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Punjab: एग्रो फॉरेस्ट्री को बढ़ावा दे रही सरकार, खेतों के किनारे लगेंगे पौधे; किसानों को किया जाएगा जागरूक
Sun, 21 Jun 2026 06:58 PM IST
शाहिल शर्मा
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sun, 21 Jun 2026 06:58 PM IST
सार
इस योजना के तहत किसानों को जागरूक किया जा रहा है। जिला वन अधिकारी और उनकी टीम इसके लिए लिंक मार्गाें के साथ-साथ किसानों की जमीन चिह्नित करेगी।
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एग्रो फॉरेस्ट्री
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
ग्रीन पंजाब मिशन के तहत पंजाब सरकार एग्रो फॉरेस्ट्री (कृषि वानिकी) को बढ़ावा देगी। इसके चलते अब किसानों के खेतों में वन विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य वन क्षेत्र बढ़ाने के साथ-साथ किसानों के लिए अतिरिक्त आय का साधन तैयार करना है।
वन विकसित करने के लिए पोपलर, यूकेलिप्टस और डेक के पौधे लिंक मार्गों के किनारे किसानों के खेतों में लगाए जाएंगे और वन विकसित होने के बाद इन पेड़ों के मालिक भी किसान ही होंगे। तीनों किस्मों के पेड़ कम समय में तेजी से बढ़ते हैं और इनकी लकड़ी अच्छी कमाई का साधन बनती है। डेक व पोपलर के साथ-साथ यूकेलिप्टस की लकड़ी की भी मार्केट में खासी मांग है। इस पेड़ की लकड़ी का इस्तेमाल पेटियां, ईंधन, हार्ड बोर्ड, लुगदी, फर्नीचर, पार्टिकल बोर्ड और इमारतों को बनाने में होता है।
पंजाब के वन विभाग ने सूबे के सभी 16 डिविजन के अंतर्गत आने वाले जिलों में इस एग्रो फॉरेस्ट्री के तहत इन पौधों को लगाने का लक्ष्य तय कर लिया है। इसके चलते प्रदेश में किसानों के खेतों में 101500 पौधे पोपलर के, 73500 पौधे डेक के और 135000 पौधे यूकेलिप्टस के लगाए जाएंगे।
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पोपलर के सबसे ज्यादा 15 हजार पौधे दसूहा डिविजन के जिलों में लगेंगे जबकि डेक के सबसे ज्यादा 12 हजार पौधे फिरोजपुर और यूकेलिप्टस के सबसे ज्यादा 11-11 हजार पौधे जालंधर, बठिंडा और मुक्तसर डिविजन के जिलों में रोपित किए जाएंगे।
इस योजना के तहत किसानों को जागरूक किया जा रहा है। जिला वन अधिकारी और उनकी टीम इसके लिए लिंक मार्गाें के साथ-साथ किसानों की जमीन चिह्नित करेगी, जिसके बाद किसानों के खेतों में इन पौधों को लगाया जाएगा। किसान ही इन पौधों की देखरेख करेंगे और पेड़ बनने के बाद उनकी लकड़ी बेचकर अतिरिक्त कमाई भी करेंगे। ये पौधे खेतों में एकल पंक्ति में लगाए जाएंगे ताकि खेत के अन्य हिस्से में किसान अपनी खेतीबाड़ी कर सकें।
चार साल में बढ़े वन
पंजाब में साल 2022-23 से लेकर 20256-26 तक वनों का दायरा बढ़ रहा है। हालांकि ये वन छोटे-छोटे टुकड़ों में विकसित किए गए हैं। साल 2022-23 में 149, साल 2023-24 में 105, साल 2024-25 में 268 व साल 2025-26 में 382 सूक्ष्म वन विकसित किए गए। 2026-27 में 650 सूक्ष्म वनों को विकसित करने का लक्ष्य है। इसी तरह चार साल में 183 पवित्र वन विकसित किए जा चुके हैं जबकि पंजाब के विभिन्न जिलों के शैक्षणिक संस्थानों में 836 हेक्टेयर भूमि पर भी छोटे-छोटे वन तैयार किए जा चुके हैं।
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वन विकसित करने के लिए पोपलर, यूकेलिप्टस और डेक के पौधे लिंक मार्गों के किनारे किसानों के खेतों में लगाए जाएंगे और वन विकसित होने के बाद इन पेड़ों के मालिक भी किसान ही होंगे। तीनों किस्मों के पेड़ कम समय में तेजी से बढ़ते हैं और इनकी लकड़ी अच्छी कमाई का साधन बनती है। डेक व पोपलर के साथ-साथ यूकेलिप्टस की लकड़ी की भी मार्केट में खासी मांग है। इस पेड़ की लकड़ी का इस्तेमाल पेटियां, ईंधन, हार्ड बोर्ड, लुगदी, फर्नीचर, पार्टिकल बोर्ड और इमारतों को बनाने में होता है।
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पंजाब के वन विभाग ने सूबे के सभी 16 डिविजन के अंतर्गत आने वाले जिलों में इस एग्रो फॉरेस्ट्री के तहत इन पौधों को लगाने का लक्ष्य तय कर लिया है। इसके चलते प्रदेश में किसानों के खेतों में 101500 पौधे पोपलर के, 73500 पौधे डेक के और 135000 पौधे यूकेलिप्टस के लगाए जाएंगे।
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पोपलर के सबसे ज्यादा 15 हजार पौधे दसूहा डिविजन के जिलों में लगेंगे जबकि डेक के सबसे ज्यादा 12 हजार पौधे फिरोजपुर और यूकेलिप्टस के सबसे ज्यादा 11-11 हजार पौधे जालंधर, बठिंडा और मुक्तसर डिविजन के जिलों में रोपित किए जाएंगे।
इस योजना के तहत किसानों को जागरूक किया जा रहा है। जिला वन अधिकारी और उनकी टीम इसके लिए लिंक मार्गाें के साथ-साथ किसानों की जमीन चिह्नित करेगी, जिसके बाद किसानों के खेतों में इन पौधों को लगाया जाएगा। किसान ही इन पौधों की देखरेख करेंगे और पेड़ बनने के बाद उनकी लकड़ी बेचकर अतिरिक्त कमाई भी करेंगे। ये पौधे खेतों में एकल पंक्ति में लगाए जाएंगे ताकि खेत के अन्य हिस्से में किसान अपनी खेतीबाड़ी कर सकें।
चार साल में बढ़े वन
पंजाब में साल 2022-23 से लेकर 20256-26 तक वनों का दायरा बढ़ रहा है। हालांकि ये वन छोटे-छोटे टुकड़ों में विकसित किए गए हैं। साल 2022-23 में 149, साल 2023-24 में 105, साल 2024-25 में 268 व साल 2025-26 में 382 सूक्ष्म वन विकसित किए गए। 2026-27 में 650 सूक्ष्म वनों को विकसित करने का लक्ष्य है। इसी तरह चार साल में 183 पवित्र वन विकसित किए जा चुके हैं जबकि पंजाब के विभिन्न जिलों के शैक्षणिक संस्थानों में 836 हेक्टेयर भूमि पर भी छोटे-छोटे वन तैयार किए जा चुके हैं।