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सिविल अस्पताल में सुविधाओं का टोटा
Updated Mon, 20 Nov 2017 10:32 PM IST
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नहीं मिल रही दवाएं, कोटन तक भी गायब
सिविल अस्पताल में मरीजों को हो रही परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सिविल अस्पताल में लोगों को दो-चार होना पड़ रहा है। जहां रात के समय लोगों को अस्पताल के बाहर से दवाई न मिलने की समस्या ज्यों की त्यों है, वहीं अब इमरजेंसी वार्ड में भी जरूरी इंजेक्शन कई दिनों से नहीं मिल रहे। यहां तक कि कोटन भी मिलना मुश्किल है, जबकि सरकार लोगों को अच्छी सेहत सुविधाएं मुहैया कराने के दावे करती नहीं थमती व सेहत विभाग लोगों की समस्या हल करने की बजाय मूक-दर्शक बन कर तमाशा देख रही है। जबकि सरकार की ओर से सिविल अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड में दाखिल होने वाले मरीजों के लिए पहले 24 घंटे नि:शुल्क इलाज की सुविधा मुहैया करवाई जाती थी। इसके बावजूद लोगों को इलाज के लिए बाहर से इंजेक्शन खरीद कर लाने पड़ रहे हैं।
अस्पताल के सर्जिकल वार्ड कमियों से अछूता नहीं है, वहां पर गंदगी का आलम बना हुआ है। शौचालय में भी गंदगी फैली हुई है व नल खराब होने से पानी बहता रहता है। दाखिल मरीजों ने बताया कि अस्पताल के वार्डों में फैली गंदगी पर मच्छरों ने अपना डेरा जमा रखा है। पहले ही शहर में डेंगू जैसी बीमारी फैली हुई है, जिस प्रति सरकार गंभीर नजर नहीं आ रही है। वहीं लोगों का इलाज करने वाले अस्पताल में मच्छरों ने घेर रखा है। जिससे दाखिल मरीजों को भी डेंगू का खतरा सताने लगा है। यह हालात सरेआम स्वच्छ भारत अभियन को मुंह चिढ़ा रहे हैं। इमरजेंसी वार्ड में मरीजों की सुविधाओं के लिए जरूरी इंजेक्शन भी उपलब्ध नहीं है। अस्तपाल प्रशासन ने भले ही 200 से अधिक दवाइयां नि:शुल्क मिलने की सूची तो लगाई गई है, परंतु इसमें से अधिकतर दवाएं गायब हैं, जो मरीजों को नहीं मिल रही। जिसके कारण मरीजों को मजबूर केमिस्ट स्टोर से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं। अस्पताल में स्टाफ की कमी को लेकर एक महीने पहले अस्पताल के पीएमएस एसोसिएशन के सदस्यों ने एसएमओ डॉ. अनूप कुमार को भी मांग पत्र सौंपा था। मांग पत्र सौंपते हुए डाक्टरों ने मांग की कि इमरजेंसी वार्ड सहित अस्पताल के भीतर लोगों को नि:शुल्क मिलने वाली दुकानों की कमी को पूरा करने, डाक्टरों व स्टाफ की कमी को पूरा करने, इमरजेंसी वार्ड में इएमओ की संख्या बढ़ाने व दवाइयों के स्टाफ को पूरा करने की मांग की थी। जिस पर एसएमओ डा. अनूप कुमार ने एसोसिएशन के सदस्यों को उक्त समस्याओं को दो सप्ताह के भीतर हल करने का विश्वास दिलाया था। लेकिन एक महीना बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
रात के समय दुकान खोलने के आदेश दिए थे
तत्कालीन डीसी दलजीत सिंह मांगट ने करीब डेढ़ वर्ष पहले कपूरथला के सभी केमिस्टों के साथ बैठक करके आदेश दिए थे कि सिविल अस्पताल के पास स्थित मेडिकल स्टोर मालिकों को बारी-बारी रात के समय दुकान खोलने के आदेश दिए थे। वहीं उनकी सुरक्षा के लिए एक पुलिस कांस्टेबल की भी ड्यूटी लगाई गई थी। कुछ समय तक तो सब ठीक ठाक चलता रहा। लेकिन समय बीतने के साथ साथ ही केमिस्टों ने अपनी दुकानें रात को खोलना बंद कर दी है। सिविल सर्जन डा. हरप्रीत सिंह काहलों का कहना है कि सिविल अस्पताल में सरकार की ओर से भेजी जाने वाली सभी प्रकार की दवाइयां उपलब्ध है। वहीं सफाई कर्मचारी भी अस्पताल के सभी वार्डों की अच्छी प्रकार से सफाई करते हैं, फिर भी कहीं कोई कमी रह गई तो है तो जल्द ही उसका निपटारा कर दिया जाएगा।
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सिविल अस्पताल में मरीजों को हो रही परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सिविल अस्पताल में लोगों को दो-चार होना पड़ रहा है। जहां रात के समय लोगों को अस्पताल के बाहर से दवाई न मिलने की समस्या ज्यों की त्यों है, वहीं अब इमरजेंसी वार्ड में भी जरूरी इंजेक्शन कई दिनों से नहीं मिल रहे। यहां तक कि कोटन भी मिलना मुश्किल है, जबकि सरकार लोगों को अच्छी सेहत सुविधाएं मुहैया कराने के दावे करती नहीं थमती व सेहत विभाग लोगों की समस्या हल करने की बजाय मूक-दर्शक बन कर तमाशा देख रही है। जबकि सरकार की ओर से सिविल अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड में दाखिल होने वाले मरीजों के लिए पहले 24 घंटे नि:शुल्क इलाज की सुविधा मुहैया करवाई जाती थी। इसके बावजूद लोगों को इलाज के लिए बाहर से इंजेक्शन खरीद कर लाने पड़ रहे हैं।
अस्पताल के सर्जिकल वार्ड कमियों से अछूता नहीं है, वहां पर गंदगी का आलम बना हुआ है। शौचालय में भी गंदगी फैली हुई है व नल खराब होने से पानी बहता रहता है। दाखिल मरीजों ने बताया कि अस्पताल के वार्डों में फैली गंदगी पर मच्छरों ने अपना डेरा जमा रखा है। पहले ही शहर में डेंगू जैसी बीमारी फैली हुई है, जिस प्रति सरकार गंभीर नजर नहीं आ रही है। वहीं लोगों का इलाज करने वाले अस्पताल में मच्छरों ने घेर रखा है। जिससे दाखिल मरीजों को भी डेंगू का खतरा सताने लगा है। यह हालात सरेआम स्वच्छ भारत अभियन को मुंह चिढ़ा रहे हैं। इमरजेंसी वार्ड में मरीजों की सुविधाओं के लिए जरूरी इंजेक्शन भी उपलब्ध नहीं है। अस्तपाल प्रशासन ने भले ही 200 से अधिक दवाइयां नि:शुल्क मिलने की सूची तो लगाई गई है, परंतु इसमें से अधिकतर दवाएं गायब हैं, जो मरीजों को नहीं मिल रही। जिसके कारण मरीजों को मजबूर केमिस्ट स्टोर से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं। अस्पताल में स्टाफ की कमी को लेकर एक महीने पहले अस्पताल के पीएमएस एसोसिएशन के सदस्यों ने एसएमओ डॉ. अनूप कुमार को भी मांग पत्र सौंपा था। मांग पत्र सौंपते हुए डाक्टरों ने मांग की कि इमरजेंसी वार्ड सहित अस्पताल के भीतर लोगों को नि:शुल्क मिलने वाली दुकानों की कमी को पूरा करने, डाक्टरों व स्टाफ की कमी को पूरा करने, इमरजेंसी वार्ड में इएमओ की संख्या बढ़ाने व दवाइयों के स्टाफ को पूरा करने की मांग की थी। जिस पर एसएमओ डा. अनूप कुमार ने एसोसिएशन के सदस्यों को उक्त समस्याओं को दो सप्ताह के भीतर हल करने का विश्वास दिलाया था। लेकिन एक महीना बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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रात के समय दुकान खोलने के आदेश दिए थे
तत्कालीन डीसी दलजीत सिंह मांगट ने करीब डेढ़ वर्ष पहले कपूरथला के सभी केमिस्टों के साथ बैठक करके आदेश दिए थे कि सिविल अस्पताल के पास स्थित मेडिकल स्टोर मालिकों को बारी-बारी रात के समय दुकान खोलने के आदेश दिए थे। वहीं उनकी सुरक्षा के लिए एक पुलिस कांस्टेबल की भी ड्यूटी लगाई गई थी। कुछ समय तक तो सब ठीक ठाक चलता रहा। लेकिन समय बीतने के साथ साथ ही केमिस्टों ने अपनी दुकानें रात को खोलना बंद कर दी है। सिविल सर्जन डा. हरप्रीत सिंह काहलों का कहना है कि सिविल अस्पताल में सरकार की ओर से भेजी जाने वाली सभी प्रकार की दवाइयां उपलब्ध है। वहीं सफाई कर्मचारी भी अस्पताल के सभी वार्डों की अच्छी प्रकार से सफाई करते हैं, फिर भी कहीं कोई कमी रह गई तो है तो जल्द ही उसका निपटारा कर दिया जाएगा।
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