बेअदबी के नासूर पर कानून का मरहम: पंजाब विधानसभा में आज पेश होगा बिल, 10 साल तक की कैद का प्रावधान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया है कि कानून बनाने में कोई जल्दबाजी नहीं की जाएगी। पहले विभिन्न धर्मों के नुमाइंदों, धार्मिक संगठनों व कानून के जानकारों समेत सभी पक्षकारों से विचार-विमर्श किया जाएगा। उनके सुझाव लिए जाएंगे। इस कानून के तहत सरकार पवित्र ग्रंथों की बेअदबी से जुड़े मामलों में कड़ी सजा सुनिश्चित करेगी।
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पंजाब में धर्मग्रंथों, धार्मिक स्थलों, धार्मिक चिह्नों-प्रतीकों व मूर्तियों आदि की बेअदबी की घटनाएं ऐसा नासूर बन चुकी हैं जिनके पक्के इलाज के लिए लंबे समय से आवाज उठ रही है। अब सरकार इस नासूर पर कानून का मरहम लगाने जा रही है। पंजाब सरकार सोमवार को विधानसभा में इसके लिए बिल पेश करेगी।
माना जा रहा है कि इस कानून में बेअदबी करने वालों को 10 साल तक की कैद की सजा का प्रावधान किया जा सकता है। बेअदबी के कारण हिंसा या हिंसा में किसी की मौत की सूरत में आजीवन कारावास का प्रावधान भी इसमें शामिल हो सकता है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ कानून बन जाने से ही इन घटनाओं पर लगाम लग सकेगी?
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बेअदबी का विरोध कर रहे लोगों पर हुई थी फायरिंग
नौ साल, नौ महीने और 13 दिन से इंसाफ के इंतजार में बैठे सुखराज सिंह की आंखें अब पथरा सी गई हैं। इस लंबे वक्फे में उन्होंने बहुत कुछ झेला है। पिता को खोने का दर्द, सरकार के आश्वासन और जांच के नाम पर एक के बाद एक कई एसआईटी लेकिन उन्हें मिला तो सिर्फ इंतजार। 14 अक्टूबर, 2015 को फरीदकोट के बहिबल कलां गोलीकांड में उनके पिता किशन भगवान की जान चली गई थी। वह बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के विरोध में धरना दे रहे थे। इस बीच पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग कर दी जिसमें किशन भगवान और गुरजीत सिंह की मौत हो गई।
इस घटना ने पूरे पंजाब को हिला कर रख दिया। लोगों में आक्रोश भर गया और इसने एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया। बेअदबी व और गोलीकांड के दोषियों को सख्त सजा की मांग तेज हो गई। इस आक्रोश के कारण तत्कालीन शिअद-भाजपा सरकार को 2017 के विधानसभा चुनाव में सत्ता से हाथ धोना पड़ा।
जब कानून बनेगा तब देखेंगे
बेअदबी तब से ही पंजाब में एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। अब भगवंत मान सरकार बेअदबी के खिलाफ कानून लाने जा रही है तो यह घटना की यादें फिर से ताजा हो गई हैं। इसी घटना में जान गंवाने वाले गुरजीत सिंह के पिता साधु सिंह तो इतने हताश हो चुके हैं कि इस मुद्दे पर बात भी नहीं करना चाहते। सिर्फ इतना कहते हैं- जब कानून आएगा... तब देखेंगे।
सुखराज सिंह ने कानून बनाने के फैसले का स्वागत किया है। साथ ही बरगाड़ी बेअदबी और बहिबल कलां गोलीकांड के दोषियों को अब तक सजा न मिलने पर रोष भी जाहिर किया। वह कहते हैं- पंजाब सभी धर्मों का सम्मान करने वाला राज्य है। किसी भी धर्म ग्रंथ का अपमान नहीं होना चाहिए। ऐसा करने वाले को सख्त सजा मिलनी चाहिए लेकिन अफसोस है कि बरगाड़ी बेअदबी के दोषियों को सरकार ने सुरक्षा दी हुई है जबकि उन्हें जेल में होना चाहिए था।
किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा: भगवंत मान
मुख्यमंत्री ने हाल ही में अधिकारियों और सर्वधर्म बेअदबी रोकथाम कानून मोर्चा के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। इसमें मान ने कहा था कि राज्य सरकार बेअदबी की घटनाओं के दोषियों को सजा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कानून को बनाने के लिए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली जाएगी। उन्होंने मौजूदा कानून की खामियों पर चिंता जताई जिनके कारण दोषी खुलेआम घूमते हैं। मान ने बैठक में कहा कि बेअदबी की घटनाओं में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी। सरकार का कर्तव्य है कि ऐसे अपराध में शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए। हम जल्दबाजी में नहीं हैं। सबकी राय लेने के बाद ही सख्त कानून बनाएंगे।
बेअदबी पर मिले मौत की सजा : धामी
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी कहते हैं कि बेअदबी के खिलाफ बनने वाले कानून में सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए ताकि कोई इस बारे में सोच भी न सके। ऐसा करने वाले को मौत की सजा मिलनी चाहिए। बेअदबी सोची-समझी साजिश के तहत की जा रही है। लोगों और एसजीपीसी के सेवादारों ने कई आरोपियों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया लेकिन गहराई से जांच नहीं की गई। हर व्यक्ति को यह कहकर बचा लिया जाता है कि उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। पुलिस ने कभी एसजीपीसी से दोबारा संपर्क नहीं किया। अब अगर सरकार बेअदबी पर सख्त कानून लाती है और उसे लागू करती है तो यह अच्छी बात है। किसी भी धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी नहीं होनी चाहिए।
सरकार की मंशा पर शक, कानून के ड्राफ्ट की कॉपी तक नहीं दी: बाजवा
नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस के विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने विधानसभा सत्र के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा था कि मान सरकार बेअदबी पर कानून बनाने के लिए जो बिल ला रही है, अब तक उन्हें उसके ड्राफ्ट की काॅपी तक नहीं मिली। इससे सरकार की मंशा पर शक होता है। वह कहते हैं कि सरकार ने बहिबल कलां गोलीकांड में बादल परिवार को कभी आरोपी क्यों नहीं बनाया। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल व तत्कालीन गृहमंत्री सुखबीर सिंह बादल का नाम कभी पुलिस फायरिंग से संबंधित एफआईआर में शामिल नहीं किया गया। आप सरकार के साढ़े तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी आज तक कोई जांच रिपोर्ट क्यों नहीं दाखिल की गई। प्रस्तावित बेअदबी विरोधी विधेयक लोगों के साथ धोखा है।
विशेषज्ञों की राय...
कानून के दुरुपयोग का भी खतरा
एडवोकेट आरएस बैंस (बेअदबी मामले में पंजाब सरकार ने इन्हें स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया था।)
धर्म व्यक्तिगत आस्था का मामला है। इसे घर तक सीमित रखना चाहिए। दोषियों को सजा जरूर मिलनी चाहिए लेकिन हमें यह बात भी ध्यान में रखनी चाहिए कि देश में मानसिक रूप से दिव्यांग लोगों की बड़ी संख्या है। ऐसे में कानून के दुरुपयोग का खतरा रहता है। हमने कई मामलों में देखा कि निहत्थे लोगों को भीड़ ने मार दिया। यह सीधे तौर पर मर्डर है। उन्हें कोई इंसाफ नहीं मिला। सरकार की मंशा और टाइमिंग दोनों गलत हैं। आप ऐसा करके धर्म के साथ राजनीति को बढ़ाने का मौका दे रहे हैं। सिर्फ सख्त सजा ही कोई हल नहीं। पुलिस और न्यायिक सुधार भी जरूरी हैं। सख्त कानून तो पहले ही मौजूद है। उनका पालन सही से होना चाहिए। लोगों को जागरूक किया जाए। बच्चों को स्कूलों में सभी धर्मों की शिक्षा दी जाए ताकि वह भविष्य में भावुकता में आकर कोई गलत कदम न उठाएं।
सिर्फ कानून बनाना ही नहीं, पालन करना भी जरूरी
बलविंदर सिंह (शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व सचिव)
सरकार कानून ला रही है, यह अच्छी बात है लेकिन सिर्फ सख्त कानून बनाने से ही कुछ नहीं होगा। कानून का पालन करना भी जरूरी है। कानून तो पहले भी मौजूद हैं। कानून ऐसा हो जो सभी धर्मों पर लागू हो। यह मामला इतनी जल्दी नहीं सुलझ सकता। इस पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए जो नहीं हुई। सरकार स्पष्ट करे कि उसने विभिन्न धर्मों के कौन से प्रतिनिधियों से चर्चा की। इस समस्या का सामाजिक तौर पर हल निकालने का भी प्रयास करना चाहिए।