar News: धान पर भूरे टिड्डे का हमला, किसानों को कीटनाशकों के छिड़काव की सलाह

Wed, 01 Oct 2025 07:53 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 01 Oct 2025 07:53 PM IST
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Brown locust attacks paddy, farmers advised to spray insecticides
संवाद न्यूज एजेंसी
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लुधियाना। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) लुधियाना ने धान की फसल पर भूरे टिड्डे (ब्राउन प्लांट हॉपर) के बढ़ते हमले को देखते हुए किसानों को सतर्क रहने की अपील की है। विश्वविद्यालय के ताजा सर्वेक्षण में यह पाया गया है कि कई इलाकों के खेतों में इस कीट का असर दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस कीट के बच्चे और वयस्क पौधों का रस चूसते हैं जिससे पत्तों के ऊपरी सिरे पीले पड़ने लगते हैं और धीरे-धीरे पूरा पौधा सूखकर झुलस जाता है। कई बार प्रभावित पत्तों पर काली फफूंद भी लग जाती है।
पीएयू वैज्ञानिकों ने बताया कि जैसे-जैसे हमले वाले पौधे सूखते हैं टिड्डे पास के स्वस्थ पौधों पर चले जाते हैं। इससे खेत में दोगियों व धौड़ियों के रूप में सूखे घेरे बनते हैं और यदि रोकथाम न की जाए तो पूरा खेत प्रभावित हो सकता है।
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किसानों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से कुछ पौधों को झुकाकर 2-3 बार हल्का-हल्का झाड़ें। यदि प्रति पौधा पांच या अधिक टिड्डे पानी पर तैरते दिखाई दें तो तुरंत विश्वविद्यालय की ओर से अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करें। इनमें इकोटिन (अजैडीरेक्टिन 5%), उलाला 50 डब्ल्यूजी (फ्लोनिकाॅमिड), पैक्सालोन 10 एससी (ट्राइफ्लूमीजोपाइरम), टोकन/ओशीन/डॉमिनेंट 20 एसजी (डाइनोटेफ्यूरान), चेस 50 डब्ल्यूजी (पाइमेट्रोजिन), ऑर्केस्ट्रा 10 एससी (बेंजपाइरीमोक्षान), इमेजिन/विओला 10 एससी (फ्लूपाइरीमिन) और एकालक्स/क्विनगार्ड/क्विनलमास 25 ईसी (क्विनलफास) शामिल हैं।
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विशेषज्ञों ने चेताया है कि छिड़काव करते समय पंप की धार का रुख पौधों के मुंह की ओर होना चाहिए, क्योंकि यह कीट वहीं सबसे ज्यादा पाया जाता है। यदि हमला केवल दोगियों/धौड़ियों में हो तो पूरे खेत में दवा छिड़कने की बजाय सिर्फ प्रभावित हिस्सों और उनके चारों ओर 3-4 मीटर के दायरे में ही छिड़काव किया जाए।

पीएयू ने किसानों को यह भी सुझाव दिया है कि रात को खेतों के पास बल्ब जलाकर टिड्डों की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है, क्योंकि यह कीट रोशनी की ओर तेजी से आकर्षित होते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर पहचान और अनुशंसित दवाओं के छिड़काव से धान की फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। किसान भाइयों से अपील की गई है कि वे स्वयं दवा की खुराक तय न करें और केवल पीएयू की ओर से सुझाए गए कीटनाशकों का ही प्रयोग करें।
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