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44157 टन सरकारी खरीद के बाद भी किसानों के हाथ खाली
नरिंदर वैद्य/अमर उजाला, जालंधर
Updated Sun, 17 Apr 2016 03:37 PM IST
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गेहूं
- फोटो : demo
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प्रदेश के गोदामों से गायब 12 हजार टन गेहूं के मामले की मार किसानों पर पड़ सकती है। मामले के चर्चा में आते ही फसलों की अदायगी रुक गई है।
जालंधर में गेहूं की खरीद 1 अप्रैल से शुरू हो चुकी है लेकिन 15 दिन बाद भी किसानों को उनकी फसल की अदायगी नहीं हो पा रही है। जालंधर की दाना मंडी में शनिवार तक 1347 टन गेहूं की आमद हो चुकी है। इसमें से 550 टन गेहूं एजेंसियों ने खरीदा है। इसके अलावा जालंधर जिले की मंडियों में शनिवार तक 49764 टन गेहूं पहुंच चुका है।
इसमें से कुल 44310 टन गेहूं की खरीद भी हो चुकी है। इसमें से मात्र 153 टन गेहूं प्राइवेट तौर पर बिका है जबकि 44157 टन गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है। 44157 टन गेहूं की सरकारी खरीद हो जाने के बाद भी किसानों के हाथ खाली ही हैं।
मार्केट कमेटी के सचिव रमनदीप सिंह का कहना है कि मंडी में गेहूं को बचाने के लिए सभी पुख्ता प्रबंधन हैं। मंडी में गेहूं की लिफ्टिंग शुरू हो गई है।
वेयर हाउस ने लिफ्टिंग शुरू कर दी है। पनसप व पनग्रेन भी एक दो दिन में लिफ्टिंग शुरू देगा। नौगजा के किसान हरिपाल का कहना है कि वह तीन दिन से मंडी में डेरा लगाए बैठे हैं। पहले दो दिन तो उनकी फसल की खरीद ही नहीं हो सकी। जब हुई तो उनको उनकी फसल की अदायगी के लिए मंडी में ही रहकर इंतजार करना पड़ रहा है।
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जालंधर में गेहूं की खरीद 1 अप्रैल से शुरू हो चुकी है लेकिन 15 दिन बाद भी किसानों को उनकी फसल की अदायगी नहीं हो पा रही है। जालंधर की दाना मंडी में शनिवार तक 1347 टन गेहूं की आमद हो चुकी है। इसमें से 550 टन गेहूं एजेंसियों ने खरीदा है। इसके अलावा जालंधर जिले की मंडियों में शनिवार तक 49764 टन गेहूं पहुंच चुका है।
इसमें से कुल 44310 टन गेहूं की खरीद भी हो चुकी है। इसमें से मात्र 153 टन गेहूं प्राइवेट तौर पर बिका है जबकि 44157 टन गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है। 44157 टन गेहूं की सरकारी खरीद हो जाने के बाद भी किसानों के हाथ खाली ही हैं।
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मार्केट कमेटी के सचिव रमनदीप सिंह का कहना है कि मंडी में गेहूं को बचाने के लिए सभी पुख्ता प्रबंधन हैं। मंडी में गेहूं की लिफ्टिंग शुरू हो गई है।
वेयर हाउस ने लिफ्टिंग शुरू कर दी है। पनसप व पनग्रेन भी एक दो दिन में लिफ्टिंग शुरू देगा। नौगजा के किसान हरिपाल का कहना है कि वह तीन दिन से मंडी में डेरा लगाए बैठे हैं। पहले दो दिन तो उनकी फसल की खरीद ही नहीं हो सकी। जब हुई तो उनको उनकी फसल की अदायगी के लिए मंडी में ही रहकर इंतजार करना पड़ रहा है।
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