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आंगनबाड़ी सेंटर के बाहर पड़ी गोली खाने से बालक की मौत
Updated Fri, 10 Nov 2017 10:47 PM IST
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आंगनबाड़ी सेंटर के बाहर पड़ी गोली खाने से बच्चे की मौत
गरीबी के कारण परिजन नहीं करा पाए इलाज, दूसरे बच्ची की बची जान
अमर उजाला ब्यूरो
मुक्तसर।
जिले के गांव चौंतरा की धर्मशाला में बने आंगनबाड़ी सेंटर के बाहर पड़ी गोली खाने से दो बच्चों की हालत बिगड़ गई। जिनमें से एक छह वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। जबकि दूसरे की हालत स्थिर है। गांव चौंतरा निवासी गुरविंदर सिंह (6) पुत्र जसकरन सिंह व एकम (4) बुधवार को दोनों घर से खेलने के लिए निकले थे। खेलते हुए वह घर के पास ही स्थित धर्मशाला में बने आंगनबाड़ी सेंटर पर जा पहुंचे। जहां खेलते समय उन्हें बाहर कुछ गोलियां पड़ीं मिलीं, जो उन्होंने खा ली। घर आने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई। उन्हें दस्त लग गए। जिससे परिजनों में भगदड़ मच गई। इसके बाद गांव के ही मेडिकल प्रैक्टिस करने वाले तीर्थ ने उनका उपचार शुरू किया। प्राथमिक सुविधा देने के बाद उसने उन्हें मुक्तसर भेज दिया। एकम के माता पिता उसे मुक्तसर के निजी अस्पताल में ले गए, यहां पर उसकी हालत स्थिर हो गई और उसका बचाव हो गया। जबकि गरीबी के चलते गुरविंदर के माता-पिता उसे कहीं और लेकर चले गए। जिस कारण उसकी हालत में एक बार तो सुधार आया लेकिन वीरवार को दोपहर फिर से हालत बिगड़ने लगी। इसके बाद वह वह उसे शहर लेकर आ रहे थे। मगर रास्ते में ही बच्चे ने दम तोड़ दिया। उनकी ओर से पुलिस या किसी अन्य को कोई शिकायत नहीं दी गई है। बच्चों ने कौन सी गोली खाई, इसका कुछ पता नही चल सका है।
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गरीबी के कारण परिजन नहीं करा पाए इलाज, दूसरे बच्ची की बची जान
अमर उजाला ब्यूरो
मुक्तसर।
जिले के गांव चौंतरा की धर्मशाला में बने आंगनबाड़ी सेंटर के बाहर पड़ी गोली खाने से दो बच्चों की हालत बिगड़ गई। जिनमें से एक छह वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। जबकि दूसरे की हालत स्थिर है। गांव चौंतरा निवासी गुरविंदर सिंह (6) पुत्र जसकरन सिंह व एकम (4) बुधवार को दोनों घर से खेलने के लिए निकले थे। खेलते हुए वह घर के पास ही स्थित धर्मशाला में बने आंगनबाड़ी सेंटर पर जा पहुंचे। जहां खेलते समय उन्हें बाहर कुछ गोलियां पड़ीं मिलीं, जो उन्होंने खा ली। घर आने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई। उन्हें दस्त लग गए। जिससे परिजनों में भगदड़ मच गई। इसके बाद गांव के ही मेडिकल प्रैक्टिस करने वाले तीर्थ ने उनका उपचार शुरू किया। प्राथमिक सुविधा देने के बाद उसने उन्हें मुक्तसर भेज दिया। एकम के माता पिता उसे मुक्तसर के निजी अस्पताल में ले गए, यहां पर उसकी हालत स्थिर हो गई और उसका बचाव हो गया। जबकि गरीबी के चलते गुरविंदर के माता-पिता उसे कहीं और लेकर चले गए। जिस कारण उसकी हालत में एक बार तो सुधार आया लेकिन वीरवार को दोपहर फिर से हालत बिगड़ने लगी। इसके बाद वह वह उसे शहर लेकर आ रहे थे। मगर रास्ते में ही बच्चे ने दम तोड़ दिया। उनकी ओर से पुलिस या किसी अन्य को कोई शिकायत नहीं दी गई है। बच्चों ने कौन सी गोली खाई, इसका कुछ पता नही चल सका है।