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सिविल अस्पताल के डाक्टरों का मरीजों के साथ अच्छा नहीं है व्यवहार
Updated Sun, 15 Apr 2018 09:56 PM IST
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नया नहीं है डॉक्टरों का दुर्व्यवहार
लंबे समय से अस्पताल में तैनात हैं कई डॉक्टर करते हैं मनमानी
कई डॉक्टर निजी कोठियों में कर रहे हैं प्राइवेट प्रैक्टिस
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर।
सिविल अस्पताल फिरोजपुर में लंबे समय से तैनात कई डॉक्टरों का मरीजों के साथ व्यवहार सही नहीं है। पहले भी कई मरीजों ने शिकायतें की थी। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें धमकाकर शिकायतें वापस लेने का दबाव बनाया था। कई डॉक्टर लंबे समय से तैनात है और घर पर अपनी निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं।
कई डाक्टर ओपीडी में आधा दिन तक नजर नहीं आते हैं, ताकि मरीज उन्हें उनके घर पर आकर चेकअप कराएं, जिससे उनकी मोटी कमाई हो सके। अस्पताल के एक-दो डाक्टर ने कोठी शहर में बना रखी है और शाम के समय उनके घर पर मरीजों की लंबी कतार लगी होती है। एक मरीज से 150 से 200 रुपये फीस वसूलते हैं और महंगी दवाए लिखते हैं, ताकि उन्हें दवाए में भी कथित तौर पर कमीशन मिल सके। इसीलिए अस्पताल में मरीजों के साथ सही से पेश नहीं आते हैं। 13 अप्रैल को सिविल अस्पताल फिरोजपुर में ईएनटी डॉ. के.एस टीना की ओर से महिला मरीज को बालों से पकड़कर पीटने की घटना ने अस्पताल में कई चिकित्सकों की ओर से मरीजों के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार की पोल खोल दी है।
सूत्रों के मुताबिक सिविल अस्पताल के बच्चा वार्ड में गर्भवती महिलाओं को दाखिल नहीं करने और उनसे सफेद कागज पर हस्ताक्षर करने जैसे घटनाएं भी देखने को मिली हैं। अस्पताल में दवाओं का अभाव है। पिछले चार-पांच वर्षों से कई डॉक्टर अस्पताल में बैठे हैं। नहीं नियमों के मुताबिक तीन वर्ष बाद इनका तबादला होना चाहिए। मरीजों का कहना है कि फिरोजपुर सिविल अस्पताल के डाक्टरों का तबादला गुरदासपुर, पठानकोट, मोहाली के अलावा दूरदराज शहरों में करना चाहिए। ताकि फिरोजपुर में चल रही इनकी दुकानें बंद होनी चाहिए। मरीज बताते हैं कि कई डॉक्टर तो ऐसी दवा लिखते हैं जो शहर में सिर्फ एक ही दुकान पर उपलब्ध होती है। तेरह अप्रैल को महिला मरीज के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद मरीजों में डॉक्टरों के खिलाफ गुस्सा है। डॉक्टरों के व्यवहार को लेकर अस्पताल की यूनियन व महिला के परिजन सोलह अप्रैल को धरना देने की तैयारी में हैं।
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लंबे समय से अस्पताल में तैनात हैं कई डॉक्टर करते हैं मनमानी
कई डॉक्टर निजी कोठियों में कर रहे हैं प्राइवेट प्रैक्टिस
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर।
सिविल अस्पताल फिरोजपुर में लंबे समय से तैनात कई डॉक्टरों का मरीजों के साथ व्यवहार सही नहीं है। पहले भी कई मरीजों ने शिकायतें की थी। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें धमकाकर शिकायतें वापस लेने का दबाव बनाया था। कई डॉक्टर लंबे समय से तैनात है और घर पर अपनी निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं।
कई डाक्टर ओपीडी में आधा दिन तक नजर नहीं आते हैं, ताकि मरीज उन्हें उनके घर पर आकर चेकअप कराएं, जिससे उनकी मोटी कमाई हो सके। अस्पताल के एक-दो डाक्टर ने कोठी शहर में बना रखी है और शाम के समय उनके घर पर मरीजों की लंबी कतार लगी होती है। एक मरीज से 150 से 200 रुपये फीस वसूलते हैं और महंगी दवाए लिखते हैं, ताकि उन्हें दवाए में भी कथित तौर पर कमीशन मिल सके। इसीलिए अस्पताल में मरीजों के साथ सही से पेश नहीं आते हैं। 13 अप्रैल को सिविल अस्पताल फिरोजपुर में ईएनटी डॉ. के.एस टीना की ओर से महिला मरीज को बालों से पकड़कर पीटने की घटना ने अस्पताल में कई चिकित्सकों की ओर से मरीजों के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार की पोल खोल दी है।
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सूत्रों के मुताबिक सिविल अस्पताल के बच्चा वार्ड में गर्भवती महिलाओं को दाखिल नहीं करने और उनसे सफेद कागज पर हस्ताक्षर करने जैसे घटनाएं भी देखने को मिली हैं। अस्पताल में दवाओं का अभाव है। पिछले चार-पांच वर्षों से कई डॉक्टर अस्पताल में बैठे हैं। नहीं नियमों के मुताबिक तीन वर्ष बाद इनका तबादला होना चाहिए। मरीजों का कहना है कि फिरोजपुर सिविल अस्पताल के डाक्टरों का तबादला गुरदासपुर, पठानकोट, मोहाली के अलावा दूरदराज शहरों में करना चाहिए। ताकि फिरोजपुर में चल रही इनकी दुकानें बंद होनी चाहिए। मरीज बताते हैं कि कई डॉक्टर तो ऐसी दवा लिखते हैं जो शहर में सिर्फ एक ही दुकान पर उपलब्ध होती है। तेरह अप्रैल को महिला मरीज के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद मरीजों में डॉक्टरों के खिलाफ गुस्सा है। डॉक्टरों के व्यवहार को लेकर अस्पताल की यूनियन व महिला के परिजन सोलह अप्रैल को धरना देने की तैयारी में हैं।
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