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पितरों की कृपा का खास संयोग: पितृपक्ष में भरणी-मघा और गज छाया योग, श्राद्ध और पितृ तर्पण का विशेष महत्व
Wed, 23 Sep 2026 12:24 PM IST
Nivedita
नीरज कुमार, संवाद, चंडीगढ़
नीरज कुमार, संवाद, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 23 Sep 2026 12:24 PM IST
सार
पितरों के प्रति श्रद्धा रखते हुए आश्विन कृष्ण पक्ष में पितृ तर्पण और श्राद्ध करना आवश्यक माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, आयु और वंश वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
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- फोटो : freepik
विस्तार
इस बार पितृपक्ष में भरणी, मघा और गज छाया योग बन रहे हैं। ज्योतिष और कर्मकांड से जुड़े विद्वानों के अनुसार इन योगों में श्राद्ध और पितृ तर्पण का विशेष महत्व माना गया है।
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सेक्टर-30 के ज्योतिषी एवं कर्मकांडी पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि पितरों के निमित्त विधिपूर्वक और श्रद्धा से किए जाने वाले कर्म को श्राद्ध या पितृयज्ञ कहा जाता है। श्राद्ध कर्म सामान्यतः अपराह्न काल में किया जाता है।
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उन्होंने कहा कि पितरों के प्रति श्रद्धा रखते हुए आश्विन कृष्ण पक्ष में पितृ तर्पण और श्राद्ध करना आवश्यक माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, आयु और वंश वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
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गज छाया योग में श्राद्ध का विशेष महत्व
पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार पितृपक्ष अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही नक्षत्र में हों और शनिवार का दिन हो तो गज छाया योग बनता है। इस योग में श्राद्ध, पितृ तर्पण और तीर्थ स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। इस बार यह योग 10 अक्तूबर को सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहेगा। इस दौरान पूरे दिन श्राद्ध किया जा सकता है।
श्राद्ध से सुख-शांति और समृद्धि की होती है प्राप्ति
हल्लोमाजरा के हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित परशुराम व्यास ने बताया कि ब्रह्म पुराण में तृतीया श्राद्ध में भरणी नक्षत्र के संयोग का उल्लेख मिलता है। इस बार 29 सितंबर को तृतीया तिथि पर भरणी नक्षत्र रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन माता-पिता का श्राद्ध करने से सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है तथा पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
यह है खास
7 अक्तूबर को द्वादशी तिथि में मघा नक्षत्र रहेगा। पंडित व्यास के अनुसार द्वादशी में मघा नक्षत्र होने पर भरणी नक्षत्र के समान पुण्य मिलने की मान्यता है।
ये हैं श्राद्ध की तिथियां
प्रौष्ठपदी पूर्णिमा का श्राद्ध : 26 सितंबर
प्रतिपदा : 27 सितंबर
द्वितीया : 28 सितंबर
तृतीया : 29 सितंबर
चतुर्थी और पंचमी : 30 सितंबर
षष्ठी : 1 अक्तूबर
सप्तमी : 2 अक्तूबर
अष्टमी : 3 अक्तूबर
नवमी : 4 अक्तूबर
दशमी : 5 अक्तूबर
एकादशी : 6 अक्तूबर
द्वादशी : 7 अक्तूबर
त्रयोदशी : 8 अक्तूबर
चतुर्दशी : 9 अक्तूबर
अमावस्या : 10 अक्तूबर
विशेष श्राद्ध की तिथियां
जिसकी मृत्यु पूर्णिमा को हुई हो, उसका श्राद्ध पूर्णिमा को किया जाता है। सौभाग्यवती स्त्री का श्राद्ध नवमी को करने की परंपरा है, चाहे उनकी मृत्यु तिथि कोई भी हो। वहीं शस्त्र, विष या अकाल मृत्यु वालों का श्राद्ध चतुर्दशी को किया जाता है। इस बार भरणी का श्राद्ध 29 सितंबर, मघा का 7 अक्तूबर और गज छाया योग 10 अक्तूबर को रहेगा।