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Punjab: पराली जलाने से रोकने के लिए दिन में सख्ती, शाम ढलते ही आसमान में उठते हैं धुएं के गुब्बार, Video

Sun, 16 Nov 2025 12:33 PM IST
अंकेश ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा (पंजाब) Published by: अंकेश ठाकुर Updated Sun, 16 Nov 2025 12:33 PM IST
सार

पंजाब में सख्ती के बावजूद पराली खूब जल रही है। पूरे पंजाब में लगभग 5000 मामले सामने आ चुके हैं। हालात यह है कि रात के अंधेरे में पराली का धुआं उठ रहा है। 

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Strictness during day to prevent stubble burning in evening in Bathinda
एक खेत में जलती पराली - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

पंजाब में पराली प्रबंधन के तमाम दावों और जागरूकता अभियानों के बावजूद बठिंडा जिले का बड़ा हिस्सा इन दिनों पराली के घने धुएं की चपेट में है। दिन के समय जब जिला प्रशासनिक अधिकारी खेतों का दौरा करते हैं तो पराली को आग नहीं लगी होती, लेकिन जब प्रशासनिक अधिकारी पांच बजे के बाद अपने अन्य कामों में व्यस्त हो जाते हैं तो शाम के समय खेतों में पराली आग के हवाले होती है। 

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तलवंडी साबो एरिया के दो जगहों पर धड़ाधड़ किसानों द्वारा बीती रात बड़े स्तर पर पराली को आग के हवाले कर दिया गया। जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 
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कई इलाकों में सांस लेना मुश्किल 
तलवंडी साबो, गोनियाणा, भाई रूपा, भुच्चो, काहनेके, बिल्लूआना, भैमन दिवाना, बीड़ तलाब, सरदागर सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर शाम के समय पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। तलवंडी साबो की दो वीडियो ऐसी प्राप्त हुई है जिनमें बडे स्तर पराली को आग लगाए जाने का देखा जा सकता है। हवा में धुएं की मात्रा इतनी बढ़ चुकी है कि बुज़ुर्गों और बच्चों में सांस संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ने लगे हैं। 
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डीसी बठिंडा, एसएसपी और मुख्य कृषि अधिकारी हरबंस सिंह सिद्धू खुद गांव-गांव जाकर किसानों को समझा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार अधिकतर किसान समझाने के बाद पराली न जलाने का फैसला ले चुके हैं। जबकि कुछ प्रतिशत किसान अभी भी आग लगाने पर अड़े हुए हैं। मुख्य कृषि अधिकारी ने कहा कि किसान अपनी धरती को जलाकर नहीं संभाल सकते। पराली न जलाने वाले किसानों की मिट्टी और फसल दोनों बेहतर हो रही है।

सैटेलाइट निगरानी भी नाकाम
प्रशासन दावा कर रहा है कि सैटेलाइट के माध्यम से निगरानी हो रही है, लेकिन शाम पांच बजे के बाद सैटेलाइट पैटर्न निष्क्रिय हो जाते हैं। इसी समय कई गांवों में आग लगाने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। जिले में बड़ी संख्या में पराली जलाने की घटनाएं होने के बावजूद सिर्फ नामात्र मामले दर्ज होना प्रशासन की निष्क्रियता का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। इससे साफ है कि घटनाएं अधिक, कार्रवाई बेहद कम।

कुछ किसानों ने दिखाया रास्ता
जिन किसानों ने पराली न जलाने का निर्णय लिया है, वे बता रहे हैं कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ी कीट–रोग कम हुए और फसल की गुणवत्ता भी सुधरी है। बठिंडा इस समय प्रदूषण के गंभीर संकट से गुजर रहा है। एक तरफ सरकार की जागरूकता और कानून हैं, दूसरी तरफ अनदेखी, अनुशासन की कमी और प्रशासनिक ढिलाई। अगर तुरंत सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। 


डिप्टी कमिशनर नहीं उठा रहे फोन 
इस मामले को लेकर जब डिप्टी कमिशनर धीमान को फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। तलवंडी साबो के डीएसपी हरप्रीत सिंह का कहना था कि उक्त पराली जलाने की घटनाएं उनके ध्यान में नहीं है।

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