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मासूम के न्याय के लिए पिता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 16 Dec 2013 11:25 PM IST
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फरीदकोट बहुचर्चित अपहरण मामले में पीड़ित 15 साल की नाबालिग युवती के पिता ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गए हैं।
पीड़िता के पिता ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर फरीदकोट लोअर कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।
फरीदकोट जिला अदालत ने इस मामले के मुख्य दोषी निशान सिंह को उम्रकैद और उसकी मां नवजोत कौर और अकाली नेता डिंपी समरा को सात साल कैद की सजा सुनाई है।
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पीड़िता के पिता की याचिका को स्वीकार कर लिया।
जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस फतेहदीप सिंह पर आधारित खंडपीठ ने प्रतिवादी बनाए गए 10 आरोपियों को नोटिस जारी किया है।
दाखिल अपील में कहा गया है कि सितंबर 2012 के दौरान राज्य भर में चर्चित हुए छात्रा अपहरण कांड में पुलिस ने मुख्य आरोपी निशान सिंह, उसकी मां नवजोत कौर, पारिवारिक करीबी डिंपी समरा समेत कुल 20 आरोपियों को गिरफ्तार किए थे।
इस मामले में पुलिस ने 29 दिसंबर 2012 को चालान पेश किया था और उसके बाद फरीदकोट की जिला एवं सेशन जज अर्चना पुरी की अदालत में केस की हर रोज सुनवाई हुई।
जिला अदालत ने इसी वर्ष 27 मई को मुख्य आरोपी निशान सिंह को पीड़ित छात्रा से संबंधित अपहरण और दुराचार के दोनों केसों में दोषी करार देते हुए दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई।
सितंबर की घटना में उसकी मां नवजोत कौर, डिंपी समरा समेत 9 अन्य आरोपियों को 7-7 वर्ष की सजा दी गई थी जबकि सुबूतों के अभाव में एक युवती समेत 10 युवकों को बरी करने के आदेश दिए थे।
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बरी होने वाले दस आरोपी
राहुल शर्मा, अमनप्रीत गिल, अमनदीप गोल्डी, हरप्रीत लक्की, सन्नी गंजा, साहिल शर्मा, गुरदीप राजू, अमन कुमार, कुलविंदर कौर, निशू चोपड़ा को बरी किए जाने के खिलाफ पीड़ित छात्रा के पिता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
वहीं, सजा के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे आरोपियों की याचिकाओं को भी स्वीकार कर लिया गया है।
चीफ जस्टिस को हुई है शिकायत
इस बहुचर्चित मामले ने कई यू टर्न लिए हैं। मामले में पुलिस वालाें की लापरवाही की शिकायत पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से भी की गई है।
यह है मामला
इस केस में पहली घटना 25 जून 2012 को हुई। उस दिन निशान सिंह 10वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा को अपहरण करके ले गया। इस मामले में उसके खिलाफ अपहरण का दर्ज हुआ।
27 जुलाई को छात्रा आरोपी के चंगुल से भाग आई। पुलिस ने छात्रा का मेडिकल करवाने के बाद निशान सिंह के खिलाफ दुराचार की धारा भी लगाई, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते उसे गिरफ्तार नहीं किया।
इसके बाद निशान सिंह ने 24 सितंबर 2012 को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अपने तीन साथियों समेत पीड़ित छात्रा के घर पर धावा बोल दिया और उसके अभिभावकों को घायल कर छात्रा को जबरन कार में उठाकर ले गया।
इस घटना को लेकर शहर के विभिन्न संगठनों ने गुंडागर्दी विरोधी एक्शन कमेटी का गठन किया और लगातार दो माह से अधिक चले आंदोलन की बदौलत ना सिर्फ छात्रा सकुशल बरामद हुई बल्कि पुलिस ने निशान सिंह समेत कुल 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
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पीड़िता के पिता ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर फरीदकोट लोअर कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।
फरीदकोट जिला अदालत ने इस मामले के मुख्य दोषी निशान सिंह को उम्रकैद और उसकी मां नवजोत कौर और अकाली नेता डिंपी समरा को सात साल कैद की सजा सुनाई है।
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पीड़िता के पिता की याचिका को स्वीकार कर लिया।
जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस फतेहदीप सिंह पर आधारित खंडपीठ ने प्रतिवादी बनाए गए 10 आरोपियों को नोटिस जारी किया है।
दाखिल अपील में कहा गया है कि सितंबर 2012 के दौरान राज्य भर में चर्चित हुए छात्रा अपहरण कांड में पुलिस ने मुख्य आरोपी निशान सिंह, उसकी मां नवजोत कौर, पारिवारिक करीबी डिंपी समरा समेत कुल 20 आरोपियों को गिरफ्तार किए थे।
इस मामले में पुलिस ने 29 दिसंबर 2012 को चालान पेश किया था और उसके बाद फरीदकोट की जिला एवं सेशन जज अर्चना पुरी की अदालत में केस की हर रोज सुनवाई हुई।
जिला अदालत ने इसी वर्ष 27 मई को मुख्य आरोपी निशान सिंह को पीड़ित छात्रा से संबंधित अपहरण और दुराचार के दोनों केसों में दोषी करार देते हुए दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई।
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सितंबर की घटना में उसकी मां नवजोत कौर, डिंपी समरा समेत 9 अन्य आरोपियों को 7-7 वर्ष की सजा दी गई थी जबकि सुबूतों के अभाव में एक युवती समेत 10 युवकों को बरी करने के आदेश दिए थे।
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बरी होने वाले दस आरोपी
राहुल शर्मा, अमनप्रीत गिल, अमनदीप गोल्डी, हरप्रीत लक्की, सन्नी गंजा, साहिल शर्मा, गुरदीप राजू, अमन कुमार, कुलविंदर कौर, निशू चोपड़ा को बरी किए जाने के खिलाफ पीड़ित छात्रा के पिता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
वहीं, सजा के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे आरोपियों की याचिकाओं को भी स्वीकार कर लिया गया है।
चीफ जस्टिस को हुई है शिकायत
इस बहुचर्चित मामले ने कई यू टर्न लिए हैं। मामले में पुलिस वालाें की लापरवाही की शिकायत पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से भी की गई है।
यह है मामला
इस केस में पहली घटना 25 जून 2012 को हुई। उस दिन निशान सिंह 10वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा को अपहरण करके ले गया। इस मामले में उसके खिलाफ अपहरण का दर्ज हुआ।
27 जुलाई को छात्रा आरोपी के चंगुल से भाग आई। पुलिस ने छात्रा का मेडिकल करवाने के बाद निशान सिंह के खिलाफ दुराचार की धारा भी लगाई, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते उसे गिरफ्तार नहीं किया।
इसके बाद निशान सिंह ने 24 सितंबर 2012 को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अपने तीन साथियों समेत पीड़ित छात्रा के घर पर धावा बोल दिया और उसके अभिभावकों को घायल कर छात्रा को जबरन कार में उठाकर ले गया।
इस घटना को लेकर शहर के विभिन्न संगठनों ने गुंडागर्दी विरोधी एक्शन कमेटी का गठन किया और लगातार दो माह से अधिक चले आंदोलन की बदौलत ना सिर्फ छात्रा सकुशल बरामद हुई बल्कि पुलिस ने निशान सिंह समेत कुल 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया।