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बासमती पर 27 फीसदी अमेरिकी टैरिफ: पंजाब के किसानों को झटका, पाकिस्तान को हो सकता है फायदा
Tue, 08 Apr 2025 12:44 PM IST
निवेदिता वर्मा
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 08 Apr 2025 12:44 PM IST
सार
पंजाब की बासमती पाकिस्तान की बासमती का अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुकाबला करती है। इस तरह यह पारस्परिक कर भारतीय निर्यात के लिए समस्या बन सकता है। भारतीय निर्यात पर प्रभाव के साथ अमेरिका का यह कदम चेन सप्लाई को बाधित कर सकता है।
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Rice
- फोटो : Istock
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विस्तार
भारत हर साल अरबों डॉलर कीमत के बासमती चावल अमेरिका को निर्यात करता है। इसका निर्यात का मुख्य केंद्र पंजाब की बासमती है। इस व्यापार पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय आयात पर अतिरिक्त 27 फीसदी पारस्परिक कर लगाने का फैसला लिया है। इसका सीधा असर पंजाब पर होगा।
पंजाब से बासमती निर्यात अशोक सेठी का कहना है कि मान लीजिए कि एक क्विंटल बासमती चावल की कीमत 100 रुपये है। वहीं, अमेरिका की ओर से 27 फीसदी पारस्परिक कर लगाने से इस एक क्विंटल चावल की कीमत अमेरिका में 127 रुपये होगी। इस तरह अमेरिकी आयातक भारत को छोड़ दूसरे बाजारों की खोज पर निकलेंगे। इससे पाकिस्तान को फायदा हो सकता है।
पंजाब की बासमती पाकिस्तान की बासमती का अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुकाबला करती है। इस तरह यह पारस्परिक कर भारतीय निर्यात के लिए समस्या बन सकता है। भारतीय निर्यात पर प्रभाव के साथ अमेरिका का यह कदम चेन सप्लाई को बाधित कर सकता है। भारत सबसे अधिक कृषि उत्पादों का निर्यात अमेरिका को करता है। दोनों देशों के बीच साल 2024 में द्विपक्षीय कृषि व्यापार कुल करीब 50 हजार करोड़ रुपये का था। इस दौरान भारत ने करीब 40 हजार करोड़ रुपये के कृषि उत्पादों का निर्यात अमेरिका को किया था।
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पंजाब से बासमती निर्यात अशोक सेठी का कहना है कि मान लीजिए कि एक क्विंटल बासमती चावल की कीमत 100 रुपये है। वहीं, अमेरिका की ओर से 27 फीसदी पारस्परिक कर लगाने से इस एक क्विंटल चावल की कीमत अमेरिका में 127 रुपये होगी। इस तरह अमेरिकी आयातक भारत को छोड़ दूसरे बाजारों की खोज पर निकलेंगे। इससे पाकिस्तान को फायदा हो सकता है।
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पंजाब की बासमती पाकिस्तान की बासमती का अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुकाबला करती है। इस तरह यह पारस्परिक कर भारतीय निर्यात के लिए समस्या बन सकता है। भारतीय निर्यात पर प्रभाव के साथ अमेरिका का यह कदम चेन सप्लाई को बाधित कर सकता है। भारत सबसे अधिक कृषि उत्पादों का निर्यात अमेरिका को करता है। दोनों देशों के बीच साल 2024 में द्विपक्षीय कृषि व्यापार कुल करीब 50 हजार करोड़ रुपये का था। इस दौरान भारत ने करीब 40 हजार करोड़ रुपये के कृषि उत्पादों का निर्यात अमेरिका को किया था।
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