{"_id":"39aadd7941b8bb310ac20fd18332143e","slug":"jaitley-defeat-cm-resign-demand","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेटली को नहीं जिता पाए, अब इस्तीफा दें सीएम ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जेटली को नहीं जिता पाए, अब इस्तीफा दें सीएम
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Mon, 19 May 2014 10:04 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब महिला कांग्र्रेस की पूर्व प्रधान और पूर्व सीएम बेअंत सिंह की बेटी गुरकंवल कौर ने कहा है कि प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा पूरी तरह से फेल साबित हुए हैं।
सूबे में कांग्रेस की खस्ता हालत और हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए बाजवा को खुद ही पद से हट जाना चाहिए। गुरकंवल सोमवार को पार्क प्लाजा में पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। उन्होंने सूबे की गठबंधन सरकार को भी आड़े हाथ लेते हुए कहा कि अकाली भाजपा सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरी है। लाख कोशिशों के बावजूद अमृतसर में भाजपा के दिग्गज नेता अरुण जेटली को हार का मुंह देखना पड़ा है, ऐसे में बादल को भी अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
गुरकंवल कौर ने कहा कि बाजवा ने कांग्रेस को कमजोर किया है। सूबे की कार्यकारिणी के गठन के वक्त टकसाली कांग्रेसियों को किनारे लगा दिया। इसके बाद अपनी मनमर्जी से काम किया और आज उसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा है। हालत यह है कि बाजवा खुद अपनी गुरदासपुर की सीट तक नहीं बचा पाए हैं। गुरकंवल ने आरोप लगाया कि बाजवा ने पार्टी को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि पंजाब कांग्रेस की कमान फिर से पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को सौंप दी जाए।
विज्ञापन
कांग्रेस को फिर से मजबूत करने में कैप्टन ही अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। उन्होंने माना कि कांग्रेस के वोट आम आदमी पार्टी को पड़े, जिससे कांग्रेस को नुकसान हुआ। लेकिन अब 2017 के विस चुनावों के लिए पार्टी को फिर से एकजुट करके मजबूती से खड़ा करने की जरूरत है। इसके लिए अभी से ही होम वर्क शुरू करना होगा। टकसाली कांग्रेसियों को फिर से जोड़ना होगा, जनता में विश्वास बहाल करना होगा और वर्करों को पूरा सम्मान देना होगा।
गुरकंवल ने कहा कि इन चुनावों में अकाली दल के भी अच्छे दिन नहीं आए हैं। पिछले तीन साल से सूबे में कोई विकास नहीं हुआ। नशा, रेत, बजरी, कानून व्यवस्था, महंगी बिजली, बेतहाशा कर इत्यादि कई मुद्दों पर जनता गठबंधन से नाराज है। चुनाव प्रचार के दौरान सीएम बादल यहां तक कहते रहे कि हमारी गलतियों की सजा अरुण जेटली को न दें, लेकिन जनता ने उनकी भी एक न सुनी। इसलिए बादल को भी अब कुर्सी से चिपके रहने का कोई हक नहीं है।
विज्ञापन
सूबे में कांग्रेस की खस्ता हालत और हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए बाजवा को खुद ही पद से हट जाना चाहिए। गुरकंवल सोमवार को पार्क प्लाजा में पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। उन्होंने सूबे की गठबंधन सरकार को भी आड़े हाथ लेते हुए कहा कि अकाली भाजपा सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरी है। लाख कोशिशों के बावजूद अमृतसर में भाजपा के दिग्गज नेता अरुण जेटली को हार का मुंह देखना पड़ा है, ऐसे में बादल को भी अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
विज्ञापन
गुरकंवल कौर ने कहा कि बाजवा ने कांग्रेस को कमजोर किया है। सूबे की कार्यकारिणी के गठन के वक्त टकसाली कांग्रेसियों को किनारे लगा दिया। इसके बाद अपनी मनमर्जी से काम किया और आज उसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा है। हालत यह है कि बाजवा खुद अपनी गुरदासपुर की सीट तक नहीं बचा पाए हैं। गुरकंवल ने आरोप लगाया कि बाजवा ने पार्टी को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि पंजाब कांग्रेस की कमान फिर से पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को सौंप दी जाए।
विज्ञापन
कांग्रेस को फिर से मजबूत करने में कैप्टन ही अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। उन्होंने माना कि कांग्रेस के वोट आम आदमी पार्टी को पड़े, जिससे कांग्रेस को नुकसान हुआ। लेकिन अब 2017 के विस चुनावों के लिए पार्टी को फिर से एकजुट करके मजबूती से खड़ा करने की जरूरत है। इसके लिए अभी से ही होम वर्क शुरू करना होगा। टकसाली कांग्रेसियों को फिर से जोड़ना होगा, जनता में विश्वास बहाल करना होगा और वर्करों को पूरा सम्मान देना होगा।
गुरकंवल ने कहा कि इन चुनावों में अकाली दल के भी अच्छे दिन नहीं आए हैं। पिछले तीन साल से सूबे में कोई विकास नहीं हुआ। नशा, रेत, बजरी, कानून व्यवस्था, महंगी बिजली, बेतहाशा कर इत्यादि कई मुद्दों पर जनता गठबंधन से नाराज है। चुनाव प्रचार के दौरान सीएम बादल यहां तक कहते रहे कि हमारी गलतियों की सजा अरुण जेटली को न दें, लेकिन जनता ने उनकी भी एक न सुनी। इसलिए बादल को भी अब कुर्सी से चिपके रहने का कोई हक नहीं है।