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Jalandhar News: पटियाला जिले की मंडियों में 61,771 मीट्रिक टन धान की आवक
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अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. जसविंदर सिंह ने पटियाला जिले के किसानों से अपील की है कि किसान रात में धान की कटाई न करें। उन्होंने बताया कि इस साल पटियाला जिले में धान में हल्दी रोग भी लगा है जिसके कारण रात में धान की कटाई करने से नमी के कारण धान के दानों पर हल्दी का पाउडर चिपक जाता है जिससे धान का रंग बिगड़ जाता है और धान बेचना मुश्किल हो जाता है।
डॉ. जसविंदर सिंह ने बताया कि पटियाला जिला प्रशासन ने जिले में शाम 6 बजे से सुबह 10 बजे तक कंबाइन से धान की कटाई पर प्रतिबंध लगाने के आदेश पहले ही जारी कर दिए हैं इसलिए किसान रात में धान की कटाई न करें बल्कि धूप में कटाई करें इससे धान में नमी भी बनी रहती है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मंडियों में 12 लाख 35 हजार मीट्रिक टन धान आने की उम्मीद है और अब तक 61 हजार 771 मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है जो आने वाले दिनों में और बढ़ेगी। उन्होंने किसानों से पराली प्रबंधन के लिए इन-सीटू और एक्स-सीटू तकनीक अपनाने की अपील करते हुए कहा कि जिले में पराली को खेत में ही मिलाने के लिए मशीनरी उपलब्ध है। इसका उपयोग करके किसान न केवल पर्यावरण को प्रदूषण से बचा सकते हैं बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी बनाए रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक्स-सीटू तकनीक के माध्यम से किसान बेलर की मदद से पराली की गांठें बनाकर उसका निपटान भी कर सकते हैं।
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पटियाला। मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. जसविंदर सिंह ने पटियाला जिले के किसानों से अपील की है कि किसान रात में धान की कटाई न करें। उन्होंने बताया कि इस साल पटियाला जिले में धान में हल्दी रोग भी लगा है जिसके कारण रात में धान की कटाई करने से नमी के कारण धान के दानों पर हल्दी का पाउडर चिपक जाता है जिससे धान का रंग बिगड़ जाता है और धान बेचना मुश्किल हो जाता है।
डॉ. जसविंदर सिंह ने बताया कि पटियाला जिला प्रशासन ने जिले में शाम 6 बजे से सुबह 10 बजे तक कंबाइन से धान की कटाई पर प्रतिबंध लगाने के आदेश पहले ही जारी कर दिए हैं इसलिए किसान रात में धान की कटाई न करें बल्कि धूप में कटाई करें इससे धान में नमी भी बनी रहती है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मंडियों में 12 लाख 35 हजार मीट्रिक टन धान आने की उम्मीद है और अब तक 61 हजार 771 मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है जो आने वाले दिनों में और बढ़ेगी। उन्होंने किसानों से पराली प्रबंधन के लिए इन-सीटू और एक्स-सीटू तकनीक अपनाने की अपील करते हुए कहा कि जिले में पराली को खेत में ही मिलाने के लिए मशीनरी उपलब्ध है। इसका उपयोग करके किसान न केवल पर्यावरण को प्रदूषण से बचा सकते हैं बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी बनाए रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक्स-सीटू तकनीक के माध्यम से किसान बेलर की मदद से पराली की गांठें बनाकर उसका निपटान भी कर सकते हैं।
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