शहीद ऊधम सिंह: ब्रिटेन की अदालत में फाड़कर फेंके दस्तावेज को नहीं पढ़ पाए थे अंग्रेज, 80 साल बाद मिली सफलता
पांच जून 1940 को अदालत ने शहीद ऊधम सिंह को फांसी की सजा सुनाई थी। उसके बाद जज ने ऊधम सिंह से पूछा कि कुछ कहना चाहते हो, तब ऊधम सिंह ने अपने हाथ से लिखे आठ पेज से बोलना शुरू किया।
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लंदन की ओल्ड बैले की केंद्रीय अपराध अदालत से घसीटकर जब शहीद ऊधम सिंह को ब्रिटिश पुलिस ले जा रही थी तो उन्होंने अपने हाथों में पकड़े दस्तावेज फाड़कर वहीं फेंक दिए थे। अंग्रेजी अधिकारियों ने जोड़कर पढ़ने का प्रयास किया, लेकिन पढ़ नहीं सके, क्योंकि ये गुरमुखी में लिखे गए थे। लंदन से मंगवाए उक्त दस्तावेजों को 80 साल बाद ऊधम सिंह की जीवनी पर खोज कर रहे लेखक राकेश कुमार ने पढ़ लिया है। लेखक की शहीद पर की गई ये एक नई खोज है।
लेखक राकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने लंदन की नेशनल आर्काइव (फाइल नंबर-पीसीओएम 9/872) से शहीद ऊधम सिंह से जुड़ी कुछ फाइलें मंगवाई थीं। अदालत में जिन आठ दस्तावेजों को फाड़कर शहीद ने फेंका था, उन्हें ब्रिटिश सरकार ने जोड़कर रखा था। ये गुरमुखी में लिखे हुए थे, जिन्हें आज तक किसी ने नहीं पढ़ा था।
राकेश कुमार ने बताया कि जब उक्त दस्तावेज पढ़ रहे थे तो उन्हें अंग्रेजी का एक शब्द नजर आया, लेकिन वो शब्द पूरा नहीं था। उक्त शब्द को पूरा करने के प्रयास में उन्होंने सभी दस्तावेजों को ध्यान से देखा। क्योंकि उक्त शब्द के कारण अंग्रेजों द्वारा जोड़े दस्तावेज सही से पढ़े नहीं जा रहे थे। अंग्रेजी के शब्द को तलाशते समय उनकी नजर ऐसे पेज पर पड़ी जिससे उन्हें समझ में आया कि अंग्रेजों ने फाड़े दस्तावेज को गलत जोड़ दिया था। उक्त दस्तावेजों को दोबारा जोड़ा गया तो गुरमुखी में लिखी प्रत्येक शब्द की लाइनें आपस में जुड़ गईं। शहीद क्या कहना चाहता था, इस बात का पता चल गया। लेखक का कहना है कि 80 साल तक उक्त दस्तावेजों को कोई नहीं पढ़ सका था, क्योंकि ये जुड़े ही गलत थे। अब ब्रिटिश सरकार को भी उक्त दस्तावेजों को ठीक से जोड़ना होगा।
1940 को सुनाई गई थी शहीद ऊधम सिंह को फांसी की सजा
लेखक राकेश कुमार ने बताया कि पांच जून 1940 को अदालत ने शहीद ऊधम सिंह को फांसी की सजा सुनाई थी। उसके बाद जज ने ऊधम सिंह से पूछा कि कुछ कहना चाहते हो, तब ऊधम सिंह ने अपने हाथ से लिखे आठ पेज से बोलना शुरू किया। 25 मिनट बोलने के बाद वे आगे नहीं बोल सके, क्योंकि ब्रिटिश पुलिस उन्हें अदालत से बाहर ले गई। इसलिए ऊधम सिंह ने गुस्से में आकर उक्त दस्तावेज फाड़कर अदालत में फेंक दिए थे, जिन्हें अंग्रेजों ने उठाकर जोड़कर रिकॉर्ड में रख लिया था।
इन बातों को पढ़ने में मिली सफलता
1. शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले, वतन पे पिटने वालों का यही निशान होगा।
2. वतन रहे शाद कौम हो आबाद, हमारा क्या है रहे रहे ना रहे।
3. मार के भजाओ इन्हां फरंगियां पैन ढूंढे वैन, मैमां होन रंडियां।
4. ना धन की हो परवाह मुझे ना आग में बदन यदि है, बाद कोई तो फकत यादे वतन।
5. दिल फिदा करते हैं जान फिदा करते हैं, खुश रहे अहले वतन हम तो सफर करते हैं।
जो कुज पास हो वह माता के नजर करते हैं।
6. मुबारक हो वो जो कौमी काम करते हो बस, उस नूं अपना फर्ज मुनसबी समझो हो कौम की खिदमद।
7. चमन जो कौम का सूखा पड़ा है, एक मुद्दत से उसे मैं खून से सींच कर गुलशन बना दूंगा।
8. फूल खिलते ही पाया के सैय्याद आया, दिल के अरमान कहे खाक निकले बुलबुल।
9. नौजवानों मौका है उठो खुल खलो मादर वतन पे जो आए मुसीबतें शौक से झेलो, देश के सदके को जवानी देलो फिर मिलेगी माता की दुआएं ले लो।
10. किस काम की वो नदी जिसमें न हो रवानी, अगर जोश ही ना हो किस काम की वो जवानी।