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कारसेवा का कमाल, जानिया चाहल में बांध बनकर तैयार
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तलुज दरिया के पानी में घुसकर बांध बनाने में हाथ बंटाते हुए पदमश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल।
- फोटो : KAPURTHALA
कारसेवा का कमाल, जानिया चाहल में बांध बनकर तैयार
300 मीटर नोच(सप्पर) बनने से सतलुज दरिया का बहाव मुड़ा, दरार में पानी बहना बंद
अमर उजाला ब्यूरो
सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला)। कारसेवा के कमाल से गांव जानिया चाहल की दरार पर बांध बनकर तैयार हो गया है। कारसेवा के आगे सतलुज दरिया का पानी झुक गया और 300 मीटर नोच (सप्पर) बनने के बाद बहाव मुड़ गया है। यह सब संत बलबीर सिंह सीचेवाल की अगुवाई में की गई कारसेवा से मुमकिन हुआ। इस बांध के बनने से बाढ़ प्रभावित गांवों में जलस्तर कम होने से सड़क मार्ग पर आवागमन शुरू हो गया है। गांव जानियां चाहल के पास पड़ी दरार में पानी बहना बंद हो गया है।
संत सीचेवाल ने बताया कि पंजाब के लोगों में इतना उत्साह है कि वह अपने-अपने इलाकों में से मिट्टियों की ट्रालियां लेकर यहां पहुंच रहे हैं। संगत और सेना के सहयोग से बनाई गई नोच (सप्पर) से सतलुज दरिया का बहाव फिर पुरानी जगह पर हो गया है। धुस्सी बांध में पड़े फाड़ से करीब 200 मीटर पीछे भारतीय सेना और वातावरण प्रेमी संत बलबीर सिंह सीचेवाल के नेतृत्व में बीते तीन दिनों से नोच बनाने के लिए लगातार 20-20 घंटे सेवा की जा रही थी।
संत सीचेवाल ने बताया कि यह नोच सतलुज दरिया के बहाव को मोड़ने में बड़ी मददगार साबित हुई है। रात के समय लाइट का प्रबंध करके काम को जारी रखा गया था। इस जगह पर सिंचाई विभाग की ओर से पहले भी सप्पर बनाया हुआ था, लेकिन वह पानी के तेज बहाव के आगे बेअसर रहा। सिंचाई विभाग के एक्सईएन अजीत सिंह ने बताया कि यह नया सप्पर बनने से दरार में जाने वाला पानी लगभग थम गया है। मनरेगा वर्कर भी लगातार काम करते हुए दिन के समय पूरी तनदेही से बांध को बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं। संत सीचेवाल ने बताया कि अगर दरार में लगातार पानी का बहाव बरकरार रहता तो बांध को बनाने में बहुत समय लग जाना था।
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300 मीटर नोच(सप्पर) बनने से सतलुज दरिया का बहाव मुड़ा, दरार में पानी बहना बंद
अमर उजाला ब्यूरो
सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला)। कारसेवा के कमाल से गांव जानिया चाहल की दरार पर बांध बनकर तैयार हो गया है। कारसेवा के आगे सतलुज दरिया का पानी झुक गया और 300 मीटर नोच (सप्पर) बनने के बाद बहाव मुड़ गया है। यह सब संत बलबीर सिंह सीचेवाल की अगुवाई में की गई कारसेवा से मुमकिन हुआ। इस बांध के बनने से बाढ़ प्रभावित गांवों में जलस्तर कम होने से सड़क मार्ग पर आवागमन शुरू हो गया है। गांव जानियां चाहल के पास पड़ी दरार में पानी बहना बंद हो गया है।
संत सीचेवाल ने बताया कि पंजाब के लोगों में इतना उत्साह है कि वह अपने-अपने इलाकों में से मिट्टियों की ट्रालियां लेकर यहां पहुंच रहे हैं। संगत और सेना के सहयोग से बनाई गई नोच (सप्पर) से सतलुज दरिया का बहाव फिर पुरानी जगह पर हो गया है। धुस्सी बांध में पड़े फाड़ से करीब 200 मीटर पीछे भारतीय सेना और वातावरण प्रेमी संत बलबीर सिंह सीचेवाल के नेतृत्व में बीते तीन दिनों से नोच बनाने के लिए लगातार 20-20 घंटे सेवा की जा रही थी।
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संत सीचेवाल ने बताया कि यह नोच सतलुज दरिया के बहाव को मोड़ने में बड़ी मददगार साबित हुई है। रात के समय लाइट का प्रबंध करके काम को जारी रखा गया था। इस जगह पर सिंचाई विभाग की ओर से पहले भी सप्पर बनाया हुआ था, लेकिन वह पानी के तेज बहाव के आगे बेअसर रहा। सिंचाई विभाग के एक्सईएन अजीत सिंह ने बताया कि यह नया सप्पर बनने से दरार में जाने वाला पानी लगभग थम गया है। मनरेगा वर्कर भी लगातार काम करते हुए दिन के समय पूरी तनदेही से बांध को बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं। संत सीचेवाल ने बताया कि अगर दरार में लगातार पानी का बहाव बरकरार रहता तो बांध को बनाने में बहुत समय लग जाना था।
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