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पंजाब के उद्योगों के लिए अच्छी खबर
चंडीगढ़/अमर उजाला
Updated Tue, 22 Oct 2013 12:46 AM IST
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पंजाब सरकार ने प्रदेश में उद्योगों को बड़ी राहत देते हुए उनके संपत्ति कर को आधा कर दिया है। अब उद्योगों को तीन की बजाए केवल डेढ़ फीसदी ही प्रापर्टी टैक्स देना होगा।
सरकार ने इसके साथ ही अवैध कालोनियों को नियमित करने के लिए तय की गई फीस में कटौती कर दी है। अब अवैध कालोनियों को नियमित करने के लिए केवल पांच रुपये प्रति गज देने होंगे। यह राशि अब तक 12.5 रुपये प्रति गज थी।
उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल और अनिल जोशी पर आधारित कैबिनेट सब कमेटी की सोमवार को बैठक हुई। इसमें कई मुद्दों पर विचार किया गया।
इन मुद्दों पर सब कमेटी के सभी सदस्यों ने अपनी सहमति दी। अगले दो-तीन दिन में इस बारे में सरकार की ओर से अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। स्थानीय निकाय मंत्री अनिल जोशी ने उपरोक्त फैसलों की पुष्टि की है।
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राज्य सरकार की ओर से हाल ही में उद्योगों और कॉमर्शियल साइटों पर एक समान कर लगाने का फैसला किया गया था। इसके बाद उद्योगपतियों के प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय निकाय मंत्री अनिल जोशी से मुलाकात कर उद्योगों को कॉमर्शियल साइट के मुकाबले छूट देने की मांग की थी।
सरकार ने तब उद्योग और कॉमर्शियल दोनों पर ही कलेक्टर रेट का 3 फीसदी सालाना टैक्स तय कर दिया था, लेकिन अब उद्योगों से यह टैक्स केवल 1.5 फीसदी ही लिया जाएगा।
अवैध कालोनियों के लिए दो दरें
प्रदेश में अवैध कालोनियों को नियमित करने के लिए बनाई गई नीति के अनुसार, रिहायशी क्षेत्र के लिए ढाई रुपये नक्शा फीस और 10 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से अनियमितता के जुर्माने के रुप में 12.5 रुपये प्रति वर्ग गज फीस तय की गई थी।
सोमवार को उपमुख्यमंत्री ने इस फीस को भी घटाकर पांच रुपये कर दिया। लेकिन नए फैसले के मुताबिक, म्यूनिसिपल सीमा के अंदर पांच रुपये प्रति वर्ग गज और म्यूनिसिपल सीमा से बाहर ढाई रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से फीस ली जाएगी।
इसी तरह म्यूनिसिपल सीमा के अंदर औद्योगिक इकाइयों से लिया जाने वाला 25 रुपये वर्ग गज फीस को कम करके 12.5 रुपये कर दिया गया है जबकि म्यूनिसिपल सीमा के बाहर पांच रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से ही फीस वसूली जाएगी। कामर्शियल क्षेत्र का चार्ज 25 रुपये प्रति वर्ग गज ही रहेगा।
हाउस टैक्स से जुड़े विवाद 15 दिसंबर तक निपटाएं
पंजाब में हाउस टैक्स से जुड़े सभी प्रकार के विवादों का निपटारा 15 दिसंबर से पहले कर दिया जाएगा। स्थानीय निकाय मंत्री अनिल जोशी ने सोमवार को विभाग के कार्यों का जायजा लेने के लिए उच्चाधिकारियों से की समीक्षा बैठक दौरान यह आदेश दिए।
बैठक में जोशी ने उच्चाधिकारियों से कहा कि पहले से ही बनाई गई हाउस टैक्स डिस्प्यूट कमेटियां 15 दिसंबर तक सभी विवादों का निपटारा करें ताकि लक्ष्य की प्राप्ति को सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर तक टैक्स न जमा करने वाले उपभोक्ताओं को छूट नहीं मिलेगी।
उन्होंने इस संबंध में सभी नगर निगमों, नगर काउंसिलों और पंचायतों को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए आदेश दिए हैं।
स्थानीय निकाय मंत्री ने कहा कि विभाग द्वारा स्वीकृत किए गए भिन्न-भिन्न प्रोजेक्टों की निगरानी का काम पीएमआईडीसी के तकनीकी सलाहकार मेजर जनरल वीके भट्ट को दिया गया है।
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सरकार ने इसके साथ ही अवैध कालोनियों को नियमित करने के लिए तय की गई फीस में कटौती कर दी है। अब अवैध कालोनियों को नियमित करने के लिए केवल पांच रुपये प्रति गज देने होंगे। यह राशि अब तक 12.5 रुपये प्रति गज थी।
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उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल और अनिल जोशी पर आधारित कैबिनेट सब कमेटी की सोमवार को बैठक हुई। इसमें कई मुद्दों पर विचार किया गया।
इन मुद्दों पर सब कमेटी के सभी सदस्यों ने अपनी सहमति दी। अगले दो-तीन दिन में इस बारे में सरकार की ओर से अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। स्थानीय निकाय मंत्री अनिल जोशी ने उपरोक्त फैसलों की पुष्टि की है।
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राज्य सरकार की ओर से हाल ही में उद्योगों और कॉमर्शियल साइटों पर एक समान कर लगाने का फैसला किया गया था। इसके बाद उद्योगपतियों के प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय निकाय मंत्री अनिल जोशी से मुलाकात कर उद्योगों को कॉमर्शियल साइट के मुकाबले छूट देने की मांग की थी।
सरकार ने तब उद्योग और कॉमर्शियल दोनों पर ही कलेक्टर रेट का 3 फीसदी सालाना टैक्स तय कर दिया था, लेकिन अब उद्योगों से यह टैक्स केवल 1.5 फीसदी ही लिया जाएगा।
अवैध कालोनियों के लिए दो दरें
प्रदेश में अवैध कालोनियों को नियमित करने के लिए बनाई गई नीति के अनुसार, रिहायशी क्षेत्र के लिए ढाई रुपये नक्शा फीस और 10 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से अनियमितता के जुर्माने के रुप में 12.5 रुपये प्रति वर्ग गज फीस तय की गई थी।
सोमवार को उपमुख्यमंत्री ने इस फीस को भी घटाकर पांच रुपये कर दिया। लेकिन नए फैसले के मुताबिक, म्यूनिसिपल सीमा के अंदर पांच रुपये प्रति वर्ग गज और म्यूनिसिपल सीमा से बाहर ढाई रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से फीस ली जाएगी।
इसी तरह म्यूनिसिपल सीमा के अंदर औद्योगिक इकाइयों से लिया जाने वाला 25 रुपये वर्ग गज फीस को कम करके 12.5 रुपये कर दिया गया है जबकि म्यूनिसिपल सीमा के बाहर पांच रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से ही फीस वसूली जाएगी। कामर्शियल क्षेत्र का चार्ज 25 रुपये प्रति वर्ग गज ही रहेगा।
हाउस टैक्स से जुड़े विवाद 15 दिसंबर तक निपटाएं
पंजाब में हाउस टैक्स से जुड़े सभी प्रकार के विवादों का निपटारा 15 दिसंबर से पहले कर दिया जाएगा। स्थानीय निकाय मंत्री अनिल जोशी ने सोमवार को विभाग के कार्यों का जायजा लेने के लिए उच्चाधिकारियों से की समीक्षा बैठक दौरान यह आदेश दिए।
बैठक में जोशी ने उच्चाधिकारियों से कहा कि पहले से ही बनाई गई हाउस टैक्स डिस्प्यूट कमेटियां 15 दिसंबर तक सभी विवादों का निपटारा करें ताकि लक्ष्य की प्राप्ति को सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर तक टैक्स न जमा करने वाले उपभोक्ताओं को छूट नहीं मिलेगी।
उन्होंने इस संबंध में सभी नगर निगमों, नगर काउंसिलों और पंचायतों को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए आदेश दिए हैं।
स्थानीय निकाय मंत्री ने कहा कि विभाग द्वारा स्वीकृत किए गए भिन्न-भिन्न प्रोजेक्टों की निगरानी का काम पीएमआईडीसी के तकनीकी सलाहकार मेजर जनरल वीके भट्ट को दिया गया है।