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गन्ने का दाम कम मिलने से किसानों में रोष, 20 अगस्त को हाईवे करेंगे जाम
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जालंधर। पंजाब में गन्ने का कम रेट मिलने पर किसान संगठनों ने रोष स्वरूप कैप्टन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। किसान नेताओं ने 20 अगस्त को जालंधर में जालंधर-अमृतसर नेशनल हाईवे जाम कर प्रदर्शन की घोषणा की है, जिससे प्रशासन की सांस फूलने लगी है। किसान नेताओं ने कहा कि 5 साल पहले नेशनल हाईवे की एक लेन बंद की थी, लेकिन अब बार पूर्ण रूप से आवाजाही ठप होगी। अगर सरकार नींद से नहीं जागी तो रेलवे ट्रैक भी जाम करेंगे। यह घोषणा 32 किसान संगठनों ने की है।
हरियाणा में पिछले साल गन्ने का रेट 350 रुपये प्रति क्विंटल था, जिसे 8 रुपये बढ़ाकर अब 358 कर दिया है, जबकि पंजाब में यह रेट सिर्फ 310 रुपये है। 5 साल से कैप्टन सरकार ने गन्ने के रेट नहीं बढ़ाए, जबकि चीनी का रेट भी 40 से अधिक हो चुका है। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक गन्ने का रेट 588 रुपये प्रति क्विंटल बनता है, लेकिन किसान 400 रुपये मांग रहे हैं।
किसान नेता जसकरन सिंह व गुरमिंदर टीनू ने कहा कि पिछले साल सीएम हाउस में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से बैठक हुई थी, लेकिन वे एक हफ्ते का वक्त लेकर मुकर गए। किसानों का हाल बेहाल है, प्राइवेट व सहकारी मिलों पर किसानों का 200 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें प्राइवेट का करीब 145 करोड़ व सहकारी मिलों का 55 करोड़ बकाया है। किसानों के प्रति सरकार की बेरुखी है और किसानों को अब मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा। अगर अगर सरकार ने नहीं सुनी तो रेलवे ट्रैक जाम किया जाएगा।
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हरियाणा में पिछले साल गन्ने का रेट 350 रुपये प्रति क्विंटल था, जिसे 8 रुपये बढ़ाकर अब 358 कर दिया है, जबकि पंजाब में यह रेट सिर्फ 310 रुपये है। 5 साल से कैप्टन सरकार ने गन्ने के रेट नहीं बढ़ाए, जबकि चीनी का रेट भी 40 से अधिक हो चुका है। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक गन्ने का रेट 588 रुपये प्रति क्विंटल बनता है, लेकिन किसान 400 रुपये मांग रहे हैं।
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किसान नेता जसकरन सिंह व गुरमिंदर टीनू ने कहा कि पिछले साल सीएम हाउस में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से बैठक हुई थी, लेकिन वे एक हफ्ते का वक्त लेकर मुकर गए। किसानों का हाल बेहाल है, प्राइवेट व सहकारी मिलों पर किसानों का 200 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें प्राइवेट का करीब 145 करोड़ व सहकारी मिलों का 55 करोड़ बकाया है। किसानों के प्रति सरकार की बेरुखी है और किसानों को अब मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा। अगर अगर सरकार ने नहीं सुनी तो रेलवे ट्रैक जाम किया जाएगा।
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