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पठानकोट में टावर पर चढ़े बुजुर्गों का संघर्ष जारी: 10 दिन से दे रहे धरना, अब बिगड़ने लगी तबीयत

Thu, 03 Sep 2026 03:45 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट
संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट Published by: शाहिल शर्मा Updated Thu, 03 Sep 2026 03:45 PM IST
सार

टावर पर चढ़े दोनों बुर्जुगों में से एक को सांस लेने में दिक्कत की शिकायत है। संघर्ष कमेटी का कहना है कि अगर बुर्जुगों के साथ कोई अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेवारी प्रशासन की होगी।   

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The struggle of the elderly who climbed a tower in Pathankot continues
धरना दे रहे बुजुर्ग - फोटो : संवाद

विस्तार

बैराज औसती संघर्ष कमेटी, जैनी जुगियाल के 79 सदस्यों को नौकरी देने की मांग को लेकर डीसी पठानकोट की रिहायश माधोपुर  के पास टावर पर चढ़े दो बुजुर्गों का संघर्ष दसवें दिन भी जारी है। 10 दिन तक टावर पर रहने के कारण अब दोनों बुजुर्गों की हालत बिगड़ने लगी है। 88 वर्षीय शरम सिंह और 82 वर्षीय कुलविंदर सिंह पिछले दस दिनों से टावर पर बैठकर सरकार और रंजीत सागर डैम प्रशासन के खिलाफ रोष जता रहे हैं। संघर्ष कर रहे दोनों बुजुर्गों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे टावर से नीचे नहीं उतरेंगे। चाहे उन्हें गर्मी, तेज धूप, बारिश और तूफान का सामना करना पड़े। वे मांग पूरी होने तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे। 

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संघर्ष कमेटी के प्रधान दयाल सिंह ने बताया कि टावर पर बैठे दोनों बुजुर्गों में से 83 वर्षीय कुलविंदर सिंह को अब सांस लेने में परेशानी होने लगी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दोनों में से किसी भी बुजुर्ग को कुछ भी होता है तो इसकी जिम्मेदारी डैम प्रशासन और सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि न्याय नहीं मिलने पर संघर्ष कमेटी जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे जाम करने के लिए भी मजबूर होगी।

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दयाल सिंह ने जिला प्रशासन और डैम प्रशासन से मांग की कि बुजुर्गों की मांगों को जल्द पूरा किया जाए और उन्हें सुरक्षित नीचे उतारा जाए ताकि उन्हें किसी भी तरह का जानी नुकसान न हो। दोनों बुजुर्गों के लिए अस्थायी तौर पर दवाइयां लिफाफों में डालकर रस्सी से ऊपर भेजी जा रही हैं और खाना भी वे दिन में केवल एक बार खा रहे हैं।

साल 2010 से जारी है संघर्ष
संघर्ष कमेटी की मुख्य मांग है कि बिना जांच-पड़ताल के नौकरी पर रखे गए कर्मचारियों को हटाकर असली बैराज औसती संघर्ष कमेटी के सदस्यों को नौकरी दी जाए क्योंकि शाहपुर कंडी बैराज बांध के निर्माण से पहले इन संघर्ष कर्मियों की जमीन बांध में एक्वायर हुई थी। कमेटी के अनुसार, इस मांग को लेकर उनका संघर्ष वर्ष 2010 से चला आ रहा है और वे पहले भी कई बार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। अब दोनों बुजुर्गों ने आर-पार का संघर्ष शुरू कर दिया है। बुजुर्गों की सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से पुलिस, दमकल विभाग और सेहत विभाग को भी मौके पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध करवाई जा सके।
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