पंजाब में डॉक्टरों की हड़ताल: राजस्थान की महिला चिकित्सक की आत्महत्या के विरोध में ठप रहीं ओपीडी, आरोपियों पर कार्रवाई की मांग
आईएमए जालंधर इकाई के प्रधान डॉ. अलोक ललवानी ने बताया कि आईएमए सेंट्रल की ओर से जारी हिदायतों के अनुसार शनिवार सुबह 8 से शाम 6 बजे तक ओपीडी और रूटीन कार्यों को ठप रखा गया। केवल आपातकालीन मरीजों को ही सुविधाएं दी गई।
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राजस्थान के दौसा में पुलिस और नेताओं के उत्पीड़न से परेशान महिला डॉक्टर अर्चना शर्मा ने आत्महत्या कर ली थी। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करवाने की मांग को लेकर शनिवार को देश भर के आईएमए से जुड़े डॉक्टरों ने कामकाज ठप कर रोष प्रदर्शन किया। चिकित्सक अर्चना शर्मा ने सुसाइड नोट में डॉक्टरों का शोषण बंद करो लिखकर आत्महत्या की ली थी। इससे चिकित्सकों में नाराजगी बढ़ गई है। डॉक्टरों ने कहा कि मरीज की जान बचाने के लिए वे पूरा प्रयास करते हैं। इसके बाद भी मरीज की मौत हो जाती है तो डॉक्टर पर ही पूरा ठीकरा फोड़ दिया जाता है।
शनिवार को निजी अस्पतालों में काम बंद रहा। आईएमए जालंधर इकाई के प्रधान डॉ. अलोक ललवानी ने बताया कि आईएमए सेंट्रल की ओर से जारी हिदायतों के अनुसार शनिवार सुबह 8 से शाम 6 बजे तक ओपीडी और रूटीन कार्यों को ठप रखा गया। केवल आपातकालीन मरीजों को ही सुविधाएं दी गई। जिले में 1400 के करीब डॉक्टर आईएमए के सदस्य हैं।
वहीं गुरदासपुर के प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन गुरदासपुर के प्रधान डॉ. बीएस बाजवा के नेतृत्व में रोष मार्च निकाला। इस दौरान अस्पतालों की सभी सेहत सेवाएं ठप रखी गईं। इसके बाद महिला डॉक्टर को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने वाले लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार करने के लिए डीसी गुरदासपुर को मांग पत्र भी सौंपा गया। डॉक्टरों की हड़ताल के कारण प्राइवेट अस्पतालों में आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस मौके पर डॉ. चेतन नंदा, डॉ. ढिल्लों, डॉ. बब्बर, डॉ. कलसी, डॉ. आरती और डॉ. अशोक उपस्थित थे।