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रेलवे डिवीजनल अस्पताल बाहर से अच्छा अंदर से बीमार
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फिरोजपुर। डिवीजनल रेलवे अस्पताल जितना बाहर से सुंदर है, हकीकत में अंदर ऐसी सुविधाएं मरीज को मिल नहीं रही है। यहां के आईसीयू रूम की जनरल वार्ड से भी बदतर हालत है, इसमें जिस तरह मेडिकल आधुनिक यंत्र होने चाहिए वैसे नहीं है, कुछेक यंत्र पड़े हैं, उनकी हालत भी खस्ता है। अस्पताल के महिला जनरल वार्ड में एसी की ठंडक गायब है, मरीज गर्मी से तड़प रहे हैं। अस्पताल में पंजाब, हिमाचल व जम्मू-कश्मीर के रेलकर्मी इलाज कराने पहुंचते हैं।
मरीजों की शिकायत पर अमर उजाला प्रतिनिधि ने रेलवे अस्पताल का दौरा किया गया। अस्पताल का आईसीयू तलाशते पर भी नजर नहीं आयाष वहां उपस्थित एक सफाई कर्मी ने बताया कि आईसीयू रूम आप के पास में ही है। आईसीयू रूम में प्रवेश किया तो हालत बहुत ही खस्ता दिखी। रूम में कोई स्टाफ मौजूद नहीं था, पता चला है कि यहां पर 24 घंटे कोई कर्मचारी नहीं बैठता है। रूम में कुछेक ट्यूबलाइट खराब थी, यहां पर दो एसी लगे हैं, जिनकी हालत ठीक नहीं है और जितनी ठंडक होनी चाहिए, उतनी नहीं है। बिजली के स्विच टूटे पड़े हैं, मेडिकल आधुनिक यंत्र भी खस्ता हालत में पड़े हैं। आईसीयू रूम में हमेशा 24 घंटे मेडिकल स्टाफ होना चाहिए लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं देखने को मिला। यहां हमेशा सीरियस हालत वाले मरीज आते हैं।
जनरल महिला वार्ड तो गर्मी से काफी तप रहा था, मरीज परेशान थे, कहने को वार्ड में तीन एसी लगे हैं और चल भी रहे हैं लेकिन उनकी ठंडक बिल्कुल गायब है। अस्पताल में मिले कई मरीजों ने बताया कि यहां पर स्टाफ व डाक्टर ज्यादा मरीजों की देखरेख नहीं करते हैं। कई वार्ड मेंनर्सें नजर नहीं आईं। पूछने पर पता चला कि नीचे रूम बने हैं, वहीं पर पुरुष व महिला वार्ड की नर्सें एसी में बैठी होंगी। इस संबंधी अस्पताल के सीएमएस डा. ए चटर्जी से बातचीत करने का प्रयास किया तो उन्होंने कहा कि वह बैठक में व्यस्त हैं।
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मरीजों की शिकायत पर अमर उजाला प्रतिनिधि ने रेलवे अस्पताल का दौरा किया गया। अस्पताल का आईसीयू तलाशते पर भी नजर नहीं आयाष वहां उपस्थित एक सफाई कर्मी ने बताया कि आईसीयू रूम आप के पास में ही है। आईसीयू रूम में प्रवेश किया तो हालत बहुत ही खस्ता दिखी। रूम में कोई स्टाफ मौजूद नहीं था, पता चला है कि यहां पर 24 घंटे कोई कर्मचारी नहीं बैठता है। रूम में कुछेक ट्यूबलाइट खराब थी, यहां पर दो एसी लगे हैं, जिनकी हालत ठीक नहीं है और जितनी ठंडक होनी चाहिए, उतनी नहीं है। बिजली के स्विच टूटे पड़े हैं, मेडिकल आधुनिक यंत्र भी खस्ता हालत में पड़े हैं। आईसीयू रूम में हमेशा 24 घंटे मेडिकल स्टाफ होना चाहिए लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं देखने को मिला। यहां हमेशा सीरियस हालत वाले मरीज आते हैं।
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जनरल महिला वार्ड तो गर्मी से काफी तप रहा था, मरीज परेशान थे, कहने को वार्ड में तीन एसी लगे हैं और चल भी रहे हैं लेकिन उनकी ठंडक बिल्कुल गायब है। अस्पताल में मिले कई मरीजों ने बताया कि यहां पर स्टाफ व डाक्टर ज्यादा मरीजों की देखरेख नहीं करते हैं। कई वार्ड मेंनर्सें नजर नहीं आईं। पूछने पर पता चला कि नीचे रूम बने हैं, वहीं पर पुरुष व महिला वार्ड की नर्सें एसी में बैठी होंगी। इस संबंधी अस्पताल के सीएमएस डा. ए चटर्जी से बातचीत करने का प्रयास किया तो उन्होंने कहा कि वह बैठक में व्यस्त हैं।
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