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पंजाब: अब भाजपा की नजर भी अनुसूचित जाति के वोटों पर, इस नेता पर खेला जा सकता है दांव
Thu, 17 Jun 2021 03:50 PM IST
निवेदिता वर्मा
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 17 Jun 2021 03:50 PM IST
सार
पंजाब में 34 आरक्षित सीट हैं, जिनमें रविदासिया समाज, भगत बिरादरी, वाल्मीकि भाईचारा, महजबी सिख की भारी संख्या में वोट हैं। खासकर दोआबा में रविदासिया समाज बहुसंख्या में है और करीब 35 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति की है।
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विजय सांपला।
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
पंजाब में अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन के बाद अब भाजपा भी राष्ट्रीय अनुसूचित जाति के चेयरमैन विजय सांपला को पंजाब का सीएम चेहरा बनाकर विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है। भाजपा हाईकमान विजय सांपला को इस्तीफा दिलाकर विधानसभा चुनावों में उतारने की घोषणा करने पर विचार कर रही है।
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पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ सूबे में दलित सीएम बनाने की घोषणा कर चुके हैं। इस कारण पार्टी अब पूरा गेम प्लान तैयार कर रही है। पार्टी अब तरुण चुघ की घोषणा से पीछे हट नहीं सकती है क्योंकि अगर अब पार्टी यू टर्न लेती है तो इसकी नाराजगी पंजाब से लेकर यूपी तक जा सकती है, जहां पंजाब के साथ ही विधानसभा चुनाव होने हैं।
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पंजाब में 34 आरक्षित सीट हैं, जिनमें रविदासिया समाज, भगत बिरादरी, वाल्मीकि भाईचारा, महजबी सिख की भारी संख्या में वोट हैं। खासकर दोआबा में रविदासिया समाज बहुसंख्या में है और करीब 35 फीसदी आबादी दलितों की है। भाजपा हाईकमान ने पंजाब में दलित सीएम बनाने की घोषणा की हुई है। पार्टी के पास केंद्रीय राज्य मंत्री सोमप्रकाश रविदासिया समाज से हैं जबकि राष्ट्रीय एससी/एसटी आयोग के चेयरमैन विजय सांपला भी इसी बिरादरी से हैं। भगत चुन्नी लाल काफी बुजुर्ग हो चुके हैं और 2017 में ही उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा था। पार्टी के पास दो ही कद्दावर नेता हैं, जिनको सीएम चेहरा बनाकर चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है।
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सोम प्रकाश केंद्रीय राज्यमंत्री है और रिटायर आईएएस अधिकारी हैं। वह होशियारपुर से लोकसभा के सांसद हैं। सांपला का टिकट काटकर ही सोमप्रकाश को टिकट दिया गया था। ऐसे में एसी/एसटी आयोग के चेयरमैन विजय सांपला पर ही दांव खेलने की तैयारी कर रही है। उनके लिए विधानसभा क्षेत्र की जमीन तैयार करनी शुरू कर दी गई है। वह शाम चौरासी या जालंधर वेस्ट से मैदान में आ सकते हैं। पार्टी के पास दोनों नेताओं के अलावा कोई बड़ा दलित चेहरा नहीं है।
सांपला जालंधर से ही हैं और वह 2014 में होशियारपुर से पहली बार सांसद बने थे, जिसके बाद उनको केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया था। लेकिन 2019 में उनका टिकट काट दिया गया था और सोमप्रकाश को मैदान में उतारा गया था। हाल ही में सांपला को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति का चेयरमैन लगाया गया है। सांपला समर्थकों ने सोशल मीडिया पर दलित सीएम की मुहिम छेड़ दी है, जिसमें सांपला की तस्वीर प्रमुखता से लगाई जा रही है।