बॉर्डरों पर डटे रहेंगे किसान: डल्लेवाल बोले- रास्तों के लिए हरियाणा सरकार कर सकती है साजिश, किसान रहें सतर्क
दिल्ली कूच के लिए किसानों को इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि तब तक पंजाब और हरियाणा की सीमाओं पर किसान डटे रहेंगे।
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किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि हरियाणा सरकार स्वतंत्र कमेटी गठित करने के लिए प्रतिष्ठित लोगों के नाम पेश करने को सुप्रीम कोर्ट से समय मांग कर इस मसले को ज्यादा से ज्यादा वक्त तक टालने की कोशिश में है।
उन्होंने कहा कि मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए किसानों की मजबूरी है कि उन्हें बॉर्डरों के खुलने तक वहीं बैठना पड़ेगा, लेकिन इतना साफ है कि मांगें मनवाए जाने के बगैर वापसी अब किसी भी कीमत पर संभव नहीं है। किसान रास्ते खुलने का इंतजार करेंगे और दिल्ली कूच करके अपनी मांगें मनवा कर ही रहेंगे।
डल्लेवाल ने कहा कि हरियाणा सरकार किसी कीमत पर नहीं चाहती कि रास्ते खुलें और किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने के लिए दिल्ली कूच करें। डल्लेवाल ने कहा कि जत्थेबंदियों को आशंका है कि हरियाणा सरकार अपने लोग बॉर्डरों में चल रहे आंदोलनों में प्लांट करके किसानों को भड़काने की साजिश कर सकती है। इसलिए उनकी अपील है कि बॉर्डरों पर डटे किसान सतर्क रहें। डल्लेवाल ने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी की है कि अगर बॉर्डरों पर हालात बिगड़़ते हैं, तो फिर इसे काबू में करने के लिए हरियाणा सरकार कार्रवाई कर सकती है।
डल्लेवाल ने कहा कि खन्नौरी बॉर्डर पर फरवरी में हरियाणा पुलिस की ओर से उकसाए जाने के कारण ही किसानों व पुलिस के बीच टकराव हुआ था। अब इस तरह की नौबत न आए, इसके लिए किसानों को सतर्क रहना पड़ेगा।
हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, तो चुप नहीं रहेंगे
कमेटी के गठन के बारे में डल्लेवाल ने कहा कि फिलहाल किसान जत्थेबंदियां सारे मामले पर नजर बनाए हैं। अगर जत्थेबंदियों की आशंका के मुताबिक सरकारों ने अपने लोग कमेटी में फिट कर किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, तो फिर चुप नहीं रहा जाएगा। इस मौके डल्लेवाल ने केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की ओर से किसान नेताओं को नकली बताते इन पर किसानों को गुमराह करने के दिए बयान पर कहा कि सियासी लोगों का कोई स्टैंड नहीं होता है। जो बिट्टू पहले भाजपाइयों को गालियां देता था, वही अब कुर्सी के लालच में उनके साथ हो लिया है। इसलिए ऐसे नेताओं से किसानों के हित में बात करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है।