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पंजाब में गैस संकट: छोटे कारोबार प्रभावित, घरों में बढ़ा इंडक्शन का इस्तेमाल; चूल्हों पर बन रहा मिड-डे मील

Sat, 21 Mar 2026 10:52 AM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, अबोहर/अमृतसर
संवाद न्यूज एजेंसी, अबोहर/अमृतसर Published by: Nivedita Updated Sat, 21 Mar 2026 10:52 AM IST
सार

घरों में भी गैस की कमी के चलते लोग अब वैकल्पिक साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल करने लगे हैं।

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Gas Crisis in Punjab Small Businesses Hit Use of Induction Cooktops Rises in Homes
पंजाब में चूल्हों पर बन रहा मिड डे मील - फोटो : संवाद

विस्तार

पंजाब में रसोई गैस की कमी का असर अब आम जनजीवन के साथ-साथ छोटे कारोबारियों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खासकर स्ट्रीट फूड विक्रेता, ढाबा संचालक और चाय स्टॉल चलाने वाले लोग इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
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अबोहर में गैस सिलिंडरों की अनियमित सप्लाई और बढ़ती दिक्कतों के कारण छोटे कारोबारियों के कामकाज पर सीधा असर पड़ा है। कई दुकानदारों का कहना है कि समय पर गैस नहीं मिलने से उन्हें या तो दुकान बंद रखनी पड़ती है या फिर सीमित मात्रा में ही सामान तैयार करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आमदनी में गिरावट आई है।
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वहीं दूसरी ओर, घरों में भी गैस की कमी के चलते लोग अब वैकल्पिक साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल करने लगे हैं। खासकर जिन घरों में बिजली की उपलब्धता बेहतर है, वहां इंडक्शन एक आसान विकल्प बनकर उभरा है।
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सरकार की फ्री बिजली योजना इस स्थिति में लोगों के लिए राहत का कारण बन रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि मुफ्त या रियायती बिजली मिलने से इंडक्शन का खर्च काफी हद तक संभल जाता है, जिससे गैस की कमी का असर कुछ कम हो रहा है। हालांकि, यह समाधान स्थायी नहीं है। स्ट्रीट फूड और छोटे व्यवसायों के लिए इंडक्शन पूरी तरह व्यवहारिक विकल्प नहीं बन पा रहा, क्योंकि बड़े स्तर पर खाना पकाने के लिए गैस ही अधिक उपयुक्त मानी जाती है।

नगर कांग्रेस के प्रधान सुभाष बाघला और कारोबारियों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस सप्लाई को जल्द से जल्द सुचारू किया जाए, ताकि आम जनता और छोटे व्यवसायों को राहत मिल सके।

अमृतसर में चूल्हों पर बन रहा मिड-डे मील

पंजाब के सरकारी स्कूलों में भी गैस की कमी के चलते कई स्कूलों में मिड-डे मील अब पारंपरिक चूल्हों पर तैयार किया जा रहा है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी हालत में बच्चों के भोजन में बाधा नहीं आनी चाहिए।

अमृतसर के सरकारी हाई स्कूल इब्बन कलां में पिछले चार दिनों से गैस के बजाय लकड़ी के चूल्हों पर मिड-डे मील तैयार किया जा रहा है। स्कूल की प्रिंसिपल सिमी बेरी के अनुसार, रोजाना करीब 10 से 15 किलो लकड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण एलपीजी गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। शिक्षा विभाग ने पहले ही स्कूलों को वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश जारी कर दिए थे।


नए निर्देशों के अनुसार, जहां गैस सिलिंडर उपलब्ध नहीं हैं, वहां लकड़ी, बिजली या अन्य साधनों से मिड-डे मील तैयार किया जाए। विभाग ने सख्त शब्दों में कहा है कि बच्चों के भोजन से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

मिड-डे मील वर्कर हरजिंदर कौर ने बताया कि वे पूरी जिम्मेदारी के साथ भोजन तैयार कर रहे हैं और बच्चों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जा रही है।

 
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