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अमेरिका में सिखों के खिलाफ नस्ली भेदभाव: ‘मिस्टर सिंह’ पोस्टर ने छेड़ी नई बहस, जानें क्या है पूरा मामला?

Fri, 11 Sep 2026 01:15 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, जालंधर
अमर उजाला ब्यूरो, जालंधर Published by: शाहिल शर्मा Updated Fri, 11 Sep 2026 01:15 PM IST
सार

अमेरिका में सिख समुदाय के खिलाफ नस्ली और धार्मिक भेदभाव का इतिहास पुराना है। 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद पगड़ी और दाढ़ी रखने वाले सिखों को कई बार मुस्लिम समझकर निशाना बनाया गया।

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Mr. Singh poster controversy in the USA
अमेरिका में मिस्टर सिंह पोस्टर विवाद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका में सिख समुदाय को उनकी पहचान, पहनावे और शक्ल-सूरत के आधार पर निशाना बनाए जाने की घटनाओं को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के आधिकारिक सोशल मीडिया पर जारी एक विवादित पोस्टर ने इस मुद्दे को नई बहस के केंद्र में ला दिया है। पोस्टर में एक भूरे रंग के व्यक्ति को ट्रांसफॉर्मर जैसे रोबोट के सामने दिखाया गया और उस पर लिखा था अमेरिका अमेरिकियों के लिए।

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सिख संगठनों ने जताया रोष 
हमारी सड़कों से हटो, आपको गाड़ी चलाना नहीं आता, मिस्टर सिंह। पोस्टर बाद में हटा दिया गया। सिख संगठनों ने पोस्टर में ‘सिंह’ उपनाम के इस्तेमाल को लेकर कड़ा विरोध जताया है। सिख गठबंधन ने इसे सिखों को उनकी शक्ल-सूरत और पहचान के आधार पर निशाना बनाए जाने का उदाहरण बताया। संगठन ने कहा कि 11 सितंबर के आतंकी हमलों के 25 साल बाद भी अमेरिका में सिखों को उनके रूप-रंग के कारण संदेह और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।
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सिखों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की घटनाएं 
अमेरिका में सिख समुदाय के खिलाफ नस्ली और धार्मिक भेदभाव का इतिहास पुराना है। 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद पगड़ी और दाढ़ी रखने वाले सिखों को कई बार मुस्लिम समझकर निशाना बनाया गया। इसके बाद सिखों के खिलाफ हिंसा और घृणा की कई घटनाएं सामने आईं। एफबीआई के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2025 में सिख विरोधी घृणा अपराध के 177 मामले दर्ज किए गए। सिख संगठनों का कहना है कि यह आंकड़ा समुदाय के खिलाफ बढ़ते नफरत और नस्ली पूर्वाग्रह की गंभीर तस्वीर पेश करता है।

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11 सितंबर के हमलों के बाद पैदा हुए नस्ली माहौल का दर्दनाक उदाहरण एरिजोना में पेट्रोल पंप के मालिक बलबीर सिंह सोढ़ी की हत्या रही। वर्ष 2001 में एक हमलावर ने उन्हें निशाना बनाकर उनकी हत्या कर दी थी। हमलावर ने कथित तौर पर उन्हें 11 सितंबर के हमलों से जोड़कर देखा था। इसके बाद वर्ष 2012 में विस्कॉन्सिन के ओक क्रीक स्थित गुरुद्वारे में एक श्वेत वर्चस्ववादी हमलावर ने गोलीबारी की, जिसमें छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी।

अमेरिकी सरकारी विभाग के पोस्टर पर विवाद
ताजा पोस्टर विवाद में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अमेरिकी सरकारी विभाग के आधिकारिक प्रचार में ‘सिंह’ जैसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले सिख उपनाम को ऐसे संदेश के साथ क्यों जोड़ा गया, जिसे प्रवासियों के खिलाफ अभियान के तौर पर देखा जा रहा है। सिख संगठनों का कहना है कि अमेरिका में लाखों सिख ‘सिंह’ उपनाम का इस्तेमाल करते हैं और अपनी पहचान पर गर्व करते हैं। 

ऐसे में सरकारी मंच से ‘मिस्टर सिंह’ को निशाना बनाना समुदाय के बीच चिंता पैदा करने वाला है। पोस्टर विवाद और अमेरिका में सिख समुदाय के खिलाफ बढ़ती घटनाओं को लेकर पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि विदेशों में बसे सिखों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। 

समुदाय से जुड़े लोगों का कहना है कि अमेरिका में सिख लंबे समय से देश के सामाजिक, आर्थिक और सार्वजनिक जीवन में योगदान दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उनकी धार्मिक और नस्ली पहचान के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। सिख संगठनों का कहना है कि ‘मिस्टर सिंह’ वाला पोस्टर भले ही सोशल मीडिया से हटा दिया गया हो, लेकिन इसने अमेरिका में सिखों के खिलाफ नस्ली पूर्वाग्रह, पहचान आधारित भेदभाव और घृणा अपराधों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संगठन चाहते हैं कि ऐसे मामलों को महज सोशल मीडिया विवाद मानने के बजाय अमेरिका में सिख समुदाय की सुरक्षा और बढ़ते नस्ली भेदभाव के व्यापक संदर्भ में देखा जाए।
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