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Western Command:लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने संभाली पश्चिमी कमांड की कमान, लेफ्टिनेंट जनरल कटियार रिटायर
Thu, 02 Apr 2026 02:51 PM IST
Ankesh Kumar
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: Ankesh Kumar
Updated Thu, 02 Apr 2026 02:51 PM IST
सार
कार्यभार संभालते हुए लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने उच्च स्तर की परिचालन तैयारी बनाए रखने, इनोवेशन्स को बढ़ावा देने तथा सभी रैंकों के कल्याण और मनोबल सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को दोहराया।
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लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह
- फोटो : सेना
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विस्तार
लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने बुधवार को पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार के सेवानिवृत होने के बाद यह जिम्मेदारी संभाली है। वे अभी सेना मुख्यालय में उप सेना प्रमुख का पदभार संभाल रहे थे। लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने दिसंबर 1987 में 4वीं बटालियन, द पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेस) से अपनी सेवाएं शुरू की थी। वे भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून और लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं।
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लगभग चार दशकों के अपने कॅरिअर में उन्होंने कमान और स्टाफ से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्होंने उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं के उच्च-ऊंचाई और संवेदनशील क्षेत्रों में विभिन्न सैन्य फॉर्मेशन्स का नेतृत्व किया है। उनके ऑपरेशनल अनुभव में ऑपरेशन पवन में भागीदारी के साथ-साथ नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कई बार काउंटर-इंसर्जेंसी अभियानों का अनुभव शामिल है।
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वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के रूप में नियुक्ति से पहले, उन्होंने सेना मुख्यालय में महानिदेशक परिचालन लॉजिस्टिक्स (डीजीओएल) के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने ऑपरेशनल मोबिलिटी, लॉजिस्टिक्स एकीकरण और स्थायित्व क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वीसीओएएस के रूप में उन्होंने सेना की संरचना, क्षमता विकास और ऑपरेशनल प्रिपेयर्डनेस की तैयारी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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उन्होंने कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट, सिकंदराबाद से डिफेंस मैनेजमेंट कोर्स और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान से एडवांस्ड प्रोफेशनल प्रोग्राम इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन किया है। उनके पास पंजाब विश्वविद्यालय से फिलॉसफी में मास्टर डिग्री है। उनकी उत्कृष्ट सेवा और वीरता के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और सेना मेडल (दो बार) से सम्मानित किया गया है।
उनके अनुसार यह बदलाव नेतृत्व की निरंतरता और भारतीय सेना की ऑपरेशनल एक्सीलेंस तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, पश्चिमी कमान बहु-क्षेत्रीय अभियानों, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन जैसी उन्नत तकनीकों के समावेश, इंटेलिजेंस-ड्रिवन ऑपरेशन्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर ध्यान केंद्रित करती रहेगी, साथ ही नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखेगी।