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चंडीगढ़ में 108 कमल के फूलों से संधि पूजा: बंग भवन और कालीबाड़ी दुर्गा पूजा पंडाल में आयोजन
Mon, 19 Oct 2026 09:54 AM IST
Nivedita
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 19 Oct 2026 09:54 AM IST
सार
बंगाली परंपरा में संधि पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। यह अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआती 24 मिनट के संधिकाल में की जाती है। मान्यता है कि इसी समय मां ने राक्षसों का वध किया था।
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चंडीगढ़ में संधि पूजा का आयोजन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चंडीगढ़ के सेक्टर 35 स्थित बंग भवन और सेक्टर 47 के कालीबाड़ी दुर्गा पूजा पंडाल में सोमवार को संधि पूजा का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया। इस दौरान मां दुर्गा की विशेष आरती 108 कमल के फूलों और 108 दीपों से की गई।
बंग भवन के पुजारी सुनील कुमार चटर्जी ने बताया कि पूजा के लिए विशेष रूप से कमल के फूल कोलकाता से मंगवाए गए थे। संधि पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के समक्ष शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
उन्होंने कहा कि बंगाली परंपरा में संधि पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। यह अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआती 24 मिनट के संधिकाल में की जाती है। मान्यता है कि इसी समय मां ने राक्षसों का वध किया था। इसी उपलक्ष्य में मां की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा के दौरान 108 कमल के फूल अर्पित करने और 108 दीप जलाने की परंपरा निभाई जाती है।
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बंग भवन के पुजारी सुनील कुमार चटर्जी ने बताया कि पूजा के लिए विशेष रूप से कमल के फूल कोलकाता से मंगवाए गए थे। संधि पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के समक्ष शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
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उन्होंने कहा कि बंगाली परंपरा में संधि पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। यह अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआती 24 मिनट के संधिकाल में की जाती है। मान्यता है कि इसी समय मां ने राक्षसों का वध किया था। इसी उपलक्ष्य में मां की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा के दौरान 108 कमल के फूल अर्पित करने और 108 दीप जलाने की परंपरा निभाई जाती है।
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