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Punjab: विरोध के बाद हजूर साहिब विधेयक पर पीछे हटी महाराष्ट्र सरकार, फिलहाल विधानसभा में नहीं होगा पेश

Wed, 01 Jul 2026 12:02 PM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 01 Jul 2026 12:02 PM IST
सार

सिख संगठनों और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने आरोप लगाया था कि नए कानून के जरिए सरकार गुरुद्वारा बोर्ड के प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप बढ़ाना चाहती है। बोर्ड के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के नामांकन संबंधी प्रावधानों में भी सरकारी दखल की आशंका जताई गई थी।

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Maharashtra govt defers bill related to Sri Hazur Sahib bill transfer control to administrative board
देवेंद्र फडणवीस और तरुण चुघ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सिख समुदाय के कड़े विरोध के बीच महाराष्ट्र सरकार ने तख्त सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब से जुड़े प्रस्तावित संशोधन विधेयक को फिलहाल स्थगित कर दिया है। अब इसे विधानसभा में पेश नहीं किया जाएगा। 
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सिख नेताओं को आश्वस्त किया है कि सिख विद्वानों, धार्मिक संस्थाओं और अन्य हितधारकों से चर्चा के बाद ही सरकार इस मामले में आगे बढ़ेगी।
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महाराष्ट्र सरकार तख्त सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब एक्ट, 1956 में संशोधन कर नया कानून लाने की तैयारी कर रही थी। प्रस्तावित विधेयक के तहत मौजूदा नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब एक्ट-1956 को निरस्त किया जाना था।
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सिख संगठनों और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने आरोप लगाया था कि नए कानून के जरिए सरकार गुरुद्वारा बोर्ड के प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप बढ़ाना चाहती है। बोर्ड के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के नामांकन संबंधी प्रावधानों में भी सरकारी दखल की आशंका जताई गई थी। तख्त श्री हजूर साहिब के सेवादारों ने इसके विरोध में गुरमता भी जारी किया था।

लगातार विरोध के बाद सरकार ने विधेयक को फिलहाल रोक दिया है। अब 1956 का मौजूदा कानून ही लागू रहेगा। सरकार इस मुद्दे पर सिख विद्वानों, धार्मिक संस्थाओं और अन्य पक्षों से संवाद के लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी गठित करेगी।


भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने कहा कि नानक नाम लेवा संगत और विभिन्न सिख संगठनों की भावना थी कि सभी पक्षों से चर्चा के बाद ही कोई फैसला लिया जाए। मुख्यमंत्री ने संगत की भावनाओं का सम्मान करते हुए विधेयक स्थगित किया है और भरोसा दिया है कि सहमति के आधार पर ही आगे निर्णय लिया जाएगा।
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