{"_id":"6acc4939e7d6e318260cc5c4","slug":"rain-disrupts-punjab-paddy-operations-fields-submerged-mandis-overflowing-crop-await-lifting-2026-10-12","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पंजाब में बारिश ने बिगाड़ा धान का खेल: खेत जलमग्न, मंडियां लबालब; 15 लाख टन फसल उठान के इंतजार में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब में बारिश ने बिगाड़ा धान का खेल: खेत जलमग्न, मंडियां लबालब; 15 लाख टन फसल उठान के इंतजार में
Mon, 12 Oct 2026 08:13 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 12 Oct 2026 08:13 AM IST
सार
पंजाब में बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। खेतों और मंडियों में अपनी फसल पर बारिश की मार के बाद किसानों का कहना है कि खाद, बीज और कीटनाशकों पर भारी खर्च करने के बाद अब फसल बचाना भी मुश्किल हो गया है।
विज्ञापन
पंजाब में बरसात का कहर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब में बारिश ने धान की फसल पर दोहरी मार की है। खेतों में खड़ी फसल तेज हवा और पानी से प्रभावित हुई है तो मंडियों में बिकने के इंतजार में पड़ा धान भीगकर खराब होने के खतरे में है। कहीं मंडियों में तीन फीट तक पानी भर गया तो कहीं खुले में रखी धान की बोरियां पानी में डूब गईं।
विज्ञापन
खेतों में जलभराव के कारण कंबाइन से कटाई नहीं हो पा रही। दूसरी ओर, उठान की धीमी रफ्तार ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश की मंडियों में करीब 15 लाख मीट्रिक टन धान उठान के इंतजार में बताया जा रहा है। किसानों ने प्रभावित क्षेत्रों में गिरदावरी करवाकर मुआवजा देने की मांग की है।
विज्ञापन
मंडियों में भीगा धान, उठान की रफ्तार धीमी
बारिश के बीच मंडियों में धान की आवक जारी है, लेकिन उठान उस गति से नहीं हो रहा, जितनी जरूरत है। खुले में रखी बोरियों को तिरपाल से ढकने के बावजूद कई जगह पानी धान तक पहुंच गया। मंडियों में पर्याप्त ढके हुए स्थान और जलनिकासी की कमी ने परेशानी बढ़ा दी है। धान में नमी बढ़ने से खरीद के निर्धारित 17 प्रतिशत मानक को लेकर भी किसानों की चिंता बढ़ गई है।
विज्ञापन
एक दिन में मंडियों में तीन लाख मीट्रिक टन से अधिक धान पहुंचा, जबकि उठान दो लाख मीट्रिक टन से कम रहा। इससे मंडियों में धान का ढेर बढ़ता जा रहा है। राज्य सरकार केंद्र से उठान तेज करने की मांग कर रही है। पिछले साल का करीब 10 लाख मीट्रिक टन धान और गेहूं भी उठान के इंतजार में बताया जा रहा है। ऐसे में नई फसल के लिए मंडियों में जगह की कमी का संकट गहराने लगा है।
Trending Videos
फाजिल्का में तीन फीट तक पानी, सड़क पर पहुंचा धान
फाजिल्का की कई मंडियों में जलनिकासी की व्यवस्था नाकाफी साबित हुई। बारिश के बाद कुछ स्थानों पर तीन फीट तक पानी भर गया। पानी में घिरी बोरियों और भीगे धान को बचाने के लिए किसानों व आढ़तियों को मशक्कत करनी पड़ी। कुछ जगह धान को पानी से बचाने के लिए सड़क तक ले जाना पड़ा। आढ़ती यूनियन के प्रधान संजीव सचदेवा गोल्डी ने कहा कि बारिश से मंडियों में नुकसान हुआ है। जलनिकासी की बेहतर व्यवस्था होती तो हालात इतने खराब नहीं होते।
जालंधर में तिरपाल भी नहीं बचा पाए धान
जालंधर की मंडियों में खुले में रखे धान को तिरपाल से ढका गया था, लेकिन बारिश का पानी कई जगह बोरियों तक पहुंच गया। उठान धीमा होने से धान लंबे समय तक मंडियों में पड़ा है। ऊपर से बारिश ने किसानों और आढ़तियों की मुश्किल बढ़ा दी है। धान में नमी बढ़ने पर खरीद के 17 प्रतिशत मानक के कारण फसल स्वीकार होने को लेकर भी आशंका बनी हुई है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर उठान हो जाता तो धान को इस तरह खुले में नहीं रखना पड़ता।
मोगा में खरीद के बाद उठान की चुनौती
मोगा मंडी में 18,352.40 मीट्रिक टन धान पहुंचा, जिसमें से 12,970.16 मीट्रिक टन की खरीद हुई और 4,399.02 मीट्रिक टन का उठान हो सका। आंकड़े बताते हैं कि खरीद के बाद भी बड़ी मात्रा में धान मंडी में पड़ा है। किसान गुरसेवक सिंह ने बताया कि उनके पास 12 एकड़ जमीन है, जिसमें छह एकड़ ठेके पर ली हुई है। वह शनिवार को फसल लेकर मंडी पहुंचे थे, लेकिन उनकी फसल की खरीद नहीं हो पाई। किसान पहले ही खेती पर खर्च कर चुके हैं और अब उन्हें फसल की बिक्री के साथ बारिश से बचाव की चिंता भी सता रही है।
फाजिल्का की कई मंडियों में जलनिकासी की व्यवस्था नाकाफी साबित हुई। बारिश के बाद कुछ स्थानों पर तीन फीट तक पानी भर गया। पानी में घिरी बोरियों और भीगे धान को बचाने के लिए किसानों व आढ़तियों को मशक्कत करनी पड़ी। कुछ जगह धान को पानी से बचाने के लिए सड़क तक ले जाना पड़ा। आढ़ती यूनियन के प्रधान संजीव सचदेवा गोल्डी ने कहा कि बारिश से मंडियों में नुकसान हुआ है। जलनिकासी की बेहतर व्यवस्था होती तो हालात इतने खराब नहीं होते।
जालंधर में तिरपाल भी नहीं बचा पाए धान
जालंधर की मंडियों में खुले में रखे धान को तिरपाल से ढका गया था, लेकिन बारिश का पानी कई जगह बोरियों तक पहुंच गया। उठान धीमा होने से धान लंबे समय तक मंडियों में पड़ा है। ऊपर से बारिश ने किसानों और आढ़तियों की मुश्किल बढ़ा दी है। धान में नमी बढ़ने पर खरीद के 17 प्रतिशत मानक के कारण फसल स्वीकार होने को लेकर भी आशंका बनी हुई है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर उठान हो जाता तो धान को इस तरह खुले में नहीं रखना पड़ता।
मोगा में खरीद के बाद उठान की चुनौती
मोगा मंडी में 18,352.40 मीट्रिक टन धान पहुंचा, जिसमें से 12,970.16 मीट्रिक टन की खरीद हुई और 4,399.02 मीट्रिक टन का उठान हो सका। आंकड़े बताते हैं कि खरीद के बाद भी बड़ी मात्रा में धान मंडी में पड़ा है। किसान गुरसेवक सिंह ने बताया कि उनके पास 12 एकड़ जमीन है, जिसमें छह एकड़ ठेके पर ली हुई है। वह शनिवार को फसल लेकर मंडी पहुंचे थे, लेकिन उनकी फसल की खरीद नहीं हो पाई। किसान पहले ही खेती पर खर्च कर चुके हैं और अब उन्हें फसल की बिक्री के साथ बारिश से बचाव की चिंता भी सता रही है।
फिरोजपुर में तेज हवा के साथ बारिश, बोरियां भीगीं
फिरोजपुर में सुबह करीब चार बजे तेज हवा के साथ बारिश हुई। खुले में रखे धान को ढकने के लिए डाले गए तिरपाल कई जगह नाकाफी रहे। बारिश का पानी बोरियों तक पहुंचने से धान भीग गया। किसान बलवीर सिंह और तहिल सिंह ने बताया कि फसल तैयार करने में बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी पर खर्च किया गया है। अब बारिश से नुकसान होने पर उनकी लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है। किसानों ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कराकर राहत देने की मांग की है।
जलभराव से खेतों में खड़ी फसल पर भी मार
जालंधर, पटियाला और आसपास के इलाकों में खेतों में पानी भरने से कटाई प्रभावित हुई है। किसानों के अनुसार कई जगह करीब 75 प्रतिशत फसल अब भी खेतों में खड़ी है। पानी भरे खेतों में कंबाइन चलाना मुश्किल हो गया है। इससे कटाई में देरी के साथ फसल के और खराब होने का खतरा बढ़ रहा है। किसानों का कहना है कि बारिश से प्रभावित खेतों की गिरदावरी करवाई जाए, ताकि नुकसान का सही आकलन हो सके और मुआवजा मिल सके।
जगराओं में खरीद ज्यादा, उठान पीछे
जगराओं मंडी में 82,150 क्विंटल धान की आवक हुई। इसमें से 73,780 क्विंटल की खरीद हुई, जबकि 19,830 क्विंटल का उठान हो पाया। खरीद और उठान के बीच अंतर से मंडी में धान जमा होने की स्थिति बनी हुई है। भारतीय किसान यूनियन पंजाब के प्रधान हरिंदर सिंह ने प्रभावित किसानों की फसल का आकलन करवाने और उचित राहत देने की मांग की। लुधियाना जिले के दूसरे हिस्सों में भी मंडियों में रखे धान को बारिश से बचाने की चुनौती बनी रही।
पठानकोट में भी धान की आवक और उठान के आंकड़ों के बीच अंतर सामने आया। बारिश के कारण मंडियों में रखी फसल को सुरक्षित रखने की चिंता बढ़ गई है।
पटियाला में खेतों में पानी, बटाला मंडी में बोरियां डूबीं
पटियाला जिले के नाभा, देवगढ़ी, दुधन साधां, बलबेड़ा, भुनेरहेड़ी और मसींगन समेत कई क्षेत्रों में बारिश से खेत प्रभावित हुए हैं। किसानों के अनुसार करीब 75 प्रतिशत फसल अब भी खेतों में खड़ी है। पानी भरे खेतों में कंबाइन नहीं चल पा रही, जिससे कटाई में देरी हो रही है। किसान कुलविंदर सिंह और जगतार सिंह ने बताया कि यदि खेतों से पानी नहीं निकला तो फसल की कटाई और गुणवत्ता, दोनों पर असर पड़ सकता है।
बटाला मंडी में करीब दो घंटे की बारिश के बाद पानी भर गया। कई जगह धान की बोरियां पानी में डूब गईं। किसानों और आढ़तियों को बोरियों को सुरक्षित जगह पहुंचाने की चिंता सताती रही। अमृतसर की भगतांवाला मंडी में भी उठान की धीमी रफ्तार से धान जमा है। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान नरिंदर बेहल ने बताया कि इस समस्या को लेकर उपायुक्त दलविंदर सिंह से सोमवार को मुलाकात की जाएगी। राजपुरा मंडी में भी पानी भरने से धान की बोरियां बहने जैसी स्थिति बनी।
किसानों की मांग, गिरदावरी कर मुआवजा दे सरकार
जलालाबाद और हलवारा क्षेत्र के किसानों ने बारिश से प्रभावित फसल का आकलन करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि खेती पर पहले ही भारी खर्च हो चुका है। यदि फसल खराब होती है तो नुकसान की भरपाई करना मुश्किल होगा। मंडियों में भी धान भीगने और उठान में देरी से परेशानी बढ़ी है। किसानों ने सरकार से खेतों और मंडियों में हुए नुकसान का जायजा लेकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।
सरकार का दावा, हर दाना खरीदा जाएगा
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक ने कहा कि बारिश से मंडियों में धान प्रभावित हुआ है और सरकार हालात पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदा जाएगा। वहीं, किसान संगठनों और आढ़तियों की मांग है कि खरीद के साथ उठान भी तेज किया जाए, ताकि मंडियों में धान जमा न रहे और बारिश के कारण किसानों की मेहनत पर पानी न फिरे।
बारिश के कारण मंडियों में फसल प्रभावित हुई है और सरकार इस पर नजर बनाए हुए हैं। किसानों का किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं झेलना पड़ेगा और सरकार की तरफ से एक एक दाने की खरीद की जाएगी। -लाल चंद कटारूचक्क, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री।
फिरोजपुर में सुबह करीब चार बजे तेज हवा के साथ बारिश हुई। खुले में रखे धान को ढकने के लिए डाले गए तिरपाल कई जगह नाकाफी रहे। बारिश का पानी बोरियों तक पहुंचने से धान भीग गया। किसान बलवीर सिंह और तहिल सिंह ने बताया कि फसल तैयार करने में बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी पर खर्च किया गया है। अब बारिश से नुकसान होने पर उनकी लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है। किसानों ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कराकर राहत देने की मांग की है।
जलभराव से खेतों में खड़ी फसल पर भी मार
जालंधर, पटियाला और आसपास के इलाकों में खेतों में पानी भरने से कटाई प्रभावित हुई है। किसानों के अनुसार कई जगह करीब 75 प्रतिशत फसल अब भी खेतों में खड़ी है। पानी भरे खेतों में कंबाइन चलाना मुश्किल हो गया है। इससे कटाई में देरी के साथ फसल के और खराब होने का खतरा बढ़ रहा है। किसानों का कहना है कि बारिश से प्रभावित खेतों की गिरदावरी करवाई जाए, ताकि नुकसान का सही आकलन हो सके और मुआवजा मिल सके।
जगराओं में खरीद ज्यादा, उठान पीछे
जगराओं मंडी में 82,150 क्विंटल धान की आवक हुई। इसमें से 73,780 क्विंटल की खरीद हुई, जबकि 19,830 क्विंटल का उठान हो पाया। खरीद और उठान के बीच अंतर से मंडी में धान जमा होने की स्थिति बनी हुई है। भारतीय किसान यूनियन पंजाब के प्रधान हरिंदर सिंह ने प्रभावित किसानों की फसल का आकलन करवाने और उचित राहत देने की मांग की। लुधियाना जिले के दूसरे हिस्सों में भी मंडियों में रखे धान को बारिश से बचाने की चुनौती बनी रही।
पठानकोट में भी धान की आवक और उठान के आंकड़ों के बीच अंतर सामने आया। बारिश के कारण मंडियों में रखी फसल को सुरक्षित रखने की चिंता बढ़ गई है।
पटियाला में खेतों में पानी, बटाला मंडी में बोरियां डूबीं
पटियाला जिले के नाभा, देवगढ़ी, दुधन साधां, बलबेड़ा, भुनेरहेड़ी और मसींगन समेत कई क्षेत्रों में बारिश से खेत प्रभावित हुए हैं। किसानों के अनुसार करीब 75 प्रतिशत फसल अब भी खेतों में खड़ी है। पानी भरे खेतों में कंबाइन नहीं चल पा रही, जिससे कटाई में देरी हो रही है। किसान कुलविंदर सिंह और जगतार सिंह ने बताया कि यदि खेतों से पानी नहीं निकला तो फसल की कटाई और गुणवत्ता, दोनों पर असर पड़ सकता है।
बटाला मंडी में करीब दो घंटे की बारिश के बाद पानी भर गया। कई जगह धान की बोरियां पानी में डूब गईं। किसानों और आढ़तियों को बोरियों को सुरक्षित जगह पहुंचाने की चिंता सताती रही। अमृतसर की भगतांवाला मंडी में भी उठान की धीमी रफ्तार से धान जमा है। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान नरिंदर बेहल ने बताया कि इस समस्या को लेकर उपायुक्त दलविंदर सिंह से सोमवार को मुलाकात की जाएगी। राजपुरा मंडी में भी पानी भरने से धान की बोरियां बहने जैसी स्थिति बनी।
किसानों की मांग, गिरदावरी कर मुआवजा दे सरकार
जलालाबाद और हलवारा क्षेत्र के किसानों ने बारिश से प्रभावित फसल का आकलन करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि खेती पर पहले ही भारी खर्च हो चुका है। यदि फसल खराब होती है तो नुकसान की भरपाई करना मुश्किल होगा। मंडियों में भी धान भीगने और उठान में देरी से परेशानी बढ़ी है। किसानों ने सरकार से खेतों और मंडियों में हुए नुकसान का जायजा लेकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।
सरकार का दावा, हर दाना खरीदा जाएगा
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक ने कहा कि बारिश से मंडियों में धान प्रभावित हुआ है और सरकार हालात पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदा जाएगा। वहीं, किसान संगठनों और आढ़तियों की मांग है कि खरीद के साथ उठान भी तेज किया जाए, ताकि मंडियों में धान जमा न रहे और बारिश के कारण किसानों की मेहनत पर पानी न फिरे।
बारिश के कारण मंडियों में फसल प्रभावित हुई है और सरकार इस पर नजर बनाए हुए हैं। किसानों का किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं झेलना पड़ेगा और सरकार की तरफ से एक एक दाने की खरीद की जाएगी। -लाल चंद कटारूचक्क, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री।