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निर्माण मजदूरों ने किया धरना प्रदर्शन
Updated Mon, 16 Jul 2018 10:12 PM IST
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निर्माण मजदूरों ने किया धरना प्रदर्शन
जालंधर। भारत निर्माण मिस्त्री-मजदूर यूनियन (सीटू) ने सोमवार को निर्माण मजदूरों की रजिस्ट्रेशन और भलाई स्कीमों के काम सेवा केंद्रों में सहीं ढंग से न होने को लेकर राज्यव्यापी जिला केंद्रों में ज्ञापन दिए। मजदूरों और मिस्त्रयों ने इस अवसर पर धरने-प्रदर्शन भी किए। यूनियन का कहना है कि पंजाब सरकार ने मजदूरों की रजिस्ट्रेशन और भलाई स्कीमों के लिए बने सेवा केंद्र बंद कर दिए हैं। यह केंद्र दोबारा खोले जाएं। ज्ञापन में यह मांग भी की गई कि मजदूरों का सारा काम ब्लॉक स्तर पर दफ्तर खोलकर किया जाए। जालंधर में धरना प्रदर्शन को रघुनाथ सिंह (प्रदेश सचिव), केवल सिंह हजारा, सुच्चा सिंह कोल व तरसेम सिंह नंगल ने संबोधित किया। ज्ञापन में यह मांग भी की गई है कि शगुन स्कीम के लिए सरकार ने सेवा केंद्रों में जानकारी नहीं दी। वैसे भी अब इस स्कीम के लिए सरकार ने मैरिज सर्टीफिकेट लगाना जरूरी कर दिया है, जिसमें कम से कम 2700 रुपये खर्च आ रहा है। मांग की गई है कि इसे भी भलाई विभाग की तरह बिना सर्टिफिकेट लागू किया जाए। इसी प्रकार नरेगा मजदूरों को 100 दिन काम देने की जिम्मेदारी कानूनी तौर पर सरकार की है।
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जालंधर। भारत निर्माण मिस्त्री-मजदूर यूनियन (सीटू) ने सोमवार को निर्माण मजदूरों की रजिस्ट्रेशन और भलाई स्कीमों के काम सेवा केंद्रों में सहीं ढंग से न होने को लेकर राज्यव्यापी जिला केंद्रों में ज्ञापन दिए। मजदूरों और मिस्त्रयों ने इस अवसर पर धरने-प्रदर्शन भी किए। यूनियन का कहना है कि पंजाब सरकार ने मजदूरों की रजिस्ट्रेशन और भलाई स्कीमों के लिए बने सेवा केंद्र बंद कर दिए हैं। यह केंद्र दोबारा खोले जाएं। ज्ञापन में यह मांग भी की गई कि मजदूरों का सारा काम ब्लॉक स्तर पर दफ्तर खोलकर किया जाए। जालंधर में धरना प्रदर्शन को रघुनाथ सिंह (प्रदेश सचिव), केवल सिंह हजारा, सुच्चा सिंह कोल व तरसेम सिंह नंगल ने संबोधित किया। ज्ञापन में यह मांग भी की गई है कि शगुन स्कीम के लिए सरकार ने सेवा केंद्रों में जानकारी नहीं दी। वैसे भी अब इस स्कीम के लिए सरकार ने मैरिज सर्टीफिकेट लगाना जरूरी कर दिया है, जिसमें कम से कम 2700 रुपये खर्च आ रहा है। मांग की गई है कि इसे भी भलाई विभाग की तरह बिना सर्टिफिकेट लागू किया जाए। इसी प्रकार नरेगा मजदूरों को 100 दिन काम देने की जिम्मेदारी कानूनी तौर पर सरकार की है।