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High Court: अर्धसैनिक बलों को पूर्व सैनिक श्रेणी में शामिल करने से हाईकोर्ट का इन्कार, पंजाब सरकार को निर्देश

Wed, 20 Aug 2025 04:06 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Wed, 20 Aug 2025 04:06 PM IST
सार

सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ के रिटायर्ड अधिकारियों को पूर्व सैनिक की श्रेणी में शामिल करने से पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने इन्कार कर दिया है। इसके लिए पंजाब सरकार को निर्देश दिए गए हैं। 

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Punjab Haryana High Court refuses to include paramilitary forces in ex-servicemen category
पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि अर्धसैनिक बलों जैसे सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ आदि के रिटायर्ड अधिकारियों को पूर्व सैनिक की श्रेणी में शामिल करना न्यायालय का नहीं, बल्कि सरकार का नीति संबंधी निर्णय है।

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अदालत ने इस विषय पर कोई आदेश पारित करने से इन्कार करते हुए कहा कि राज्य सरकार ही इस मुद्दे पर विचार करने और फैसला लेने के लिए सक्षम है। फाजिल्का (पंजाब) निवासी मक्खन सिंह ने लंबे समय तक सीआरपीएफ में सेवाएं दीं और रिटायरमेंट के बाद पंजाब पुलिस में कांस्टेबल (ड्राइवर) पद के लिए आवेदन किया था। उन्होंने पूर्व सैनिक की श्रेणी श्रेणी में नियुक्ति की मांग की लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें इस कोटे का लाभ नहीं दिया।
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तंग होकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में कहा गया कि पंजाब सरकार 23 नवंबर 2012 की अधिसूचना का लाभ सीआरपीएफ सहित सभी अर्धसैनिक बलों के रिटायर्ड अधिकारियों को दे। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि 11 फरवरी 1981 को सुप्रीम कोर्ट ने अखिलेश प्रसाद बनाम यूनियन टेरिटरी मिजोरम मामले में स्पष्ट किया था कि सीआरपीएफ को सशस्त्र बल की श्रेणी में रखा गया है। इस आधार पर अर्धसैनिक बलों को भी पूर्व सैनिक के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।
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मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा कि अदालत इस विषय पर फैसला नहीं दे सकती क्योंकि यह नीति निर्माण का मामला है। अदालत ने केवल इतना कहा कि पंजाब सरकार याचिकाकर्ता की प्रतिनिधित्व याचिका पर विचार करे और छह महीने के भीतर उचित आदेश पारित करे।

हाईकोर्ट ने कहा यह कोर्ट अर्धसैनिक बलों के रिटायर्ड अधिकारियों को पूर्व सैनिक की परिभाषा में शामिल करने का निर्णय नहीं कर सकता। यह नीति का विषय है और राज्य को ही इस पर निर्णय लेना है।

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