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दलहन में पंजाब बनेगा आत्मनिर्भर: MSP की गारंटी के साथ फसल विविधीकरण के लिए बजट में किसानों को तोहफा

Thu, 06 Feb 2025 09:16 AM IST
निवेदिता वर्मा विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़
विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 06 Feb 2025 09:16 AM IST
सार

पंजाब में हर साल 6 लाख टन तक दालों की खपत होती है। प्रदेश में 1100 किलो प्रति हेक्टेयर दालों की पैदावार की जा रही है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 907 किलो प्रति हेक्टेयर है।

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Punjab will become self-sufficient in pulses Budget crop diversification with MSP guarantee
दलहन - फोटो : Istock

विस्तार

बजट में दालों में आत्मनिर्भरता के जरिए पंजाब के किसानों को केंद्र ने बड़ा तोहफा दिया है। पंजाब में 1960 के दशक में 9.17 लाख हेक्टेयर जमीन पर रबी और खरीफ सीजन में अलग-अलग दालों की पैदावार की जाती थी। 9.17 लाख हेक्टेयर जमीन पर कुल 7.26 लाख टन दाल की पैदावार होती थी। 

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दालों की पैदावार को बढ़ावा न मिलने की वजह से यह घटकर आज 23 हजार हेक्टेयर जमीन पर सिमट कर रह गई है। दालों में आत्मनिर्भरता के जरिए पंजाब अपनी 6 लाख टन खपत की जरूरत को पूरा कर सकता है। केंद्रीय बजट में खासकर पंजाब के किसानों को ध्यान में रखते हुए दालों की पैदावार में आत्मनिर्भरता लाने के लिए अहम कदम उठाया गया है। यहां तक की केंद्र सरकार एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे पंजाब के किसानों के हित में फरवरी 2024 में अनुबंध की शर्त पर मसूर, उड़द, अरहर यानी तूर, मक्की और कपास पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने की पेशकश कर चुकी है।
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ऐसे में केंद्र भी पंजाब के किसानों के हित में फसलों पर एमएसपी के साथ फसल विविधीकरण की उनकी मांग को पूरा करने  के लिए नई घोषणा की है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने दालों में आत्मनिर्भरता के लिए बजट में 1 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, इससे  सरकार ने 2029 तक आयात खत्म करने का लक्ष्य है।

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राष्ट्रीय औसत से अब भी प्रदेश में दालों की ज्यादा पैदावार

आंकड़ों की अगर बात करें तो अब भी पंजाब में दालों की पैदावार राष्ट्रीय औसत से अधिक है, लेकिन वह प्रदेश की कुल खपत को भी पूरा नहीं कर पा रही है।

खरीफ सीजन में दालों की पैदावार की अगर बात करें तो अरहर, उड़द, मूंग की जो पैदावार चार दशक पहले 99 हजार हेक्टेयर थी, वह अब सिमट कर 9 से 10 हजार हेक्टेयर रह गई है। इसी तरह रबी के सीजन में दालों की पैदावार का आंकड़ा 8.81 लाख हेक्टेयर से 8 से 10 हजार हेक्टेयर रह गया है।

प्रदेश में धान और गेहूं की सर्वाधिक पैदावार

प्रदेश में धान और गेहूं की सर्वाधिक पैदावार की जा रही है। प्रदेश के भू जल स्तर में तेजी से गिरावट में चावल की खेती अहम कारण है। यही कारण है कि इस बार पंजाब सरकार ने केंद्र से फसल विविधीकरण के लिए स्पेशल पैकेज की मांग की थी। केंद्र ने स्पेशल पैकेज तो नहीं दिया, लेकिन दालों की पैदावार को बढ़ावा देने केलिए पंजाब पर फोकस रखते हुए नई योजना की घोषणा की है। प्रदेश में इस बार 185 लाख मीट्रिक टन धान की पैदावार का लक्ष्य रखा गया था। प्रदेश में 3.2 मीलियन हेक्टेयर जमीन पर चावल की और 3.5 मीलियन हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की पैदावार की जाती है। किसानों को कपास की खेती की तरफ मोड़ने के लिए भी राज्य सरकार की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। बता दें प्रदेश के कृषि मंत्री फसल विविधीकरण के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये के रूप में किसानों को गैप फंडिंग की मांग कर रहे हैं।

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