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माता चंद कौर की हत्या के बाद नामधारी समुदाय में गहराया विवाद

Thu, 07 Apr 2016 07:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना Updated Thu, 07 Apr 2016 07:45 PM IST
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नामधारी समुदाय के पूर्व सतगुरु जगजीत सिंह की धर्मपत्नी माता चंद कौर नहीं रहीं - फोटो : amarujala
नामधारी समुदाय की गुरु माता चंद कौर की हत्या के बाद सतगुरु ठाकुर उदय सिंह और ठाकुर दलीप सिंह के समर्थकों में आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है। वीरवार शाम ठाकुर दलीप सिंह के समर्थकों ने इंटरनेशनल नामधारी संगत के बैनर तले प्रेस कांफ्रेंस करके सीधे ठाकुर उदय सिंह पर अंगुली उठाई।
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संगत ने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि इस हत्या के पीछे का सच सबके सामने लाया जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि माता चंद कौर की हत्या का असल लाभ किसे होगा। नामधारी संगत के चेयरमैन जसविंदर सिंह और महासचिव नवतेज सिंह ने कहा कि ठाकुर दलीप सिंह और उनके समर्थक सतगुरु जगजीत सिंह के ब्रह्मलीन होने के बाद माता चंद कौर को सतगुरु के तौर पर मानते रहे।
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ठाकुर दलीप सिंह भी उनको अपनी मां और सतगुरु मानते हैं। ऐसे में ठाकुर दलीप सिंह पर लगाए जा रहे सभी आरोप बेबुनियाद हैं। संस्था ने सरकार और पुलिस प्रशासन की ओर से की जा रही कार्रवाई पर संतुष्टि जताई है। उन्होंने कहा कि ठाकुर उदय सिंह और उनके समर्थकों द्वारा ठाकुर दलीप सिंह पर लगाए जा रहे आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। ऐसा करके पुलिस की जांच की दिशा को भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।
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वारदात से पहले पूजा में मौजूद रहा शूटर : जसविंदर

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माता चंद कौर की हत्या - फोटो : amar ujala
इंटरनेशनल नामधारी संगत के चेयरमैन जसविंदर सिंह ने दावा किया है कि माता चंद कौर की हत्या से पहले शूटर अकादमी में हो रही वर्नी पाठ में मौजूद था। प्रत्यक्षदर्शी द्वारा बताए हाव भाव के आधार पर ही पुलिस ने आरोपियों के स्कैच जारी किए हैं।

जसविंदर सिंह ने सवाल किया कि श्री भैणी साहिब में भारी खर्च होता है, ऐसे में अकादमी वाली सड़क पर सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगवाए गए। माता जी का निजी सेवक उसी दिन छुट्टी लेकर क्यों गया। प्राथमिकी में साफ है कि माता जी को लगी दोनों गोलियां आर पार हो गई।

चालक करतार सिंह उनके बिल्कुल बगल में बैठा था, ऐसे में गोली आर पार होने के बाद करतार को क्यों नहीं लगी। हत्यारों ने 36 बोर के प्रतिबंधित हथियार का उपयोग किया। ऐसे हथियार केवल सुरक्षा बलों या पुलिस के पास होते हैं। जसविंदर ने कहा कि हत्या की जांच के लिए गठित एसआईटी यह भी पता लगाए कि माता जी की हत्या का सबसे अधिक फायदा किसे हो सकता है।

कांग्रेसियों के आचरण पर सवाल

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नामधारी गुरुमाता चंद कौर की अस्थियों का विसर्जन - फोटो : फाइल फोटो
इंटरनेशनल नामधारी संगत के चेयरमैन जसविंदर सिंह और महासचिव नवतेज के अलावा कांफ्रेंस में मौजूद सभी सदस्यों ने माता चंद कौर के अंतिम संस्कार के दौरान कांग्रेसियों के आचरण की भी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि पूर्व कांग्रेस प्रदेश प्रधान हंसपाल को याद होना चाहिए कि 2003 में जब ठाकुर दलीप सिंह सतगुरु जगजीत सिंह के दर्शन करने श्री भैणी साहिब में गए तो गेट पर ही उनकी कार को तोड़ने का प्रयास किया गया।

पीछे अपने समर्थक लगाकर कटानी कलां चौक में कार रोक कर ठाकुर दलीप सिंह और उनके समर्थकों के साथ मारपीट की गई। तत्कालीन कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार से सहायता लेकर ठाकुर दलीप सिंह पर डाके का केस डलवा दिया गया। जबकि ठाकुर दलीप सिंह की पत्नी बीबी गुरमीत कौर को बिना अदालत को सूचित किए पीओ करार दिया गया।

उस वक्त हंसपाल की इच्छा के अनुसार सब कुछ हो रहा था तो पुलिस और सरकार सब ठीक थे। अब माता चंद कौर के संस्कार के अवसर पर जब सारा नामधारी समाज दुख में डूबा था तो हमदर्दी जताने के बजाय हंसपाल और सांसद रवनीत सिंह बिट्टू बादल सरकार को नाकाम करार देकर सियासी दांव चल रहे थे।

माता चंद कौर की अंतिम अरदास नौ अप्रैल को जीवन नगर में
ठाकुर दलीप सिंह ग्रुप की ओर से माता चंद कौर की अंतिम अरदास नौ अप्रैल को हरियाणा के सिरसा स्थित जीवन नगर में की जाएगी। जसविंदर सिंह ने कहा कि ठाकुर दलीप सिंह और उनकी समर्थक संगत को श्री भैणी साहिब में जाने नहीं दिया जाता, इसलिए जीवन नगर में अंतिम अरदास करने का फैसला किया गया है।

उनका कहना है कि सतगुरु जगजीत सिंह के निधन के बाद ठाकुर दलीप सिंह समर्थित संगत माता चंद कौर को अपनी सतगुरु मानती है। इस अवसर पर सूबा अमरीक सिंह, डॉ. सुखदेव सिंह, सूबा दर्शन सिंह, हरभजन सिंह, गुरदीप सिंह, बलकार सिंह, हरप्रीत सिंह और जसवंत सिंह मौजूद रहे। 
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