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भारत-पाक बंटवारे से पहले का शिव मंदिर, जहां लोगों की होती है मन्नत पूरी
Updated Sat, 28 Jul 2018 10:16 PM IST
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1941 में मंदिर का हुआ था निर्माण
भारत-पाक बंटवारे से पहले का शिव मंदिर, जहां लोगों की होती है मन्नत पूरी
सावन के पहले दिन सुबह मंदिर में थी भीड़, 11 अगस्त से शुरू होगा श्री रामायण पाठ
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर। सावन के पहले दिन सुबह मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। फिरोजपुर शहर और छावनी को जोडने वाले रेलवे पुल के पास भारत-पाक बंटवारे से पहले के शिव मंदिर की बहुत मान्यता है, इस मंदिर में जिस भी व्यक्ति ने मन्नत मांगी है उसकी मुराद पूरी हुई है। ऐसा यहां के पुजारी शिव प्रसाद का कहना है।
पुजारी शिव प्रसाद ने बताया कि वर्ष 1941 में मंदिर का निर्माण हुआ। उसके दादा पंडित छेदी लाल मंदिर के पुजारी थे। तब से लेकर अब तक उन्हीं का परिवार मंदिर की सेवा कर रहा है। मंदिर सेना की जमीन पर बना है। इस मंदिर को सेना ने भी तोडने का प्रयास किया था, जब मंदिर को तोडने के लिए हथोड़े चले तो एक मजदूर की मौत हो गई थी। मजदूर की मौत के बाद मंदिर को तोडने का काम रोक दिया गया था। तब से लेकर अब तक मंदिर उसी तरह बना हुआ है। पुजारी ने बताया कि एक व्यक्ति ने अपने बेटे की फांसी की सजा माफ करने की मन्नत मंदिर में मांगी थी, उसकी मन्नत भी पूरी हो गई थी। तब उक्त व्यक्ति ने मंदिर में कुछेक विकास कार्य करवाए थे। यहां से जिस भी व्यक्ति ने मन्नत मांगी है उसकी मुराद पूरी हुई है, इसीलिए उक्त मंदिर काफी प्रसिद्ध है और दूर-दूर से लोग यहां पर आते हैं। सेना की जमीन पर मंदिर स्थापित होने के कारण इसका ज्यादा विकास कार्य नहीं हो सका है। पुजारी ने बताया कि 11 अगस्त से मंदिर में श्री रामायण का पाठ शुरू होगा, पाठ में हिस्सा लेने के लिए काफी लोग पहुंचते हैं।
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फोटो संख्या-28एफजेडआरपी03 व 04
कैप्शन--फिरोजपुर में भारत-पाक बंटवारे से पहले का शिव मंदिर, यहां आने वाले की हर मन्नत होती है पूरी।
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भारत-पाक बंटवारे से पहले का शिव मंदिर, जहां लोगों की होती है मन्नत पूरी
सावन के पहले दिन सुबह मंदिर में थी भीड़, 11 अगस्त से शुरू होगा श्री रामायण पाठ
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर। सावन के पहले दिन सुबह मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। फिरोजपुर शहर और छावनी को जोडने वाले रेलवे पुल के पास भारत-पाक बंटवारे से पहले के शिव मंदिर की बहुत मान्यता है, इस मंदिर में जिस भी व्यक्ति ने मन्नत मांगी है उसकी मुराद पूरी हुई है। ऐसा यहां के पुजारी शिव प्रसाद का कहना है।
पुजारी शिव प्रसाद ने बताया कि वर्ष 1941 में मंदिर का निर्माण हुआ। उसके दादा पंडित छेदी लाल मंदिर के पुजारी थे। तब से लेकर अब तक उन्हीं का परिवार मंदिर की सेवा कर रहा है। मंदिर सेना की जमीन पर बना है। इस मंदिर को सेना ने भी तोडने का प्रयास किया था, जब मंदिर को तोडने के लिए हथोड़े चले तो एक मजदूर की मौत हो गई थी। मजदूर की मौत के बाद मंदिर को तोडने का काम रोक दिया गया था। तब से लेकर अब तक मंदिर उसी तरह बना हुआ है। पुजारी ने बताया कि एक व्यक्ति ने अपने बेटे की फांसी की सजा माफ करने की मन्नत मंदिर में मांगी थी, उसकी मन्नत भी पूरी हो गई थी। तब उक्त व्यक्ति ने मंदिर में कुछेक विकास कार्य करवाए थे। यहां से जिस भी व्यक्ति ने मन्नत मांगी है उसकी मुराद पूरी हुई है, इसीलिए उक्त मंदिर काफी प्रसिद्ध है और दूर-दूर से लोग यहां पर आते हैं। सेना की जमीन पर मंदिर स्थापित होने के कारण इसका ज्यादा विकास कार्य नहीं हो सका है। पुजारी ने बताया कि 11 अगस्त से मंदिर में श्री रामायण का पाठ शुरू होगा, पाठ में हिस्सा लेने के लिए काफी लोग पहुंचते हैं।
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फोटो संख्या-28एफजेडआरपी03 व 04
कैप्शन--फिरोजपुर में भारत-पाक बंटवारे से पहले का शिव मंदिर, यहां आने वाले की हर मन्नत होती है पूरी।