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पंजाब के आईएएस अफसर हिम्मत सिंह पर चार्जशीट
चंडीगढ़/हमीर सिंह
Updated Fri, 18 Oct 2013 01:46 AM IST
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पंजाब सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हिम्मत सिंह को चार्जशीट कर दिया है। उन पर फसली विविधता के लिए बनाई चार काउंसिलों में हुए कथित घोटाले में शामिल होने का आरोप है।
हिम्मत सिंह हाल के महीनों में प्रदेश में विभिन्न मामलों में चार्जशीट किए गए चौथे आईएएस अधिकारी हैं। इनसे पहले डा. रोशन शुंकारिया, कृपाशंकर सरोज और डीएस जसपाल के खिलाफ खिलाफ चार्जशीट का फैसला राज्य सरकार ले चुकी है।
1980 बैच के आईएएस हिम्मत सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी भी माना जाता है। 2006 में अमरिंदर सिंह की सरकार के दौरान प्रदेश में फसली विविधता को बढ़ावा देने के लिए सिटरस काउंसिल का गठन किया था।
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इसके साथ ही तीन अन्य काउंसिल भी स्थापित की गई थीं। इन्हीं काउंसिलों को दिए करीब 87 करोड़ रुपये के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठे थे।
लुधियाना की एक गैर सरकारी संस्था ने सूचना का अधिकार कानून के तहत मिली जानकारी में पाया कि काउंसिलों के उपाध्यक्ष हिम्मत सिंह मई 2007 से 31 अगस्त 2009 तक छुट्टी पर थे।
इसी दौरान वे 1 मई 2007 से 26 अगस्त 2007 तक विदेश भी में रहे जबकि इस अवधि में भी उनके पर काउंसिलों के खातों से पैसा खर्च होता रहा।
87 करोड़ रुपये में से हिम्मत सिंह के लिए पांच सितारा होटलों का किराया और महंगी शराब सहित कई तरह के खर्च किए गए। राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल बनाया, जिसने अपनी रिपोर्ट में घोटाला होने की पुष्टि कर दी।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने जुलाई 2012 में कार्रवाई करने के लिए फाइल को हरी झंडी दे दी थी।
फिर भी मुख्य सचिव की ओर से वीरवार को हिम्मत सिंह को चार्जशीट करने की फाइल क्लीयर की गई। मुख्य सचिव कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है।
पैसे रिकवरी की भी सिफारिश
हिम्मत सिंह की चार्जशीट के जवाब से यदि सरकार संतुष्ट नहीं हुई तो इनसे सिटरस काउंसिल पर खर्च किया पैसा रिकवर किया जा सकता है और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है।
अब तक तीन अफसरों पर कार्रवाई
पंजाब सरकार ने आईएएस डा. रोशन शुंकारिया पर राजस्व मामले में हेराफेरी के कारण कार्रवाई की है जबकि आईएएस कृपाशंकर सरोज पर आयरन घोटाले में शामिल होने के आरोप में कार्रवाई हुई है।
बीते सप्ताह ही सरकार ने पूर्व आईएएस डीएस जसपाल पर रोडवेज का सामान न लौटाने के कारण उन्हें चार्जशीट करने का फैसला किया है।
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हिम्मत सिंह हाल के महीनों में प्रदेश में विभिन्न मामलों में चार्जशीट किए गए चौथे आईएएस अधिकारी हैं। इनसे पहले डा. रोशन शुंकारिया, कृपाशंकर सरोज और डीएस जसपाल के खिलाफ खिलाफ चार्जशीट का फैसला राज्य सरकार ले चुकी है।
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1980 बैच के आईएएस हिम्मत सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी भी माना जाता है। 2006 में अमरिंदर सिंह की सरकार के दौरान प्रदेश में फसली विविधता को बढ़ावा देने के लिए सिटरस काउंसिल का गठन किया था।
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इसके साथ ही तीन अन्य काउंसिल भी स्थापित की गई थीं। इन्हीं काउंसिलों को दिए करीब 87 करोड़ रुपये के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठे थे।
लुधियाना की एक गैर सरकारी संस्था ने सूचना का अधिकार कानून के तहत मिली जानकारी में पाया कि काउंसिलों के उपाध्यक्ष हिम्मत सिंह मई 2007 से 31 अगस्त 2009 तक छुट्टी पर थे।
इसी दौरान वे 1 मई 2007 से 26 अगस्त 2007 तक विदेश भी में रहे जबकि इस अवधि में भी उनके पर काउंसिलों के खातों से पैसा खर्च होता रहा।
87 करोड़ रुपये में से हिम्मत सिंह के लिए पांच सितारा होटलों का किराया और महंगी शराब सहित कई तरह के खर्च किए गए। राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल बनाया, जिसने अपनी रिपोर्ट में घोटाला होने की पुष्टि कर दी।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने जुलाई 2012 में कार्रवाई करने के लिए फाइल को हरी झंडी दे दी थी।
फिर भी मुख्य सचिव की ओर से वीरवार को हिम्मत सिंह को चार्जशीट करने की फाइल क्लीयर की गई। मुख्य सचिव कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है।
पैसे रिकवरी की भी सिफारिश
हिम्मत सिंह की चार्जशीट के जवाब से यदि सरकार संतुष्ट नहीं हुई तो इनसे सिटरस काउंसिल पर खर्च किया पैसा रिकवर किया जा सकता है और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है।
अब तक तीन अफसरों पर कार्रवाई
पंजाब सरकार ने आईएएस डा. रोशन शुंकारिया पर राजस्व मामले में हेराफेरी के कारण कार्रवाई की है जबकि आईएएस कृपाशंकर सरोज पर आयरन घोटाले में शामिल होने के आरोप में कार्रवाई हुई है।
बीते सप्ताह ही सरकार ने पूर्व आईएएस डीएस जसपाल पर रोडवेज का सामान न लौटाने के कारण उन्हें चार्जशीट करने का फैसला किया है।